--Advertisement--

रेत के धोरों में किन्नू की बहार

भरतपुर| झुंझुनूं जिले की चिड़ावा तहसील के किठाणा गांव के सत्यवीर सिंह की पहचान किन्नू उत्पादक किसान के रूप में बन...

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2018, 06:40 AM IST
रेत के धोरों में किन्नू की बहार
भरतपुर| झुंझुनूं जिले की चिड़ावा तहसील के किठाणा गांव के सत्यवीर सिंह की पहचान किन्नू उत्पादक किसान के रूप में बन गई है। उन्होंने अपने बगीचे में किन्नू के 500 पौधे लगा रखे हैं। इनसे इस वर्ष करीब एक लाख रुपए की आमदनी प्राप्त की है, जो आगामी वर्षों में बढ़कर 3 लाख रु. तक हो जाएगी। किसान सत्यवीरसिंह पहले गांव के अन्य किसानों की तरह परंपरागत खेती कर जीवनयापन करते थे। उसके मन में नए कार्य करने की तमन्ना जरूर थी, लेकिन सही जानकारी नहीं मिलने से वह अधिक कुछ नहीं कर पा रहा था। करीब 7 साल पहले वह रामकृष्ण जयदयाल डालमिया सेवा संस्थान से जुड़ा। उसे परंपरागत खेती के बजाय नई कृषि क्रियाओं, बगीचा लगाने और पशुपालन के लिए उन्नत नस्ल के पशु खरीदने की सलाह दी गई और इस कार्य में मार्गदर्शन भी किया। सत्यवीरसिंह को संस्थान ने अनुदान पर किन्नू के 500 और मौसमी के 40 पौधों के अलावा नींबू, आम, खजूर व अमरूद के पौधे मुहैया कराए। इन पौधों के रोपण एवं अन्य कृषि क्रियाओं की जानकारी समय-समय पर दी गई। कीटनाशक दवाएं भी अनुदान पर मुहैया कराई गईं। कुछ पौधों में जब किन्नू के फल आने शुरू हुए तो परंपरागत फलों के मुकाबले इनका रंग-रूप अधिक चमकीला और वजन भी ज्यादा था। इससे बाजार में इनकी कीमत अधिक मिलने लगी। आगामी वर्षों में जब सभी पौधों में फल आने लगेंगे तो उसे केवल किन्नू के पौधों से 5 लाख रुपए तक प्रतिवर्ष मिलने लगेंगे। सत्यवीर सिंह ने सिंचाई के लिए फव्वारा के बजाय बूंद-बूंद सिंचाई प्रणाली लगा रखी है, जिससे पानी की बचत हो रही है। सत्यवीर ने आय में वृद्धि के लिए फलों के बगीचे में गेंदा व विभिन्न सब्जियों की बुआई भी कर रखी है। इससे उसे प्रतिवर्ष करीब एक लाख रुपए की अतिरिक्त आमदनी हो जाती है। वह अपने खेतों में खरीफ की फसल में बाजरा, मूंग, चौला व ग्वार की बुआई करता है। इससे भी उसे प्रतिवर्ष आसानी से एक लाख रुपए तक मिल जाते हैं। वह बाजरे की देसी किस्म की बुआई करता है। इसका उपयोग वह अपने खाने में करता है। किसान सत्यवीर सिंह खेती के अलावा उन्नत नस्ल के दुधारू पशु भी पालता है। इनसे उत्पादित करीब 50 लीटर दूध वह प्रतिदिन बाजार में बेचता है। जैविक खाद के लिए उसने वर्मी कम्पोस्ट यूनिट लगा रखी है। हरी खाद भी तैयार कर लेता है।
झुंझुनूं के किठाणा गांव के सत्यवीर ने बनाई अलग पहचान

X
रेत के धोरों में किन्नू की बहार
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..