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बेटी के जन्म पर निकाला शाही जुलूस, बच्ची के नाना की भूमिका में थे कलेक्टर

आमतौर पर बेटे के जन्म पर निभाई जाने वाली छूछक की रस्म बेटी के जन्म पर निभाई गई। छूछक भी शाही।

Dainik Bhaskar

Jan 30, 2018, 04:06 AM IST
Royal procession on daughter s birth

झुंझुनूं. यह तस्वीर सिर्फ एक समारोह की नहीं, बड़े बदलाव की है। आमतौर पर बेटे के जन्म पर निभाई जाने वाली छूछक की रस्म बेटी के जन्म पर निभाई गई। छूछक भी शाही। झुंझुनूं में पहली बार हुए ऐसे समारोह की भव्यता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नवजात बच्ची के नाना की भूमिका में थे कलेक्टर और ननिहाल वाले थे झुंझुनूं का पूरा प्रशासन। बग्घी के पीछे चल रहा था 23 गाड़ियों का काफिला

- महिला एवं बाल विकास विभाग में सुपरवाइजर अनीता पत्नी राजवीर सिलाइच अपनी गोद में नवजात बेटी की लेकर बग्घी में बैठीं।

- बग्घी के दायीं तरफ नगर परिषद सभापति सुदेश अहलावत तथा बायीं तरफ कलेक्टर दिनेश कुमार यादव अपनी कार में सवार थे।
- बग्घी के आगे गीतों की धुन बिखेरता बैंड चल रहा था। बग्घी के पीछे करीब 23 गाड़ियों में परिवार के लोग, प्रशासन के करीब एक दर्जन अधिकारी व अन्य कर्मचारी सवार थे।
- लोकल एडमिनिस्ट्रेशन और महिला व अधिकारिता विभाग के इस ज्वाइंट इवेंट में इनफॉर्मेशन सेंटर में फंक्शन किया गया। अनीता सिर पर कलात्मक इंडुणी पर जल से भरा कलश लेकर कुछ दूर चली।

- इसके बाद सभापति सुदेश अहलावत की पत्नी कल्पना, चाइल्ड वेलफेयर कमेटी की अध्यक्ष सुमन पूनिया व अन्य महिलाओं ने नवजात जाह्नवी को गोद में लिए अनिता को बग्घी में बैठाया।
- बग्घी के पीछे गाड़ियों में कलेक्टर की पत्नी उर्मिला यादव, कस्तूरबा गर्ल्स रेजिडेंसियल स्कूल की प्रिंसिपल नीतू न्यौला सहित कई लोग थे।
- वुमन इंपावरमेंट डिपार्टमेंट की ओर से करीब दस हजार रुपए की चूनड़ी (पीळो) मंगवाई गई थी। मौजूद लोगों ने खिलौने, कपड़ों सहित नकद राशि भी भेंट स्वरूप दी।
- डिपार्टमेंट ऑफ वुमन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट में डिप्टी डायरेक्टर वैद्य रामावतार शर्मा और वुमन इंपावरमेंट डिपार्टमेंट के असिस्टेंट डायरेक्टर विप्लव न्यौला ने बताया कि जाह्नवी के दादा रिटायर्ड तहसीलदार गिरधारी लाल और उनकी पत्नी सुमित्रा की पहल पर ऐसा किया गया।

बेटे के जन्म पर लाते हैं छूछक
छूछक सिर्फ बेटे के जन्म पर निभाई जाने वाली परंपरा है। इसमें मायके वालों की ओर से बच्चे के लिए खिलौने व ससुराल पक्ष के लिए कपड़े मिठाई आदि दिए जाते हैं।
प्रशासन ने इस पहल से संदेश दिया गया कि बेटे-बेटे में कोई भेद नहीं है। बेटियों को बचाएं।

'कल्पना भी नहीं की थी कि दूसरी बेटी के छूछक में पूरा शहर शामिल होगा'
अनिता का कहना है कि मैं इस तरह के सम्मान से अभिभूत हूं। मैंने तो कल्पना भी नहीं की थी कि मेरी दूसरी बेटी की छूछक इस तरह गाजे-बजे से होगी। पूरा शहर इसमें शामिल होगा। सोचा भी नहीं था कि खुद कलेक्टर प्रशासनिक अमले के साथ छूछक लेकर चलेंगे। अनिता के ससुर पूर्व तहसीलदार गिरधारीलाल का कहना है कि आजकल तो बेटियां भी नाम रोशन कर रही हैं। फिर इनके जन्म पर खुशी क्यों न मनाई जाए।

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