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इनपुट टैक्स क्रेडिट की डिमांड के सत्यापन को लेकर 950 को नोटिस

इनपुट टैक्स क्रेडिट में लंबे समय से सत्यापन न होने से बकाया चल रही डिमांड का वेरिफिकेशन करवाने के लिए वाणिज्य कर...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 06:05 AM IST
इनपुट टैक्स क्रेडिट में लंबे समय से सत्यापन न होने से बकाया चल रही डिमांड का वेरिफिकेशन करवाने के लिए वाणिज्य कर विभाग ई-मेल से नोटिस भेज रहा है। जिले में विभाग के दो सर्किल में 18.76 करोड़ रुपए की डिमांड सिस्टम में पेंडिंग चल रही है। जिसके सत्यापन के लिए विभाग ने यह कदम उठाया है। विभाग के उपायुक्त विक्रम सिंह बारहठ ने बताया कि जिले के एक सर्किल में 432 इंट्री के 3.09 करोड़ रुपए की डिमांड का सत्यापन होना है। वही बी सर्किल में 418 इंट्री में 15.67 करोड़ रुपए की डिमांड का वेरिफिकेशन होना है। सत्यापन नहीं करवाने वाले जिले के 950 व्यापारियों को विभाग की और ई-मेल से नोटिस भेज कर उनका पक्ष जाना गया है। बारहठ ने बताया कि विभाग द्वारा भेजे गए नोटिस में बकाया डिमांड की सूचना के साथ उनके दस्तावेज ऑनलाइन प्रस्तुत करने को कहा गया है। सत्यापन नहीं करवाने वाले अपने प्रकरण में 30 अप्रैल तक जवाब व दस्तावेज जमा करवा सकते हैं।

जिले में वाणिज्य कर विभाग के दो सर्किल में बकाया है 18.76 करोड़ की डिमांड, 30 अप्रैल तक मांगे दस्तावेज

पंजीकृत ई-मेल आईडी पर भेजे गए हैं नोटिस

विभाग की ओर से लंबे समय से बकाया चल रही आईटीसी डिमांड का सत्यापन करवाने के लिए संबंधित व्यापारियों को उनकी पंजीकृत ई-मेल आईडी पर नोटिस जारी किए गए हैं। उपायुक्त ने बताया कि जिले के 950 बकाया डिमांड के प्रकरणों के लिए संबंधित व्यापारियों को विभाग की ओर से नोटिस भेजे जा रहे हैं। विभाग में अपना पंजीकरण करवाते समय व्यापारियों ने जो ई-मेल आईडी विभाग को दी थी, उनपर नोटिस भेजे है। विभाग की ओर से आईटीसी सत्यापन के लिए पहले अंतिम तिथि 31 मार्च 2018 तय की गई थी। जिसे अब 30 जून कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि पहले व्यापारी नोटिस नहीं मिलने, तामील न होने या खुद के मौजूद न होने जैसे बहाने बनाते थे। जिसके लिए विभाग ने इस बार उनकी पंजीकृत मेल पर ही नोटिस भेजे हैं। विभाग के नए आईटी संशोधन में ई-मेल से भेजे गए नोटिस को स्वतः ही तामील माना जाता है।

आईटीसी में दस्तावेज के मिस मैच होने से बनती है डिमांड | जिले के व्यापारियों द्वारा अपनी खरीद और बेचान की आईटीआर दाखिल करने के बाद विभाग की ओर से दस्तावेजों की जांच में बिल का सत्यापन न होने के कारण डिमांड बन जाती है। खरीद और बेचान करने वाले दोनों पक्षों की आईटीआर से विभाग द्वारा डिमांड का सत्यापन किया जाता है। सत्यापन सही मिलने पर डिमांड की राशि अपने आप हट जाती है। वही बिल से सत्यापन नहीं होने पर विभाग की ओर से कर की राशि वसूल की जाती है।