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यह टेलीस्कोप इतना संवेदनशील कि चंद्रमा पर भंवरा भी हो तो गूंज सुन ले और फोटो भी ले ले

वाशिंगटन | दुनिया की सबसे शक्तिशाली अंतरिक्ष टेलीस्कोप जेम्स वेब बनकर तैयार है। पर इसे असेम्बल करने का काम बचा हुआ...

Danik Bhaskar | Apr 01, 2018, 04:40 AM IST
वाशिंगटन | दुनिया की सबसे शक्तिशाली अंतरिक्ष टेलीस्कोप जेम्स वेब बनकर तैयार है। पर इसे असेम्बल करने का काम बचा हुआ है। नासा के मुताबिक यह सबसे टफ है। हमारी योजना इस टेलीस्कोप को अगले साल मई तक अंतरिक्ष में भेजने की थी। पर असेम्बल करने में तय समय से ज्यादा समय लग रहा है। 22 साल पुराने इस प्रोजेक्ट पर 65 हजार करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं।

यह 1990 में भेजी गई हबल टेलीस्कोप से 100 गुना शक्तिशाली है। यह उन ग्लेक्सी, उल्कापिंड, ग्रहों का पता लगा सकती है, जो ब्रह्मांड के शुरुआती काल में बने थे। इससे ब्रह्मांड के कई रहस्य सामने आ सकते हैं। एलियन की मौजूदगी का भी पता लग सकता है। यह इतनी सेंस्टिव है कि चंद्रमा की दूरी पर उड़ रहे भंवरे और उसकी गूंज को रिकॉर्ड कर सके। इसे फ्रेंच गुयाना से रॉकेट-5 के जरिए अंतरिक्ष में स्थापित किया जाएगा।

नासा का यह वेब टेलीस्कोप हबल से 100 गुना शक्तिशाली होगा।

नासा का सबसे बड़ा स्पेस साइंस प्रोजेक्ट; 65 हजार करोड़ खर्च हुए, यूरोपियन एजेंसी समेत 16 देश काम कर रहे





नासा ने 1990 में हबल छोड़ा था, इससे ही पता चला कि ब्रह्मांड की उम्र 13 से14 अरब साल है

नासा ने अप्रैल 1990 में अपनी पहली अंतरिक्ष टेलीस्कोप हबल को अंतरिक्ष में स्थापित किया था। इसके निर्माण पर 20 साल से अधिक का समय लगा था। इसकी मदद से खगोलविदों ने 7000 प्रकाश वर्ष दूर ऊर्जाहीन अवस्था की ओर बढ़ते प्राचीनतम माने जाने वाले तारों के एक समूह को खोजा। इन तारों के बुझते जाने की रफ्तार के आधार पर ब्रह्मांड की उम्र 13 से 14 अरब वर्ष के बीच आंकी गई।