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खुदाई में मिली 10वीं सदी की इंसानी खोपड़ी, यहां देश-विदेश से पहुंच रहे रिसर्चर

म्यूजियम डिपार्टमेंट की देखरेख में कराए जा रहे खुदाई में गुरुवार को मानव खोपड़ी मिली है।

Dainik Bhaskar

Feb 09, 2018, 05:44 AM IST
researchers reached after ancient human bones found

देसूरी( राजस्थान). नाडोल भारमल नदी के किनारे स्थित जूनाखेड़ा प्राचीन स्थल पर आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट एवं म्यूजियम डिपार्टमेंट की देखरेख में कराए जा रहे खुदाई में गुरुवार को मानव खोपड़ी मिली है। काफी समय से चले रहे खुदाई के दौरान 10 वीं शताब्दी के मंदिर, मकान समेत अन्य काफी वस्तुएं मिलने के बाद देश-विदेश के रिसर्चर की जूना खेड़ा के प्रति उत्सुकता बढ़ गई है।

गुरुवार को यहां पर रिसर्च करने को लेकर पुदुचेरी में रहने वाली जापानी रिसर्चर स्टूडेंट माया मीमा, माधव यूनिवर्सिटी आबूरोड से आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट के हेड ऑफ डिपार्टमेंट प्रियांक तलसेरा व चिंतन ठाकुर भी नाडोल पहुंच गए हैं। वे भी खोज एवं उत्खनन अधिकारी डॉ.विनीत गोधल की देखरेख में चल रहे खुदाई के काम में मदद कर रहे हैं।

इमरान अली अधिकारी आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट और म्यूजियम डिपार्टमेंट के अधिकारी इमरान अली ने बताया कि भारमल नदी के किनारे स्थित जूनाखेड़ा प्राचीन स्थल में इन दिनों खुदाई का काम किया जा रहा है।

इस दौरान 10 वीं शताब्दी से जुड़ी कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। अब तक की खुदाई में 10 शताब्दी की मुद्रा के रूप में सिक्का और मोहरे सहित मिट्टी के बर्तन सहित अन्य अवशेष मिले हैं। साथ ही मंदिरों व मकानों के अवशेष भी मिल चुके हैं।

इस प्राचीन स्थल का रिसर्च करने के लिए जापानी रिसर्चकर्ता माया मीमा तीन सप्ताह तक यह रुक कर खुदाई सहित अवशेष पर रिसर्च करने का काम करेगी। माधव यूनिवर्सिटी से आए रिसचर्स द्वारा अब तक खुदाई में मिले अवशेषों सहित जूनाखेड़ा की खुदाई और मिले मकानों की दीवारों पर रिसर्च कर इसके इतिहास के बारे में जानकारी हासिल करेंगे। प्रियांक तलसेरा और चिंतन ठाकुर भी जूनाखेड़ा की खुदाई स्थल पर काम शुरू कर दिया है। यह इस स्थान पर रुक कर रिसर्च काम करेंगे। गुरूवार को खुदाई का काम चल रहा था।

मानव खोपड़ी मिली, दावा-10 वीं शताब्दी की खोपड़ी

गुरुवार को खुदाई के दौरान मानव खोपड़ी मिली है। इसको लेकर आर्कियोलॉजिकल डिपार्टमेंट विभाग के अधिकारियों की तरफ से दावा किया जा रहा है कि यह मानव खोपड़ी 10 वीं शताब्दी की है। खोपड़ी कई स्थानों पर क्षतिग्रस्त हो चुकी है। इसको सुरक्षित रखा गया है। इस पर रिसर्च कर पता लगाया जाएगा। खुदाई में गुरुवार को भी मिट्टी के बर्तनों सहित अन्य अवशेष मिले है। खुदाई कार्य में जगदीश चंदुल पॉटरी सहायक,मानाराम सीरवी, रतनसिंह, किस्तूरचन्द, सकाराम सहित अन्य कर्मचारी सहयोग दे रहे हैं।
देसूरी.जूनाखेड़ा पहुंचे रिसर्चकर्ता।

खुदाई में मिला 10 शताब्दी के मानव की खोपड़ी
जूनाखेड़ा नाडोल की खुदाई के दौरान पुराविदों को 6 से 7 फीट लम्बे मानव के कंकाल पहले भी मिल चुके है। जबकि 2017 में हुई खुदाई में भी एक मानव कंकाल मिला था। इससे इस स्थान पर कुछ घटना होने के संकेत मिल रहे थे। गुरूवार को खुदाई के दौरान पुराविदों को एक मानव की खोपड़ी मिली है। जो 10 शताब्दी के मानव की हो सकती है।

जापानी रिसर्चर का 3 सप्ताह तक नाडोल में पड़ाव
जूनाखेड़ा प्राचीन स्थान नाडोल पर रिसर्च करने के लिए गुरूवार का जापानी रिसर्चर छात्रा माया मीमा पांडिचेरी से नाडोल पहुंची। जो पुराविदों के साथ मिलकर तीन सप्ताह तक जूनाखेड़ा में खुदाई कार्य करने के साथ रिसर्च भी करेगी।

कई स्थानों से जूना खेड़ा पर रिसर्च के लिए पहुंच रहे रिसर्चर
- खोज उत्खनन अधिकारी डॉ. विनीत गोधल ने बताया कि प्रदेश में जूनाखेड़ा नाडोल की खुदाई में कई चौंकाने वाली जानकारी सामने आ रही है। गुरुवार को खुदाई के दौरान मानव खोपड़ी मिली है।

- संभवत: यह 10 वीं शताब्दी के मानव की है। लगातार हो रहे खुलासे के बाद देश-विदेश के कई रिसर्चर स्टूडेंट नाडोल पहुंच रहे हैं।

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