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मरीजों के लिए 'आफत'काल: आज ये तस्वीरें सिर्फ हड़ताली डॉक्टरों और सरकार के लिए

एसके अस्पताल में मरीजों को किया डिस्चार्ज। सबसे बड़े अस्पताल में सिर्फ सात ही मरीज बचे। पोस्टमार्टम के लिए भी जयपुर तक

Bhaskar News | Last Modified - Dec 18, 2017, 06:08 AM IST

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    केस 1 : श्यामपुरा पूर्वी की लाडादेवी को निमोनिया था। तीन दिन पहले एसके अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। परिजनों का आरोप है अस्पताल प्रबंधन ने रविवार सुबह जबरन अस्पताल से निकाल दिया। लाडादेवी ट्रोमा के सामने तड़पती रही। दोपहर बाद परिजन उसे दूसरी जगह इलाज के लिए ले गए।

    सीकर. मरीजों के लिए रविवार का दिन आफतकाल रहा। मरीजों का दर्द बढ़ने के लिए जिम्मेदार थे डॉक्टर और सरकार। डॉक्टर मरीजों की सेवा की शपथ भूल हड़ताल पर चले गए। वहीं सरकार ने पहले से हड़ताल का पता होने के बावजूद कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की। डाॅक्टरों और सरकार की इस लड़ाई में मरीज एक बार फिर बेबस नजर आए। 33 दिन बाद शनिवार शाम डॉक्टर हड़ताल पर चले गए थे। नतीजा परिजनों को पोस्टमार्टम के लिए भी बॉडी जयपुर तक ले जानी पड़ी। मरीजों को सुबह ही अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। मरीज अपना दर्द लिए भटकते रहे। हादसे में घायल मरीजों को भी प्राथमिक उपचार के बाद जयपुर रैफर किया जाता रहा। इस बीच पुलिस ने फिजिशियन डॉ. गजराजसिंह को पकड़ लिया। उन्हें समझाईश व शपथ पत्र पेश किए जाने के बाद एसके अस्पताल में ज्वाॅइन करवाया गया।

    एसके अस्पताल में शनिवार तक 144 मरीज भर्ती थे। रविवार सुबह पीएमओ वार्डों में पहुंचे और भर्ती टिकट पर डिस्चार्ज लिख दिया। इसके बाद मरीजों को अस्पताल से निकाला जाने लगा। शाम तक एसके अस्पताल में महज 7 मरीज बचे थे। जनाना में 51 मरीज भर्ती रहे। इनमें 4 नवजात शामिल हैं। जनाना अस्पताल में मेडिकल कॉलेज प्रिंसीपल डॉ. गोवर्धन मीणा ने भर्ती महिलाओं और नवजात बच्चों का इलाज किया। 9 गंभीर महिलाओं को एंबुलेस के जरिए जयपुर रेफर किया। रविवार को भढाढ़र के पास हादसे में मृतक का पोस्टमार्टम पीएमओ एसके शर्मा ने किया।

    एक दिन बाद समझी पीड़ा सीएमएचओ ने लगाए 9 डॉक्टर

    एसके अस्पताल में सीएमएचओ ने एसके और जनाना अस्पताल में नौ डॉक्टर लगाए हैं। जो सोमवार से मोर्चा संभालेंगे। इसके अलावा आयुर्वेद डॉक्टरों की भी ड्यूटी लगाई है। रविवार शाम को कलेक्टर ने स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ मीटिंग कर वैकल्पिक इंतजाम करने को कहा। छह से 12 नवंबर तक डाॅक्टरों की हड़ताल के दौरान सरकार ने वैकल्पिक व्यवस्था भी की थी। इसमें आयुर्वेद डाॅक्टरों को लगाया गया था। प्राइवेट अस्पतालों में भी इलाज की सहुलियत दी, लेकिन रविवार को यह व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानी हुई।

    इनसे सीखने की जरूरत है
    मध्यप्रदेश : यहां आयुर्वेदिक डॉक्टरों को एलोपैथिक दवाई लिखने का अधिकार है। पिछले दिनों इसका गजट नोटिफिकेशन जारी हुआ। इसके बाद से आयुर्वेदिक डाक्टर एलोपैथिक दवा लिख रहे हैं।


    छत्तीसगढ़ :फार्मासिस्ट को क्लिनिक खोलकर दवा संबंधी परामर्श देने का अधिकार है। डाक्टरों की तरह परामर्श पर लेने भी वसूलने का अधिकार है।

