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बाइक को घसीटते ले गई बस, पेट्रोल टंकी में आग; दुबई से आए शख्स की मौत

रींगस के पास टक्कर से बाइक और बस में लगी आग, बस में थे करीब 50 यात्री, सभी सुरक्षित

Bhaskar News | Last Modified - Jan 17, 2018, 06:46 AM IST

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    रींगस के पास टक्कर से बाइक व बस में लगी आग, बस में थे करीब 50 यात्री, सभी सुरक्षित। 45 मिनट देरी से पहुंची दमकल बस में होते रहे धमाके

    सीकर/रींगस. जयपुर-सीकर हाइवे पर रींगस नर्सरी के पास सिमारला मोड़ पर मंगलवार को लोक परिवहन सेवा की बस व बाइक की भिड़ंत हो गई। इस हादसे में बाइक सवार मामा की मौत हो गई, जबकि भांजा घायल हो गया। 14 दिन में यह तीसरा बड़ा हादसा है और 12 मौत हो चुकी हैं। उधर, भांजे को गंभीर हालत में जयपुर रैफर किया गया।

    - टक्कर इतनी भीषण थी कि बाइक बस के नीचे आ गई। बेकाबू बस बाइक को करीब 150 फीट तक घसीटकर ले गई। पेट्रोल टंकी फटने से बाइक ब्लास्ट हो गई, जिससे बाइक व बस में आग लग गई। इस दौरान बस में सवार करीब 50 से ज्यादा सवारियों ने किसी तरह अपनी जान बचाई।

    - थानाधिकारी सुनील गुप्ता ने बताया कि हादसा शाम 7 बजे हुआ। पुलिस पहुंची तब तक बस चालक और परिचालक फरार हाे गए। बस सौ से ज्यादा की स्पीड में थी। संगीता ट्रेवल्स की लोक परिवहन बस सीकर जा रही थी।

    - बस के आगे सरगोठ से रींगस की तरफ बाइक पर दो युवक जा रहे थे। बस ने बाइक को टक्कर मारी। बाइक बस के नीचे आ गई। दोनों युवक टक्कर के बाद दूर जा गिरे।

    - बस बाइक को करीब 150 फीट तक घसीटकर ले गई। बाइक का जमीन से लगातार घर्षण होने से रिसते पेट्रोल ने आग पकड़ ली। पहले बाइक फिर बस में आग लग गई।

    - रात 9 बजे तक दमकलों की सहायता से आग पर काबू पाने का प्रयास किया गया, लेकिन काबू नहीं पाया जा सका। देर रात आग पर काबू पाया जा सका।
    - उल्लेखनीय है कि सीकर जिले में पिछले 14 दिन में तीन बड़े हादसे हो चुके हैं। तीन जनवरी को फतेहपुर में लोक परिवहन बस व ट्रोले की भिड़ंत में 11 लोगों की मौत हो गई। सोमवार को कल्याणपुरा में बस ओवरस्पीड में भिड़ गई थी। हादसे में कोई घायल नहीं हुआ था।

    20 दिन पहले दुबई से आया था रफीक, 25 फरवरी को वापस जाना था, मौत ले गई
    - बाइक सवार रफीक पुत्र इमामूदीन निवासी सरगोठ की हादसे में मौत हो गई। मृतक रफीक के भांजे शमसुद्दीन निवासी निवाना को गंभीर हालात में जयपुर रैफर किया गया है।

    - वर्तमान में रफीक के घर चिनाई का काम चल रहा था। भांजा शमसुद्दीन भी रफीक के साथ चिनाई कर रहा था। शाम को मामा-भांजा बाइक पर रींगस आ रहे थे।

    - रफीक 27 दिसंबर को दुबई से लौटा था। दुबई में रफीक चिनाई का काम करता था। 25 फरवरी को रफीक को वापस दुबई जाना था।

    45 मिनट देरी से पहुंची दमकल बस में होते रहे धमाके

    - रींगस नगरपालिका की दमकल पर कर्मचारियों के नहीं होने से करीब 45 मिनट की देरी से दमकल मौके पर पहुंची। रात आठ बजे बस के डीजल टैंक में ब्लास्ट हुआ।

    - बाद में चौमूं, खाटूश्यामजी की दमकल भी पहुंची। बस 3 घंटे से ज्यादा जलती रही। बार-बार धमाके होते रहे।

    तीनों हादसों में सामने आए 3 बड़े कारण

    1. स्पीड :तीनों हादसों में लोक परिवहन बस की स्पीड ज्यादा थी। स्टेज कैरिज के नियमानुसार एक घंटे में एक्सप्रेस बस 45 किमी और लोकल बस 35 किमी से ज्यादा सफर नहीं कर सकती।
    ...लेकिन लोक परिवहन की बस 80 से 110 किमी की स्पीड से दौड़ रही हैं। तीन जनवरी को हुए हादसे में बस की स्पीड 100, 15 जनवरी को 77 और 16 जनवरी को हुए हादसे में भी 100 किमी की स्पीड थी। ओवर स्पीड चल रही लोक परिवहन श्रेणी बस में स्पीड गवर्नर भी नहीं हैं।

