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7500 किमी के सफर पर निकले ये इंजीनियर, सोलर एनर्जी से चलती है साइकिल

आईआईटी मुंबई से पासआउट सुशील रेड्डी अपने दोस्तों के साथ साइकिल पर सफर कर रहे हैं। वे मुंबई से 5000 किमी की दूरी तय कर सीकर पहुंचे हैं।

bhaskar news | Last Modified - Jul 05, 2016, 12:06 AM IST

  • सीकर.आईआईटी मुंबई से पासआउट सुशील रेड्डी अपने दोस्तों के साथ साइकिल पर सफर कर रहे हैं। वे मुंबई से 5000 किमी की दूरी तय कर सीकर पहुंचे हैं। बता दें कि रेड्डी ने सोलर एनर्जी से चलनेवाली साइकिल बनाई है। वे देश में सोलर एनर्जी को प्रमोट करने के लिए साइकिल पर ट्रैवलिंग कर रहे हैं। सुशील का साथ सीकर के राजेंद्र भास्कर दे रहे हैं, जो IIT मुंबई के फाइनल ईयर के स्टूडेंट हैं। जानें कैसे चार्ज होती है साइकिल...
    - सुशील और राजेंद्र कई कॉलेजों में जाकर स्टूडेंट्स को अपनी यात्रा के बारे में बताते हैं।
    - वे सोलर एनर्जी के बारे में नई जानकारियां देते हैं। इसके यूज को बढ़ाने के लिए लोगों को जागरुक करते हैं।
    - सुशील की साइकिल में सोलर पैनल लगा है।
    - यह साइकिल को चार्ज करता है, जिससे उसे चलाने में 50 फीसदी एफर्ट कम हो जाता है।
    - वहीं, राजेंद्र के पास गियर्ड साइकिल है। दोनों अब तक 5 हजार किमी की दूरी तय कर चुके हैं।
    - इनका मकसद 7500 किमी की ट्रैवलिंग करना है।
    - बता दें कि सुशील की टीम में साइकिल एक्सपर्ट हिमांशु सिंह और कुणाल ट्रेलर भी शामिल हैं।
    - हिमांशु एक साइकिल एक्सपर्ट हैं। एक इवेंट के दौरान हुई मुलाक़ात के बाद वो भी यात्रा में जुड़ गए।
    - उनकी बदौलत ही साइकिल की मेंटेनेंस होती है।
    इतनी रफ्तार से चलती है साइकिल
    - सुशील ने साइकिल पर सोलर पैनल को फिक्सड किया है।
    - बता दें कि साइकिल के साथ 240 वॉट के सोलर पैनल जोड़ने के लिए 250 वॉट की रियरहब मोटर और लिथियम-आयन बैटरी का इस्तेमाल किया गया।
    - साइकिल 20 से 25 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलती है।
    - वे सुबह 4 से 11 बजे तक साइकिल चलाते हैं।
    - उसके बाद 11 से शाम 5 बजे तक इनकी साइकिल चार्ज होती है।
    - सुशील इस चार्जिंग के साथ एक दिन में करीब 100 किलोमीटर की दूरी तय करने की कोशिश करते हैं।
    - आईआईटी मुंबई से शुरुआत कर सूरत, बडोदा, अहमदाबाद, लुधियाना, रूड़की, दिल्ली आदि शहरों के बाद सीकर पंहुचे।
    - दोनों यूपी, एमपी के शहरों का सफर पूरा कर इसे मुंबई में खत्म करेंगे।
    बीएसएनएल कर रहा है स्पॉन्सर
    - सुशील को इस जागरूकता अभियान के लिए सरकारी मदद नहीं मिल रही है।
    - एक सोलर कंपनी इंटर सोलार और बीएसएनएल समेत कुछ कंपनियां उन्हें स्पॉन्सर कर रही हैं।
    - सुशील अपने सफर में 50 दिन पूरे कर चुके हैं।
    आगे की स्लाइड्स में देखें सुशील और राजेंद्र की यात्रा से जुड़ी चुनिंदा फोटोज...
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