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हाईकोर्ट ने 13 साल 8 माह की बताकर नारी निकेतन भेजा, सुप्रीम कोर्ट ने मेडिकल बोर्ड से जांच करवाई और बालिग बताकर प्रेमी से मिलवाया

घर से भागकर प्रेम विवाह करने वाली एक युवती को हाईकोर्ट ने 13 साल 8 महीने की घोषित करते हुए नारी निकेतन भिजवा दिया था।...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 02, 2018, 06:50 AM IST

घर से भागकर प्रेम विवाह करने वाली एक युवती को हाईकोर्ट ने 13 साल 8 महीने की घोषित करते हुए नारी निकेतन भिजवा दिया था। मगर जब मामला सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पहुंचा तो पूरा केस ही बदल गया। चीफ जस्टिस ने त्वरित न्याय देते हुए महज तीन तारीखों में केस का निपटारा करते हुए युवती को उसके प्रेमी से मिलवा दिया।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एएम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ की पीठ ने अपने फैसले में कहा कि युवती को उससे विवाह करने वाले उसके प्रेमी के सुपुर्द कर दिया जाए। चीफ जस्टिस ने फैसले के अंत में कहा कि यह एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका है। इस मामले में न्याय तब तक अधूरा है, जब तक युवक पर आपराधिक केस है। पूरा न्याय तभी होगा जब केस खारिज होगा। इसलिए मामले में पूरा न्याय करने के लिए अदालत उक्त मामले में युवती के प्रेमी पर दर्ज अपहरण के केस को भी खारिज करती है।

चीफ जस्टिस ने तीन तारीखों में निपटाया मामला

6 अप्रैल : चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के समक्ष मामला आया तो उन्होंने पीड़िता को कोर्ट के समक्ष पेश करने को कहा।

23 अप्रैल : वैशाली ने कोर्ट के समक्ष पेश होकर अपना बयान दिया। उम्र की सत्यता का पता लगाने के लिए कोर्ट ने एम्स को मेडिकल बोड का गठन कर युवती की उम्र का पता लगाने और दो दिन में रिपोर्ट पेश करने को कहा। युवती दो दिन तक दिल्ली स्थित यूपी भवन में सरकारी वकील ऐश्वर्या भाटी की निगरानी में रही और उसकी एम्स में मेडिकल जांच हुई।

26 अप्रैल : एम्स ने सुप्रीम कोर्ट में रिपोर्ट पेश करके कहा कि वैशाली की उम्र 19 से 24 वर्ष के बीच है। एम्स की रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला रद्द कर दिया और वैशाली को उसके पति नीरज के सुपुर्द करने के आदेश जारी किए और याचिका का निपटारा करते हुए प्रेमी पर दर्ज केस को भी खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट में यह थी याचिकाकर्ता प्रेमी युगल की दलील

याचिकाकर्ता वैशाली ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसकी उम्र 19 साल है। उसके परिजनों ने उसके शैक्षिक दस्तावेजों में उम्र कम लिखवा रखी है। वह बालिग है और अपने पति के साथ रहना चाहती है। उसे नारी निकेतन से मुक्त कराकर उसके पति के हवाले किया जाए। उसका मेडिकल निरीक्षण कराया जाए, जिससे सच सामने आ सके। उन्होंने उम्र का सही पता लगाने के लिए मेडिकल बोर्ड गठित करने की मांग की थी, जिसे हाईकोर्ट ने ठुकरा दिया और दस्तावेजों को सही माना।

यूपी सरकार की दलील

यूपी सरकार की ओर से वकील ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि याचिकाकर्ता कोई अपराधी नहीं है। जिससे कि उसकी उम्र का पता लगाने के लिए सरकार कोर्ट से ऐसी कोई मांग रखे। ऐसे में कोर्ट चाहे तो मेडिकल बोर्ड गठित कर सकती है। कोर्ट जो भी निर्णय लेगी, राज्य सरकार उसका समर्थन करेगी।

यह है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश की एक युवती वैशाली ने अपने प्रेमी नीरज के साथ नवंबर 2017 में अपने घर वालों की इच्छा के विरुद्ध जाते हुए घर से भाग कर विवाह किया था। इसके बाद वैशाली के परिजनों ने नीरज के खिलाफ बहला-फुसला कर नाबालिग का अपहरण करने का मामला दर्ज किया था। नीरज ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष उस पर दर्ज केस को खत्म किए जाने की मांग की थी। वैशाली ने खुद को बालिग बताते हुए अपने पति नीरज के साथ रहने की इच्छा जताई थी। हाईकोर्ट ने 5 दिसंबर 2012 को अपना फैसला सुनाते हुए वैशाली के परिजनों द्वारा पेश सीबीएसई की मार्कशीट को आधार पर वैशाली की उम्र 13 वर्ष 8 महीने मानते हुए उसे इलाहाबाद स्थित नारी निकेतन भेजने के आदेश जारी किए थे। इस मार्कशीट में वैशाली की जन्मतिथि 25 सितंबर 2003 दर्शाई गई है। इस फैसले को वैशाली व नीरज ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती देते हुए एक बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की थी।

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