    2. बचाने की कार्यशैली :ज्यादातर लोक परिवहन बस संचालक रसूख वाले हैं। जिम्मेदारी अधिकारी कार्रवाई करने से डरते हैं। अनफिट बसों का परमिट बढ़ाया जा रहा है।
    परिवहन विभाग इंस्पेक्टरों के जरिए नियमित जांच अभियान चलाने का दावा करता है, लेकिन अधिकारी फील्ड में गंभीरता से नहीं जांच करते। 11 मौत के बाद ड्राइवर को जिम्मेदार बताकर आरटीओ ने महकमे को बचाने के लिए परिवहन आयुक्त को गलत रिपोर्ट दी।


    3. परमिट :लोक परिवहन योजना के तहत निजी बसों को रोडवेज के समानांतर चलाने की बात कही गई थी। लंबी दूरी की रोडवेज एक्सप्रेस श्रेणी के तहत ही बसों का संचालन करती है, लेकिन परिवहन विभाग द्वारा दिए गए परमिट के अनुसार, लोक परिवहन बस आधा सफर गैर अधिसूचित मार्ग पर पूरा करती है तो आधा सफर अधिसूचित मार्ग पर होता है।

    ये झूठ और लाचारी से उपजी तेज स्पीड है, जो काबू से बाहर हो चुकी है

    ये झूठ और लाचारी से उपजी इतनी तेज ‘स्पीड’ है कि कोई ‘स्पीड गवर्नर’ पकड़ नहीं पा रहा। शायद इसीलिए, लोक परिवहन देखते-देखते ‘परलोक परिवहन सेवा’ में तब्दील हो गई। ...और अब समूचे तंत्र के काबू से बाहर हो गई। 14 दिन और 3 बड़े हादसे इस सत्य की चीख-चीख कर गवाही दे रहे हैं। मंगलवार को नौजवान रफीक को खोया। चंद दिन पहले 11 लोग खो चुके। सोमवार को ‘भाग्य’ साथ था तो कई लोगों को बचा लिया। वरना, ये दर्द भी छोटा नहीं होता। सुना हैं, दर्द उसे होता है, जिसने खोया है...। क्या ये सही है? रोलसाहबसर में हुए हादसे में बस के दो टुकड़े हो जाते हैं। 11 लोगों की मौत हो जाती है। तब दैनिक भास्कर खुलासा करता है कि अनफिट बस का परमिट तीन बार गलत तरीके से बढ़ाया गया। खटारा बस को 88 से 328 किमी चलाने की मंजूरी दे दी गई। और भी कई चौंकाने वाले तथ्य हैं, जो जिम्मेदारों को कठघरे में खड़ा करते हैं। हैरानी की बात है कि जिन आरटीओ पर आरोप है, उन्हें ही जांच की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है। झूठ और लाचारी से गढ़ी रिपोर्ट तैयार होती है। कहा गया, खबर भ्रामक है। हादसा है। लाचार है। हादसे तो रुक नहीं सकते। ड्राइवर जिम्मेदार है? क्या सिस्टम की कोई जिम्मेदारी नहीं?


    सीकर रीजन में चलने वाली 323 लोक परिवहन बसों में से 70 के परमिट दो गुना तक बढ़ गए। ये कोई बता सकता है, कैसे? 6 घंटे की दूरी 4 घंटे में तय करने वाली ऐसी कौनसी हाईटेक बसें प्रशासन को दिख गईं? चिकित्सा राज्य मंत्री के रिश्तेदारों सहित रसूखदारों की बसें बिना परमिट और दूसरे रूट पर कैसे चल सकती हैं? (भास्कर 16 अक्टूबर को इसका खुलासा कर चुका है।) लेकिन एक के बाद एक, हादसे। फिर भी जिम्मेदारी से बचने के लिए झूठ और धोखे का इतना बड़ा आभामंडल रचा जा रहा है, आखिर कैसे? यह समूचे तंत्र की लापरवाही है। ऐसी बड़ी चूक है, जो कभी माफ नहीं करने योग्य है। बस नहीं, लोग खौफ देख रहे हैं। परिवार सुन-सहम रहे हैं। क्या प्रशासन जैसा कुछ होता है? होता है तो कहां रहता है? कई सवाल होने लगे हैं। इन सबके बीच, सत्ता पक्ष के नेता, विपक्ष सब चुनाव से पहले ही हारे हुए सिपाहियों की तरह लुप्त प्राय: हो चुके हैं, जैसे इनकी कोई जिम्मेदारी है ही नहीं। क्या दर्द चुनाव में ही याद आता है? ये जनता की जिंदगी का सवाल है? कोई कुछ बोलता नहीं, इसलिए सुनने वालों ने अपने कानून बना लिए हैं। लेकिन ये शेखावाटी की जनता है, जब बोलती है तो क्रांति का सूत्रपात करती है, जिम्मेदार यह जान लें।

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    20 दिन पहले दुबई से आया था रफीक, 25 फरवरी को वापस जाना था, मौत ले गई । (घायल शमसुद्दीन)
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    मृतक रफीक
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