सीकर

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फैंसी व डिजाइन वाली राखियाें पर लगेगा जीएसटी

पूजा में काम आने वाले कलावा और मोली को छोड़कर सभी तरह की फैंसी व डिजाइनदार राखियां जीएसटी के दायरे में आ गई है।

Danik Bhaskar

Jul 16, 2018, 07:15 PM IST

सीकर. पूजा में काम आने वाले कलावा और मोली को छोड़कर सभी तरह की फैंसी व डिजाइनदार राखियां जीएसटी के दायरे में आ गई है। सरकार ने राखियों को जीएसटी में शामिल कर लिया है। राखियों पर सरकार 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगाएगी। जिससे इस साल बहनों को राखियां खरीदने के लिए अधिक दाम चुकाने पड़ेंगे। जीएसटी में आने के कारण से साल में 20 लाख से ज्यादा का कारोबार करने वाले राखियों के थोक व्यापारियों को डीलर के तौर पर जीएसटी पोर्टल पर पंजीकरण कराना हाेगा। सरकार का ये स्पष्टीकरण प.बंगाल की एडवांस रूलिंग अथॉरिटी (एएआर) द्वारा राखियों को जीएसटी के दायरे में माने जाने के बाद आया है। जिसके बाद सरकार ने इसे स्पष्ट कर दिया कि इस साल जीएसटी में राखी कारोबार रहेगा। एएआर ने अपने निर्णय में कहा कि पूजन साम्रगी के तौर पर माने जाने वाली मौली कलावा ही जीएसटी से दूर रहेगी। अन्य सभी तरह की राखी जीएसटी के दायरे में अाती है। इसके पीछे एएआर ने राखी बनाते समय काम में लिए जाने वाले ग्लास मोती को उदाहरण बताया। जिस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगती है।

पिछले साल राखी कारोबारियों को मिल गई थी छूट

- पिछले साल 1 जुलाई को जीएसटी लागू करने के बाद 7 अगस्त को ही रक्षाबंधन आ गया था। सवा महीने का समय होने के कारण राखी कारोबारी असमंजस में रहे। उनको जीएसटी टैरिफ कोड में शामिल वस्तुओं में राखी के ना होने का फायदा मिल गया था। इसी आधार पर पं.बंगाल के राखी कारोबारियों ने जीएसटी छूट मांगी थी। एएआर ने मामले की सुनवाई में इसे स्वीकार नहीं कर तर्क दिया गया कि राखी जैसे उत्पाद के निर्माण में कई उत्पाद शामिल होते है। इसमें जरी, नायलॉन और रेशमी धागे का उपयोग कर डिजाइनर राखी बनती है। ये वस्तुएं जीएसटी के दायरे में है।इसलिए राखी को जीएसटी के दायरे से बाहर नहीं माना जा सकता।

राखी कारोबारियों को लेना होगा डीलर रजिस्ट्रेशन

- भाई-बहन के स्नेह की प्रतीक राखी के जीएसटी के दायरे में आने के बाद राखियों का कारोबार करने वालो व्यापारियों को डीलर के रूप में जीएसटी पोर्टल पर पंजीकरण करवा होगा। जीएसटी विशेषज्ञ सीए गौरव अग्रवाल ने बताया कि राखी को सीजनल कारोबार माना जाता है। अगर कारोबारियों ने जीएसटी पंजीकरण करवा रखा है। तो वे अपनी रिटर्न में इसे दिखा सकते है। अग्रवाल ने बताया कि जिन कारोबारियों ने जीएसटी में पंजीकरण नहीं कराया है उनको केजुअल टैक्स पेयर के रूप में रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ेगा। इसमें पहले अपने अनुमानित व्यापार के आधार पर एडवांस टैक्स भी जमा कराना पड़ेगा।

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