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मंगल अस्पताल ने ब्लड को ज्यादा रुपए में बेचा संचालिका के खिलाफ मामला दर्ज, जांच में पुष्टि

कस्बे के मंगल अस्पताल में संचालित ब्लड स्टोरेज में खून को खुर्द-बुर्द व अधिक राशि में बेचने को लेकर इस्तगासे के...

Danik Bhaskar | Apr 14, 2018, 06:55 AM IST
कस्बे के मंगल अस्पताल में संचालित ब्लड स्टोरेज में खून को खुर्द-बुर्द व अधिक राशि में बेचने को लेकर इस्तगासे के आधार पर मामला दर्ज हुआ है। इस बड़ी गड़बड़ी को लेकर 19 व 20 दिसंबर 2017 को दो दिन तक भास्कर ने भी उजागर किया था। पुलिस ने बताया कि कृष्ण कुमार पुत्र इंद्रसिंह जांगिड़ निवासी बैरासर बड़ा ने रिपोर्ट दी कि छह अगस्त 2015 काे मंगल अस्पताल में लगे रक्तदान शिविर में अन्य लोगों के साथ उसने भी एक यूनिट रक्तदान किया था। अस्पताल में एक ब्लड स्टोरेज भी संचालित है, जो राज्य व केंद्र सरकार के नियमों के तहत जारी लाइसेंस के तहत सेंटर प्रभारी डॉ. सरिता गुप्ता प|ी डॉ. मनमोहन गुप्ता द्वारा संचालित किया जाता है। नियमानुसार ब्लड स्टोरेज सेंटर को ब्लड बैंक से ब्लड यूनिट जारी होती है। जनवरी 2017 में उक्त अस्पताल के ब्लड स्टोरेज की ओर से बेईमानी पूर्ण तरीके से कार्य किया। ब्लड को अधिक रुपयों में बेचने तथा खुर्द-बुर्द करने व जनसामान्य से धोखाधड़ी की। साथ ही नुकसान कारित करने के उद्देश्य से फर्जी तौर पर मरीजों को ब्लड जारी करने की प्रविष्टियां की गई। सहायक औषधि नियंत्रक द्वारा चार सदस्यीय टीम गठित करवाकर जांच करवाई गई थी, जिसमें पांच लाभांवितों के किए गए सर्वे में स्पष्ट तौर पर माना गया कि संचालिका द्वारा अवधि समाप्ति होने के नजदीक ब्लड यूनिट जारी की है। तीन जनों ने स्वयं को ब्लड जारी होने से मना किया है। रिकॉर्ड में जिन मरीजों को ब्लड जारी किया जाना बताया गया, उनके नाम झूठे दर्ज किए गए। सेंटर द्वारा अपने रिकॉर्ड में फर्जी मरीजों के नामों से प्रविष्टियां करके उन्हें ब्लड जारी करना बताया गया है तथा असली रूप में ब्लड को खुर्द-बुर्द कर अधिक पैसों में बेचा गया। मिथ्या प्रविष्टियां व कूटरचित रिकॉर्ड तैयार कर अनुचित लाभ कमाया गया है। आरोपी ने परिवादी व जन सामान्य से धोखाधड़ी की है और नाजायज नुकसान पहुंचाया है।

जांच में पुष्टि, कई अनियमितताएं आई सामने

जांच टीम ने अस्पताल के सभी दस्तावेज और सबूतों के आधार पर प्रमाणित पुष्टि करते हुए लिखा है कि मंगल अस्पताल ने ब्लड ईश्यू करने में अनियमितता बरती है। रजिस्टर में फर्जी नामों की एंट्री कर खून चढ़ाया गया। कुछ रोगी के झूठे नाम भी दिखाए गए। भास्कर ने भी कई दिनाें तक पूरे मामले की पड़ताल की, जिसमें कई सबूत भी हाथ लगे। टीम ने खून ईश्यू संख्या और अन्य पीआरसी यूनिट के केवल 20-25 नामों का चयन कर रेेंडमली चैकअप किया। जांच में कइयों के नंबर भी सही नहीं मिले। छह जनवरी 2017 से उठी थी शिकायत, सूचना थी खून बेचा जा रहा है सादुलपुर के कृष्णकुमार जांगिड़ ने छह जनवरी 2017 को उक्त पूरे मामले की शिकायत की।