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हत्या-चोरी के मामले 25% बढ़े, दिसंबर में पेडेंसी के डर से मामले ही दर्ज नहीं कर रही पुलिस

पीड़ित काट रहे पुलिस थानों के चक्कर, पुलिस आंकड़ों के जाल से दावा कर रही अपराधों में कमी आने का

Dainik Bhaskar

Dec 20, 2017, 08:22 AM IST
Increase in cases like murder-theft this year

सीकर. पुलिस का दावा है कि जिले में इस साल अपराध में कमी हुई है। लेकिन हकीकत यह है कि इस साल हत्या-चोरी जैसे मामलों में 25 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। यही वजह है कि अक्टूबर महीने की रैंकिंग में सीकर पुलिस 22वें स्थान पर पहुंच गई। पुलिस आंकड़ों के जाल में अपराध का आंकलन कम मान रही है। पुलिस को टारगेट दिया गया है कि इस साल के आखिरी तक लंबित प्रकरण 5 फीसदी से ज्यादा न रहे। अब पुलिस दिसंबर में मामले दर्ज करने से बच रही है। ऐसे में पीड़ित थानों से लेकर अधिकारियों तक चक्कर लगा रहे हैं। पुलिस अपने ट्रैक रिकॉर्ड ठीक करने में जुटी है।

विधानसभा में पेश किए गए जवाब में सीकर पुलिस ने दावा किया कि अप्रैल से अगस्त तक पिछले साल की तुलना अपराध में कमी हुई है। जोड़-तोड़ के आंकड़ों में भले ही पुलिस अपराध को कम मान रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि अप्रैल से अगस्त 2017 तक महज पांच महीने में ही 31 हत्या और 11 हत्या के प्रयास के मामले दर्ज हुए।

हालात यह है कि पुलिस चोरी की घटनाएं रोक पाने में भी नाकाम रही। इन पांच महीने में पिछले साल की तुलना इस बार 10 चोरी की घटनाएं ज्यादा हुई। अब साल के आखिरी में थानों में मुकदमे कम दर्ज किए जा रहे हैं, क्योंकि साल के आखिर में सभी पुलिस थानों को पेंडेंसी कम दिखानी है।

परिवादियों को समझा बुझाकर वापस भेजा जा रहा है। ऐसे में पीड़ित 56 लोगों को मुकदमा दर्ज करवाने के लिए कोर्ट इस्तगासे का सहारा लेना पड़ रहा है। गंभीर मामलों में ही पुलिस मुकदमे दर्ज कर रही है। पिछले महीने की तुलना इस महीने में अब तक पचास फीसदी कम मामले दर्ज हुए हैं।

1. पुलिस ने समय पर दर्ज नहीं किया मामला, पिता की हो गई हत्या

लोसल इलाके में तीन दिसंबर को गिरधारी बावरियां की हत्या हुई। जबकि मृतक की बेटी ने 17 नंवबर को एसपी को परिवाद देकर मुकदमा दर्ज कराने की लिए फरियाद की थी। बताया था कि उसके पिता की जान को आरोपियों से खतरा है। पुलिस ने केस दर्ज नहीं किया और मामले को गंभीरता से नहीं लिया। नतीजा- गिरधारी की हत्या हो गई। बाद में मुकदमा दर्ज हुआ। लेकिन आरोपी अब तक गिरफ्तार नहीं हुए।


2. नाबालिग से ज्यादती पर भी केस दर्ज करने में देरी

लोसल में चार दिसंबर को एक नाबालिग का अपहरण व ज्यादती हुई। परिजनों ने पांच दिसंबर को पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया व मुकदमा दर्ज नहीं किया। इसके बाद पुलिस ने छह दिसंबर को मुकदमा दर्ज किया। 19 दिसंबर को आरोपी को गिरफ्तार कर किया गया।

यह है कारण

जिले में लंबित प्रकरण 13.26 फीसदी है। यह पेंडेंसी पांच फीसदी तक लानी है। इस टारगेट को पूरा करने के लिए पुलिस प्रशासन मशक्कत कर रहा है। इसलिए पुलिस थानों में नए मुकदमे दर्ज नहीं किए जा रहे। सबसे ज्यादा 22.22 मामले रींगस थाने में लंबित है। दूसरे नंबर पर दांतारामगढ़ थाने में 19.30 फीसदी है। नीमकाथाना शहर में 18.35, उद्योगनगर थाने में 17.32 व सदर शहर में 17.27 फीसदी पेंडिंग केस है। जिसे के हर थाने में लंबित केस सात फीसदी से ज्यादा है। पुलिस अधिकारियों के पास लंबित मामले निपटाने के लिए महज 11 दिन बचे हैं।

सालभर में 743 मामले बढ़े
पिछले साल 31 दिसंबर तक भारतीय दंड संहिता में 5758 मामले दर्ज हुई। जबकि इस साल 17 दिसंबर तक 5696 मामले दर्ज हुए हैं। आंकड़ों में इस साल 46 मामले कम दर्ज हुए हैं। इनमें से पुलिस सिर्फ 86 मामलों में चालान पेश कर पाई है। जबकि 58 मामलों में एफआर लगा दी।

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