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मजदूरों को खुदाई के दौरान मिला 57 साल पुराना जिंदा बम, जयपुर से अाई टीम ने किया डिफ्यूज

Bhaskar News | Last Modified - Nov 06, 2017, 08:30 AM IST

टीम ने दो किलाेमीटर दूर पहाड़ की तलहटी में ले जाकर निष्क्रिय किया, 1960 का बना हुआ है बम।
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    पौंख के जोहड़ में मिला जिंदा बम।
    गुढ़ागाैड़जी(सीकर)।गुढ़ापाैंख के दलाड़ा जाेहड़ में तालाब की खुदाई करते समय नरेगा मजदूराें काे जिंदा बम मिला। इसकी खबर फैलते ही एक बार तो इलाके में दहशत सी हाे गई। सूचना पर जयपुर से आई बम निराेधक दस्ते की टीम ने मिले बम काे निष्क्रिय किया। यह बम करीब एक सप्ताह पहले मिला था, लेकिन इसका खुलासा शनिवार को हुआ। रविवार को डी फ्यूज किया गया। टीम के प्रभारी सीआई मूलचंद मीणा ने बताया कि यह बम 1960 में बना हुअा था।
    - जानकारी के मुताबिक शनिवार काे दलाड़ा जाेहड़ में नरेगा के तहत तालाब की खुदाई का काम चल रहा था। नरेगा मजदूर सरदारा राम गुर्जर ने बताया कि अचानक खुदाई करते समय उसे बम जैसी वस्तु मिली। उसने अन्य मजदूराें काे बताया। बम मिलने की खबर पूरे गांव में आग की तरह फैल गई।
    - तालाब पर ग्रामीणाें की भीड़ हो गई। मजदूराें ग्रामीणों ने पुलिस काे इसकी सूचना दी। एसएचअाे अशाेक चाैधरी की अगुवाई में आई पुलिस ने 6 फीट का गड्ढ़ा करवा कर बम दबा दिया। ग्रामीणाें काे दूर रहने की हिदायत दी। पुलिस ने जयपुर में बम निराेधक दस्ते काे जानकारी दी।
    - मजदूर सरदारा राम ने यह बात किसी काे नहीं बताई। उसने तालाब के पास बने मकान में ले जाकर बम रख दिया। दाे दिन बाद वह इसे घर लेकर चला गया। वहां उसके बेटे ने इसकी फाेटाे वॉट्स एप पर डाल दी। इसे उसके मामा ने देखा तो उन्होंने कहा कि ये बम है, इससे छेड़छाड़ मत करना, वरना बम में विस्फोट हो जाएगा। इस पर सरदारा राम डर गया। - उसने बम को पास के जंगल में फेंक दिया। जंगल में खेलने गए कुछ स्कूली बच्चों ने इस बम को देखा तो वे इसे वापस तालाब के पास लेकर अा गए। मजदूराें ने बच्चों के हाथ में बम को देखा तो उसे वापस तालाब में डाल दिया। इसके बाद शनिवार काे खुदाई करते समय यह फिर से सामने गया।
    - टीम के प्रभारी सीअार्इ मूलचंद मीणा ने बताया कि यह बम जंग लगने के कारण यह और खतरनाक बन गया था। इस बम के साथ छेड़छाड़ करने पर यह फट सकता था। सरदारा राम का परिवार खुशकिस्मत रहा कि ऐसा नहीं हुआ। टीम ने 2 किलाेमीटर दूर पहाड़ की तलहटी में ले जाकर इस बम काे निष्क्रिय किया। यह पता नहीं चल सका यह बम यहां तक पहुंचा कैसे था।
    8 साल पहले हुई थी पूरे तालाब की खुदाई
    - ग्रामीणाें ने बताया कि तालाब की अकाल राहत के दाैरान 8 साल पहले पूरी खुदार्इ हाे चुकी है। उस वक्त यहां कोई बम नहीं मिला। ऐसा कयास लगाया जा रहा कि पिछले आठ वर्ष के दौरान किसी ने यह बम यहां लाकर तालाब में डाल दिया होगा।
    - तालाब में मिट्टी भर जाने से बम नीचे दब गया और खुदार्इ के दौरान निकल आया। करीब सात साल पहले भी पास के किशाेरपुरा की पहाड़ी में बम मिलने की घटना सामने अा चुकी है। इधर, रविवार सुबह जयपुर से अाई टीम ने पुलिस के साथ माैका मुअायना कर गड्ढ़ा खुदवा कर बम निकलवाया।
    - टीम की जांच में बम जिंदा निकला। टीम प्रभारी सीअाई मूलचंद मीणा के नेतृत्व में पहाड़ की तलहटी में ले जाकर बम को निष्क्रिय किया। जयपुर तथा स्थानीय टीम में सीअाई मूलचंद मीणा, एएसअाई परमानंद हैड कांस्टेबल विनाेद कुमार, गुढ़ा एसएचअाे अशाेक चाैधरी, एएसअाई ईश्वर सिंह शामिल थे।
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Web Title: Years Old Alive Alive During Excavation
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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