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मध्यम वर्ग अपना ध्यान खुद रखे बजट कैसा है? - पूरी तरह चुनावी। पिछली तीन सरकारों के चुनाव से पहले के पूर्ण बजट...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 07:20 AM IST

मध्यम वर्ग अपना ध्यान खुद रखे

बजट कैसा है?

- पूरी तरह चुनावी। पिछली तीन सरकारों के चुनाव से पहले के पूर्ण बजट किसी पॉपुलिस्ट दिशा में नहीं थे।

किन्तु टैक्स छूट न देने का कारण?

- मोदी सरकार मध्यम वर्ग से बचती ही है। शुरुआती बजट में ही अरुण जेटली ने स्पष्ट कहा था : ‘मध्यम वर्ग अपना ध्यान खुद रखे।’

मिडिल क्लास तो उन्हें जिताती है?

- इसी धारणा को वो तोड़ना चाहते हैं।

और उनकी नाराज़गी?

- कुछ नहीं होगा। मध्यम वर्ग बजट वाले दिन टैक्स छूट न मिलने पर बुरी तरह नाराज़ होता है। किन्तु अंतत: वह ‘गुड गवर्नेंस’ पर ही वोट देता है।

महंगाई का क्या?

- बढ़ेगी।

और आमदनी?

- मध्यम वर्ग और टैक्स पेयर की नहीं बढ़ेगी। जबकि खर्च बढ़ेगा।

बजट की सबसे बड़ी बात?

- ग़रीबों के लिए 5 लाख का बीमा। वास्तव में यह देश के इतिहास की पहली योजना है जिसमें 50 करोड़ लोग, नाम के साथ फायदा ले सकेंगे। बग़ैर कोई काम किए। मनरेगा में करोड़ों युवाओं को लाभ है। किन्तु ये काम है।

क्या यह चुनावी है?

- यह क्रांतिकारी पहल है। वैसे यह सरकारी अस्पतालों में चल रही घोर लापरवाही से ही उभरी लगती है। कि सरकार इलाज करे, इसकी बजाय इलाज के पैसे दे दे। हालांकि 10% इतनेे पैसों वाला इलाज कराएंगे - तो ढाई लाख करोड़ चाहिए। कहां से आएंगे?

कारोबार के लिए कुछ अलग?

- 250 करोड़ टर्न ओवर तक टैक्स कम कर दिया। सभी सक्रिय, तेज़ और पैसा कमाने वाले कारोबार इसी श्रेणी में हैं। तो फ़ायदा बढ़ेगा।

कुलजमा यह बजट ‘मोदीकेयर’ के लिए यादगार रहेगा। क्योंकि इतना बड़ा बीमा तो बड़ी-बड़ी निजी बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी नहीं देतीं।

राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और राज्यपालों की वेतन वृद्धि बजट में हुई। और जब सांसदों के भत्ते भी हर 5 साल में महंगाई के अनुसार बढ़ाने का एलान हुआ तो सदन खुश हो गया।

जेटली हिन्दी में भाषण देने वाले थे। ऐसा हिन्दी राज्यों में चुनाव को देखते हुए तय किया गया था। हालांकि धाराप्रवाह हिन्दी बोलने वाले जेटली को हिन्दी पढ़ने मंे परेशानी आई। आधा भाषण अंग्रेजी में पढ़ा।

1.87 लाख पाठकों ने राय दी, 5 ने दिए सभी सवालों के सही जवाब

बजट बताओ चैलेंज में 1.87 लाख से ज्यादा लोगों ने भाग लिया। सभी छह सवालों के सही जवाब देने वाले 5 पाठकों को पहला पुरस्कार। 5 सही जवाब देने वाले पहले 20 पाठकों को दूसरा पुरस्कार। विस्तार से dainikbhaskar.com पर देखें।

पहले पुरस्कार के पांच विजेता

1. मोनू सैनी, जयपुर, 2. भव्य मनीषभाई सोनेसरा, भावनगर, 3. बंकिम प्रद्युमनभाई वैष्णव, राजकोट, 4. सुमित सिंघल, ग्वालियर, 5. मनीष शर्मा, जयपुर

(सभी जवाब बजट भास्कर के पेजों पर)

अंदर के पन्नों पर पढ़ें

बजट में छूट के छलावे को समझातीं तीन रोचक कथाएं।

इ तिहास में पहली बार आम बजट में देश में निर्मित कोई सामान सस्ता-महंगा नहीं हुआ। क्योंकि बजट में अब ऐसा होगा ही नहीं। 1 जुलाई, 2017 को जीएसटी लागू हुआ। और तब से जीएसटी काउंसिल ही कीमतें तय करवाती है। इसे संसद की मंजूरी की जरूरत भी नहीं है। और इस व्यवस्था में बदलाव के लिए संविधान संशोधन करना होगा। हालांकि पेट्रो उत्पाद, शराब, बिजली व रियल एस्टेट जीएसटी से बाहर हैं। सरकार के पास बजट के लिए सिर्फ कस्टम ड्यूटी बची है। जो सिर्फ विदेशी सामान पर लगती है। जैसे कि इस बजट में टीवी और मोबाइल पर लगाई है। किसी समय में बजट की सुर्खियां बनने वालीं पेट्रोल-डीजल की कीमतें काफी समय से अब तेल कंपनियों के जिम्मे हैं। पिछले साल से तो इनकी कीमतें रोज बदल रही हैं। हालांकि सरकार ने पेट्रो उत्पादों पर एक्साइज ड्यूटी लगाते हुए पिछले साल 2.42 लाख करोड़ रुपए हमसे कमा लिए। ...फिर भी जिस तरह प्रमुख तेल कंपनियों पर सरकार का ही नियंत्रण है, ठीक वैसे ही जीएसटी काउंसिल के अध्यक्ष वित्त मंत्री अरुण जेटली ही हैं। वित्त राज्य मंत्री और भाजपा गठबंधन वाले 19 राज्यों के वित्त मंत्रियों के कारण भाजपा का ही वर्चस्व है।

दैनिक भास्कर प्रस्तुति

सीकर, शुक्रवार, 2 फरवरी, 2018

कुल पृष्ठ 24 (यंग भास्कर, एेच्छिक Rs. 10.00) मूल्य Rs. 4.50 | वर्ष 8, अंक 13, महानगर

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फाल्गुन कृष्ण पक्ष-2, 2074

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