    छह साल पहले नर्सेज को दवा लिखने का अधिकार मिल जाता तो आज मरीज परेशान नहीं होते

    बार-बार डॉक्टरों की हड़ताल में मरीज नहीं पिसते यदि सरकार ने छह साल पहले बनाए एक प्राेजेक्ट को(जिसमें नर्सेज को दवा लिखने के लिए अधिकृत किया जाना था) उस समय गंभीरता से लिया होता। दरअसल, स्वास्थ्य निदेशालय स्तर पर डॉक्टरों का विकल्प तलाशने की शुरुआत 2011 में शुरू हुई। क्योंकि डॉक्टर उस समय हड़ताल पर उतरकर मनमानी मांगें मनवाने चाह रहे थे।
    सरकार ने इसलिए नर्सेज को दवा लिखने का अधिकार देने का प्लान बनाया। 8 मई 2012 को स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख शासन सचिव बीएन शर्मा ने नर्सेज को प्राथमिक चिकित्सा का अधिकार देने के आदेश जारी किए। 76 तरह की दवाएं लिखने के लिए अधिकृत किया। लेकिन बाद में डॉक्टरों ने फैसले पर आपत्ति जता दी। इसके बाद फिर नर्सेज संगठनों की मांग पर फिर इस कवायद शुरू हुई। इसके लिए छह सदस्यीय कमेटी बनी। कमेटी ने नर्सेज को दवा लिखने और प्राथमिक उपचार का अधिकार देने की सिफारिश की। इंडियन नर्सिंग कौंसिल ने भी सहमति दे दी। लेकिन मामला फिर अटक गया।

    इंडियन नर्सिंग कौंसिल अधिकार देने के पक्ष में था

    स्वास्थ्य निदेशालय ने नर्सेज को दवा लिखने का अधिकार देने के संबंध में इंडियन नर्सिंग कौंसिल की राय जानी। कौंसिल ने तर्क दिया कि नर्सिंग स्टूडेंट को एनाटोमी, फीजियोलॉजी, पेथोलॉजी, गाइनोलॉज आदि की पढाई जाती है। ऐसा कोर्स एमबीबीएस स्टूडेंट के लिए लागू है। इसलिए नर्सेज को प्राथमिक उपचार का अधिकार देने का फैसला सही है। 14 मार्च 2012 को कौंसिल की सेक्रेटरी संध्या गुप्ता ने इस संबंध में आदेश जारी किए थे। डॉक्टरों मामले को इंडियन मेडिकल कौंसल में चले गए। इसके चलते बाद में फैसले पर अमल नहीं हो सका।

    नर्सिंग कोर्स में प्राथमिक चिकित्सा के गुर स्टूडेंट को सिखाए जाते हंै।नर्सेज को दवा लिखने का अधिकार मिलना चाहिए। इंडियन नर्सिंग कौंसिल और सरकार द्वारा बनाई गई कमेटी इससे सहमत है। इसे सरकार और डॉक्टरों के बीच चल रही रस्साकस्सी से नहीं जोड़ना चाहिए।
    राजेंद्र राणा, प्रदेशाध्यक्ष राज्य नर्सेज एसो.


    मरीज हितों में डॉक्टर और सरकार दोनों मिलजुलकर समस्या हल निकालें। डॉक्टरों को प्रयास होना चाहिए कि मरीजों को किसी प्रकार की समस्या न आए। क्योंकि गरीब जनता ही सरकारी अस्पतालों में पहुंचती है। सरकार को भी सख्ती से ]बचना चाहिए था, ताकि ऐसे हालात नहीं बनते।
    -डॉ. वेदप्रकाश बिसाऊ सीएचसी प्रभारी

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    पुलिस ने डॉक्टर को पकड़ा, अस्पताल में ज्वॉइन कराया

    कोतवाली पुलिस ने रविवार को एसके अस्पताल के एक डॉ. गजराजसिंह को राणीसती के पास पकड़ा। वे अपनी कार में बैठे थे। इसके बाद पुलिस डाॅक्टर को पुलिस चौकी लेकर आ गई। डाॅक्टर से हड़ताल पर नहीं जाने की सहमति का शपथ पत्र लिखवाया गया। शाम को पुलिस गजराजसिंह को लेकर एसके अस्पताल पहुंची। यहां पीएमओ की मौजूदगी में गजराजसिंह को ज्वाॅइन कराया गया।

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    हमीरपुरा कला के हरिनारायण शनिवार को कोचिंग में पढ़ रहे दोनों बच्चों से मिलने सीकर शहर आए। रात को हार्ट अटैक से उनकी मौत हो गई। शव एसके अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया। रविवार सुबह परिजन पोस्टमार्टम के लिए भटकते रहे। बाद में पुलिस के सहयोग से शव जयपुर भिजवाया।
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