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किराणा की दुकान चलाने वाला बहल का रमेश डॉक्टर बन 12 साल से चांदगोठी में फर्जी अस्पताल चला रहा था, 80 हजार मरीजों को लूटा

भास्कर न्यूज | सादुलपुर/चूरू रतनगढ़ में नकली घी कारोबार का भंडाफोड़ होने के बाद अब सादुलपुर बीसीएमओ डॉ. हरिकेश...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 13, 2018, 06:25 AM IST

  • किराणा की दुकान चलाने वाला बहल का रमेश डॉक्टर बन 12 साल से चांदगोठी में फर्जी अस्पताल चला रहा था, 80 हजार मरीजों को लूटा
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    भास्कर न्यूज | सादुलपुर/चूरू

    रतनगढ़ में नकली घी कारोबार का भंडाफोड़ होने के बाद अब सादुलपुर बीसीएमओ डॉ. हरिकेश बुडानिया के इलाके में रोगियों के साथ खिलवाड़ करने का खुलासा हुआ है। यहां परचून के दुकान चलाने वाला एक शख्स फर्जी डॉक्टर बनकर इलाज करने लगा। इतना ही नहीं उसने अस्पताल भी खोल लिया। खुलासे के बाद चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत होने जैसे गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

    पिछले 12 साल से बिना रोक-टोक के चांदगोठी के बस स्टैंड पर यादव अस्पताल चलाता रहा। अस्पताल में ही मेडिकल स्टोर व यादव लेबोरेट्री बना रखी थी। संपर्क पोर्टल पर शिकायत के बाद चिकित्सा महकमे की नींद खुली। शुक्रवार रात नौ बजे कार्रवाई होने पर पूरे मामले का खुलासा हुआ। हैरत की बात तो ये है कि ये कार्रवाई भी पोर्टल पर शिकायत के बाद ही की गई। इससे पहले किसी ने भी ध्यान नहीं दिया। 12 साल में करीब 80 हजार रोगियों को लूटा और जांच के नाम पर धोखा किया। यहां रोज औसतन 15 से 20 रोगी दिखाने आते हैं। बीसीएमओ ऑफिस से 20 किमी दूर स्थित इस गांव में अनाधिकृत रूप से यादव हॉस्पिटल चला रहा था। सीएमएचओ से लेकर बीसीएमओ तक किसी भी अधिकारी ने कार्रवाई नहीं की। पोर्टल पर शिकायत के बाद बीसीएमओ व औषधि नियंत्रक विभाग चूरू के अधिकारियों की टीम पहुंची। जांच-पड़ताल करने के बाद इसे सीज कर दिया। जांच दल के सदस्य डॉ. सुखवीरसिंह द्वारा भर्ती किए गए मरीजों की जांच कर उन्हें राजकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आवश्यक दवाइयों व उपचार के लिए भेजा गया। देर शाम को अस्पताल के सभी कमरों को सीज कर दिया गया।

    सीएमएचओ बोले-उनकी जानकारी में ही नहीं, जबकि हकीकत ये कि बीसीएमओ दफ्तर से 20 किमी दूरी पर ही चल रहा फर्जी हॉस्पिटल

    राज्य सरकार के संपर्क पोर्टल पर शिकायत के बाद चिकित्सा महकमा जागा, बीसीएमओ व औषधि नियंत्रक विभाग की टीम ने पहुंच सीज किया

    रमेश ने बहल के अस्पताल में नौकरी की, फिर खोला अस्पताल

    हरियाणा के बहल क्षेत्र के नूणसर का रमेश यादव अपने भाई के साथ परचून की दुकान चलाते-चलाते मुन्ना भाई बन गया। डॉक्टर बनने के शौक में बहल के एक प्राइवेट अस्पताल में नौकरी करने लगा। थोड़े दिन नौकरी करने के बाद चांदगोठी में यादव हॉस्पिटल एवं मेडिकल स्टोर खोल लिया और लोगों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करने लग गया। उसको कोई रोकने-टोकने वाला नहीं था। इलाज के दौरान कईयों की मौत भी हुई, परंतु वे लोग अब सामने नहीं आ पा रहे हैं। कारण बताया जाता है कि रमेश यादव ने उन्हें डरा-धमकाकर शांत कर देता था।

    तीन कमरों में आठ बैड का अस्पताल किया जा रहा है संचालित

    1. हॉस्पिटल के मुख्य हिस्से पर मेडिकल की दुकान है, वहीं पीछे 3 कमरों में 8 बैड का हॉस्पिटल संचालित किया जा रहा है।

    2. अस्पताल के बाहर पहले खुद डॉ. रमेश यादव का बोर्ड लगा था। एक माह पहले डॉ. मनीराम चौधरी का बोर्ड लगा दिया।

