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इंजीनियर जैनुल ने बिना बैंडबाजा व बिना दहेज के एक रुपए व नारियल में की शादी

बलारां गांव में इंजीनियर जैनुल आबेदीन पुत्र लियाकत खां ने एक रुपए-नारियल में शादी की। 23 वर्षीय जैनुल ठेकेदारी का...

Bhaskar News Network | Last Modified - Apr 01, 2018, 06:25 AM IST

इंजीनियर जैनुल ने बिना बैंडबाजा व बिना दहेज के एक रुपए व नारियल में की शादी
बलारां गांव में इंजीनियर जैनुल आबेदीन पुत्र लियाकत खां ने एक रुपए-नारियल में शादी की। 23 वर्षीय जैनुल ठेकेदारी का काम करते हैं और उनके गांव बलारां में बिना दहेज और बैंडबाजे के यह पहली शादी हुई है। सामान्य खाना और डेकोरेशन तक नहीं किया। जैनुल की शादी फतेहपुर के गांव भींचरी में रुमाना बानो से हुई। रुमाना बीए पढ़ी हुई है और उनके परिवार ने भी इस पहल को सराहा। शादी में महिलाओं और रिश्तेदारों के लिए दी जाने वाली कपड़ों की गांठ व झुआरी भी नहीं ली। दूल्हे की मां नसीम बानो ने बताया कि उनके छोटे बेटे की शादी भी बिना दहेज के ही करेंगे, जिससे समाज को प्रेरित कर दहेज रूपी कुरीति से मुक्त किया जा सके। जैनुल एक साल पहले एक संस्था कायमखानी यूथ ब्रिगेड से जुड़े। संगठन द्वारा किए जा रहे दहेज उन्मूलन, महिलाओं को प्रशिक्षण आदि से प्रेरित होकर उन्होंने भी बिना दहेज और कम से कम खर्चे में शादी करने का निर्णय लिया। जैनुल के पिता बीएसएफ से थानेदार पद से सेवानिवृत्त हैं और दुल्हन रुमाना बानो के पिता रियासत खान पुलिस विभाग से सीआई के पद से सेवानिवृत्त हैं। इस शादी से प्रेरणा लेते हुए बलारां गांव के ही दो युवकों ने भी बिना दहेज के शादी करने की बात कही। सरपंच हेमराज, पंचायत समिति सदस्य राकेश सिहाग, सरपंच नत्थू खां, महमूद खां, साबिर खां, सूबेदार मुमताज खां, पूर्व सरपंच यूसुफ खां आदि ने सादगीपूर्ण हुए निकाह को काफी सराहा।

सामाजिक बदलाव

बलारां में बिना दहेज के हुई पहली शादी

सीकर. बिना दहेज के हुई शादी में मौजूद दूल्हा व परिवार के लोग।

भास्कर संवाददाता | सीकर

बलारां गांव में इंजीनियर जैनुल आबेदीन पुत्र लियाकत खां ने एक रुपए-नारियल में शादी की। 23 वर्षीय जैनुल ठेकेदारी का काम करते हैं और उनके गांव बलारां में बिना दहेज और बैंडबाजे के यह पहली शादी हुई है। सामान्य खाना और डेकोरेशन तक नहीं किया। जैनुल की शादी फतेहपुर के गांव भींचरी में रुमाना बानो से हुई। रुमाना बीए पढ़ी हुई है और उनके परिवार ने भी इस पहल को सराहा। शादी में महिलाओं और रिश्तेदारों के लिए दी जाने वाली कपड़ों की गांठ व झुआरी भी नहीं ली। दूल्हे की मां नसीम बानो ने बताया कि उनके छोटे बेटे की शादी भी बिना दहेज के ही करेंगे, जिससे समाज को प्रेरित कर दहेज रूपी कुरीति से मुक्त किया जा सके। जैनुल एक साल पहले एक संस्था कायमखानी यूथ ब्रिगेड से जुड़े। संगठन द्वारा किए जा रहे दहेज उन्मूलन, महिलाओं को प्रशिक्षण आदि से प्रेरित होकर उन्होंने भी बिना दहेज और कम से कम खर्चे में शादी करने का निर्णय लिया। जैनुल के पिता बीएसएफ से थानेदार पद से सेवानिवृत्त हैं और दुल्हन रुमाना बानो के पिता रियासत खान पुलिस विभाग से सीआई के पद से सेवानिवृत्त हैं। इस शादी से प्रेरणा लेते हुए बलारां गांव के ही दो युवकों ने भी बिना दहेज के शादी करने की बात कही। सरपंच हेमराज, पंचायत समिति सदस्य राकेश सिहाग, सरपंच नत्थू खां, महमूद खां, साबिर खां, सूबेदार मुमताज खां, पूर्व सरपंच यूसुफ खां आदि ने सादगीपूर्ण हुए निकाह को काफी सराहा।

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