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एवरेस्ट फतेह करने को रिश्तेदारों से कर्ज लिए 28 लाख रु‌., पीएफ भी तुड़वाना पड़ा

वे 39 साल की हैं...दो बच्चों की मां भी...लेकिन हौसले दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर एवरेस्ट से भी ऊंचे हैं।

Dainik Bhaskar

May 23, 2017, 07:19 AM IST
Jhunjhunus Asha Jhajharia climb on mount everest
सिंघाना (झुंझुनूं). वे 39 साल की हैं...दो बच्चों की मां भी...लेकिन हौसले दुनिया के सबसे ऊंचे पर्वत शिखर एवरेस्ट से भी ऊंचे हैं। तभी तो आशा झाझड़िया ने सोमवार सुबह एवरेस्ट पर अपनी सफलता का नया शिखर खड़ा कर दिया। झुंझुनूं जिले के घरड़ाना खुर्द गांव की बेटी आशा एवरेस्ट पर चढ़ने वाली राजस्थान की पहली सिविलियन बेटी बन गई हैं।

उन्होंने पहले ही प्रयास में यह उपलब्धि हासिल की है। आठ अप्रैल को उनका एवरेस्ट अभियान शुरू हुआ था। इस दिन माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने के लिए दिल्ली से चीन के लिए सफर की शुरुआत की। वह 9 अप्रैल को चीन के ल्हासा से बेस कैम्प के लिए निकली और 16 अप्रैल को टीगरी पहुंची। इसके दो दिन बाद उस बेस कैम्प पहुंची जो 5700 मीटर की ऊंचाई पर है। उन्होंने 22 मई को सुबह 4:05 बजे एवरेस्ट फतेह कर लिया।
आशा के पति अजय ताखर ने कहा कि लोगों के आशीर्वाद, प्रार्थना और समर्थन के कारण ही आशा इस मुकाम को छू पाई। आशा की एवरेस्ट पर तिरंगे के साथ ही बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ का झंडा फहराने की इच्छा पूरी हो गई। एवरेस्ट फतह की सूचना मिलते ही घरड़ाना खुर्द सहित पूरे जिले मेें खुशी का माहौल छा गया। आशा के घरवालों को बधाइयां देने वालों का तांता लग गया। दरअसल, घरड़ाना खुर्द की आशा का विवाह हरियाणा के नारनौल जिले के बलाहा खुर्द निवासी अजय ताखर से 1998 में हुआ। वे अलवर जिले में नर्स के रूप में सेवाएं दे रही हैं। पारिवारिक स्थितियों के चलते वह अपने जुनून को परवान नहीं चढ़ा पा रही थी, लेकिन मन में चाह थी।

पिता ने बढ़ाया था हौसला
आशा घरड़ाना खुर्द निवासी हाल सिंघाना में रहने वाले नेवी से रिटायर आनरेरी लेफ्टिनेंट मोहर सिंह झाझड़िया की बेटी है। तीन संतानों में सबसे बड़ी गायत्री व दूसरे नम्बर पर आशा है। छोटा विक्रम है। आशा अलवर में नर्स है। दो बच्चे 17 व 14 वर्ष के हैं।

मुश्किलों से पार पाने का है जुनून
आशा को मुश्किलों से मुकाबला करने का जुनून सवार है। जुलाई 2015 में अमरनाथ यात्रा के दौरान मुश्किल भरे बालटाल वाले रास्ते को चुना। इस रास्ते से सुबह चढ़ाई शुरू की और शाम को वापस आ गई। कम समय में चढ़ाई से वहां तैनात सैनिक भी दंग रह गए। इसके बाद एवरेस्ट फतेह के लिए आशा ने नेपाल की बजाय चीन का रास्ता चुना। चीन का रास्ता कठिन है। लेकिन मुश्किलों से पार पाने का जुनून उसे राेक नहीं पाया।
दो बच्चों की मां है आशा
आशा के पति हरियाणा पुलिस में एएसआई अजय सिंह ताखर ने बताया कि माउंट एवरेस्ट की चोटी पर जाना आशा का बड़ा सपना था। आशा का सपना पूरा होने में आर्थिक समस्या सबसे बड़ी थी। आशा ने विधायक, सांसद, राज्य के खेल मंत्री, मुख्यमंत्री से मदद की गुहार की, लेकिन सरकार से कोई मदद नहीं मिली। तब आशा ने अपने पीएफ अकाउंट से सारा पैसा निकलवा लिया। रिश्तेदारों, मित्रों से उधार लिया। इस तरह उसने 28 लाख रुपए की व्यवस्था कर मिशन शुरू किया।

साथी बीमार हुए तो भी नहीं छोड़ा हौसला
आशा के पति ने भास्कर को बताया कि मौसम काफी खराब होने से उनको बेस कैम्प में वापिस आना पड़ा। आशा के कई साथी बीमार हो गए। रास्ते में अन्य टीमों के दो-तीन लोगों की मौत हो जाने की सूचना भी मिली। आशा अपने साथियों के बीमार होने व साथ न दे पाने से आहत तो हुई, लेकिन हौसले को कम नहीं होने दिया।
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