    हर जगह झोलाझाप, कार्रवाई नहीं करते, एक माह पहले ही बीसीएमओ खुद यादव से मिले

    चांदगोठी में ही नहीं, बल्कि शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में ऐसे कई झोलाछाप डॉक्टर क्लिनिक खोलकर बैठे हैं। ये गंभीर बीमारियों का इलाज करने का दावा भी करते हैं। ऐसे तथाकथित डॉक्टरों के विरूद्ध कार्रवाई करना तो दूर की बात, बल्कि जांच तक नहीं की जाती। सभी चिकित्सा विभाग के अफसरों को इस बारे में सूचना भी है। जब कहीं निरीक्षण या चैकिंग की जाती है तो मकसद दूसरा होता है। कोई बड़ी घटना होने के बावजूद 24 घंटे तक उन्हें घटना के बारे में पता नहीं होता। गत दिनों महलाना उतरादा में हुई फूड पॉइजनिंग की घटना को लेकर भी यही वाकया देखने को मिला। चिकित्सा महकमे से ही जुड़े कई लोगों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि सीएमएचओ ऑफिस में इन अवैध क्लीनिकों से मोटी रकम पहुंचती है। ऐसे ही प्राइवेट अस्पतालों से भी मिलीभगत कर रखी है। कार्रवाई नहीं करने की एवज में मंथली दी जाती है। इस कार्रवाई से पूर्व बीसीएमओ अस्पताल संचालक यादव से मिल चुके थे। उसके अस्पताल की शिकायत होने को लेकर अवगत भी करवाया गया था। इसके पीछे मकसद क्या था, यह तो स्वयं बीसीएमओ ही जानते हैं।

    3. रमेश व प|ी सुनीता ने टीम को बताया कि वे मेडिकल स्टोर चलाते हैं, अस्पताल में डॉ. मनीराम चौधरी बैठते हैं।

    4. अस्पताल में जहर खाए मरीज भर्ती किए जाते हैं। मौत होने पर परिजनों को डरा मामले को रफा दफा कर दिया जाता है।

    हॉस्पिटल पर चस्पा किया नोटिस।

    सीएमएचओ का बेतुका बयान बोले- मुझे जानकारी नहीं

    मामले को लेकर जब भास्कर ने सीएमएचओ डॉ. मनोज शर्मा से बात की तो उन्होंने बेतूका बयान दिया। कहा कि ये मामला मेरी जानकारी में ही नहीं है। जब ये सवाल किया गया कि क्या बीसीएमओ आपके आदेश पर नहीं जाते, तो कुछ जवाब नहीं दे पाए। बोले कि मैं किसी शादी में गया हुआ था, इसलिए मुझे नहीं पता। हकीकत ये है कि सीएमएचओ को पूरे मामले की जानकारी थी। देर रात तक जांच टीम के भी संपर्क में थे।

    ग्रामीणों ने बताई अस्पताल की हकीकत

    डॉ. यादव : संचालक रमेश यादव व प|ी सुनीता यादव ने बताया कि अस्पताल के संचालक डॉ. मनीराम चौधरी है। हम मेडिकल स्टोर व लेबोरेट्री का काम करते हैं। टीम ने दोपहर 1 से रात 9 बजे तक चौधरी का इंतजार किया, लेकिन नहीं आए।

    ग्रामीण : ग्रामीणों ने जांच दल को बताया कि अस्पताल के संचालक डॉ. रमेश यादव है। डॉ. मनीराम यहां कभी नहीं आते। अस्पताल में काम हाने वाले बायोमेडिकल वेस्ट सहित सूईया, ड्रीप, केनूला, रक्त से सनी पटि्टया अन्य संक्रमित उपकरण गोशाला के अंदर व बाहर खुले में फैंक दिए जाते हैं।

    डॉ. मनीराम : डॉ. मनीराम चौधरी ने कहा कि चांदगोठी के यादव हॉस्पिटल में वे 15-20 दिन से ही आ रहे हैं। हकीकत ये है कि अस्पताल 12 साल से चल रहा है। बीसीएमओ का कहना है कि यादव ने डॉ. मनीराम की डिग्री प्रस्तुत की है, जब तक चौधरी खुद पेश नहीं होते, कुछ नहीं बता सकते।

    अस्पताल में 28 दवाइयां मिली, जिनकी खरीद के बिल नहीं थे

    औषद्यि नियंत्रक अधिकारी चंद्रप्रकाश शर्मा व गौरीशंकर ने बताया कि जांच के दौरान अस्पताल के मेडिकल स्टोर के रिकॉर्ड में 28 ऐसी दवाई मिली, जिनके क्रय संबंधी बिल ही नहीं मिले। दवाईयों के नमूने लेकर गुणवत्ता की जांच के लिए भेजने की कार्रवाई की। दो तरह की नकली दवाओं के संदेह पर सैंपल लिए। फर्म मालिक स्पष्ट नहीं कर पाया कि उक्त सैंपल कहां से आते है। जब टीम ने बायोमेडिकल वेस्ट का लेकर सत्यापन किया। बायोमेडिकल वेस्ट भी पाया गया।

    चांदगोठी में सीज किया गया यादव हॉस्पिटल।

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