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गाजरों के लिए फेमस है ये गांव, 2 करोड़ रु की कमाई हर सीजन में करते हैं किसान

गांव से रोजाना करीब 100 क्विंटल गाजर दिल्ली, गुड़गांव और आसपास के क्षेत्रों में बेचने के लिए भेजी जाती हैं।

Dainik Bhaskar

Dec 26, 2017, 08:24 AM IST
राजस्थान के भरतपुर में उच्च तकनीक से गाजर की खेती की जा रही है। गाजर खुदाई के बाद इसके धोने की जो मजदूरी की लागत लगती थी, उसे कम करने के लिए किसानों ने दो धुलाई मशीनें खरीद ली हैं। राजस्थान के भरतपुर में उच्च तकनीक से गाजर की खेती की जा रही है। गाजर खुदाई के बाद इसके धोने की जो मजदूरी की लागत लगती थी, उसे कम करने के लिए किसानों ने दो धुलाई मशीनें खरीद ली हैं।

भरतपुर. किसानों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि वे महज 3 माह में दो करोड़ रुपए की कमाई गाजर की खेती से कर सकेंगे। लुपिन फाउंडेशन ने किसानों को जब उच्च गुणवत्तायुक्त बीज, खेती करने की तकनीक एवं बाजार के बारे में बताया तो उन्होंने कड़ी मेहनत कर इसे हकीकत में कर दिखाया। आज स्थिति यह है कि इंद्रोली गांव से रोजाना करीब 100 क्विंटल गाजर दिल्ली, गुड़गांव और आसपास के क्षेत्रों में बेचने के लिए भेजी जाती हैं।

- दरअसल, इंद्रोली गांव में जमीन रेतीली एवं उपजाऊ होने और सिंचाई के लिए भरपूर मीठा पानी उपलब्ध होने से गाजर की बंपर फसल होती है।

- किसान गाजर की अधिक रेट लेने के लिए इसकी बुआई अगस्त माह में ही कर देते हैं। अक्टूबर में गाजर बाजार में आने लगती जाती है।

- इससे किसानों को चार से पांच गुना अधिक मूल्य मिलता है। इंद्रोली गांव में करीब 250 बीघा भूमि में गाजर की फसल होती है।

- गाजर खुदाई के बाद इसके धोने की जो मजदूरी की लागत लगती थी, उसे कम करने के लिए किसानों ने दो धुलाई मशीनें खरीद ली हैं, जिनसे मात्र एक घंटे में करीब 20 क्विंटल गाजरों की धुलाई हो जाती है।

इसलिए फेमस हुईं गाजर

- किसानों को लुपिन फाउंडेशन ने अधिक उत्पादन देने वाले अच्छे बीज उपलब्ध कराए। इससे इंद्रोली की गाजर प्रसिद्ध हो गई।

- आज स्थिति यह है कि कोसी या होडल में इंद्रोली की गाजर दाम से नहीं नाम से बिकती है और रेट भी अधिक मिलती है।

- अगेती गाजर बोने वाले किसान फसल लेने के बाद गेहूं की बुआई कर देते हैं जबकि पछेती बुआई करने वाले मूंग या अन्य दलहनी फसलों की बुआई करते हैं।

खेत से गाजर निकालती महिला। शहरों में इस गाजर की अच्छी डिमांड है। खेत से गाजर निकालती महिला। शहरों में इस गाजर की अच्छी डिमांड है।
इंद्रोली गांव में करीब 250 बीघा भूमि में गाजर की फसल होती है। इंद्रोली गांव में करीब 250 बीघा भूमि में गाजर की फसल होती है।
किसान गाजर की अधिक रेट लेने के लिए इसकी बुआई अगस्त माह में ही कर देते हैं। किसान गाजर की अधिक रेट लेने के लिए इसकी बुआई अगस्त माह में ही कर देते हैं।
आज स्थिति यह है कि इंद्रोली गांव से रोजाना करीब 100 क्विंटल गाजर दिल्ली, गुड़गांव और आसपास के क्षेत्रों में बेचने के लिए भेजी जाती हैं। आज स्थिति यह है कि इंद्रोली गांव से रोजाना करीब 100 क्विंटल गाजर दिल्ली, गुड़गांव और आसपास के क्षेत्रों में बेचने के लिए भेजी जाती हैं।
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राजस्थान के भरतपुर में उच्च तकनीक से गाजर की खेती की जा रही है। गाजर खुदाई के बाद इसके धोने की जो मजदूरी की लागत लगती थी, उसे कम करने के लिए किसानों ने दो धुलाई मशीनें खरीद ली हैं।राजस्थान के भरतपुर में उच्च तकनीक से गाजर की खेती की जा रही है। गाजर खुदाई के बाद इसके धोने की जो मजदूरी की लागत लगती थी, उसे कम करने के लिए किसानों ने दो धुलाई मशीनें खरीद ली हैं।
खेत से गाजर निकालती महिला। शहरों में इस गाजर की अच्छी डिमांड है।खेत से गाजर निकालती महिला। शहरों में इस गाजर की अच्छी डिमांड है।
इंद्रोली गांव में करीब 250 बीघा भूमि में गाजर की फसल होती है।इंद्रोली गांव में करीब 250 बीघा भूमि में गाजर की फसल होती है।
किसान गाजर की अधिक रेट लेने के लिए इसकी बुआई अगस्त माह में ही कर देते हैं।किसान गाजर की अधिक रेट लेने के लिए इसकी बुआई अगस्त माह में ही कर देते हैं।
आज स्थिति यह है कि इंद्रोली गांव से रोजाना करीब 100 क्विंटल गाजर दिल्ली, गुड़गांव और आसपास के क्षेत्रों में बेचने के लिए भेजी जाती हैं।आज स्थिति यह है कि इंद्रोली गांव से रोजाना करीब 100 क्विंटल गाजर दिल्ली, गुड़गांव और आसपास के क्षेत्रों में बेचने के लिए भेजी जाती हैं।
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