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प्रधान मुख्य वन संरक्षक के 128 तबादलों पर चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने उठाए सवाल

वन विभाग में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (होफ) की ओर से गत सप्ताह किए गए 128 वनरक्षकों के तबादले को लेकर बवाल मच गया है।...

Bhaskar News Network | Last Modified - May 18, 2018, 07:25 AM IST

वन विभाग में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (होफ) की ओर से गत सप्ताह किए गए 128 वनरक्षकों के तबादले को लेकर बवाल मच गया है। तबादलों पर मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक (सीडब्ल्यूएलडब्ल्यू) ने ही कड़े सवाल उठाते हुए इनको वन्यजीव हित में नहीं मानते हुए अतार्किक बताया है। मुख्य आपत्ति पहले से खाली पदों को नहीं भरकर वाइल्ड लाइफ डिविजनों से वनरक्षकों को दूसरी व्यक्तिगत सिफारिशी जगहों पर भेजने को लेकर है। वाइल्ड लाइफ के 15 डिविजनों में पहले से ही इनके 193 पद खाली पड़े हैं, इसके बावजूद अब तबादलों के बाद खाली पदों की संख्या 206 हो गई है। ताजा तबादलों में वन्यजीव कार्यालयों से 46 वनरक्षकों के स्थानांतरण अन्य कार्यालयों में किए गए हैं और इसकी एवज में केवल 33 वनरक्षकों का ही लगाया गया है। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने आपत्ति जताई है कि तबादलों से पहले उनकी विंग (वन्यजीव) से कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया। तबादलों में बाहर की खाली जगहों को भरने के बजाए वहां के 12 वनरक्षकों को जयपुर लगाया गया है। जो वन्यजीव प्रबंधन के लिए जरूरी नहीं होकर व्यक्तिगत कारणों दिखाई पड़ रहे हैं। तबादलों की सुगबुगाहट से पहले ही चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को लिखा था कि उनके यहां फील्ड स्टाफ 20 प्रतिशत पद खाली है। स्टाफ को 24 घंटे ड्यूटी कराना मजबूरी है। इसलिए वन्यजीव संभाग से किसी भी लोकसेवक के अन्यत्र तबादलों पर उसकी जगह भरी जाए। इसकी उपेक्षा होती देख अब चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने खाली हुए पदों को भरने के बाद ही स्थानांतरित किए गए लोकसेवकों को रिलीव करने की बात लिखी है। जिसके पीछे तर्क है कि अगर वनरक्षकों को पहले ही रिलीव करते हैं तो फील्ड में काफी समस्या व वन्यजीव सुरक्षा को खतरा होगा।

सरिस्का बाघ परियोजना जैसी जगह पर 9 की जगह 3 वनरक्षक लगाए

सरिस्का में स्टाफ की कमी को लेकर बाघ सुरक्षा जैसा संवेदनशील मामला गर्माया है। संबंधित फील्ड डायरेक्टर कई बार विभाग को अवगत करा चुके हैं। इसके बावजूद स्टाफ की कटौती हो गई। तबादलों में सरिस्का बाघ परियोजना से 9 वनरक्षकों को अन्यत्र स्थानांतरण किया गया है, लेकिन उनकी जगह केवल 3 ही लगाए। चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने आपत्ति जता कहा है कि ऐसी स्थिति में वन्यजीव प्रबंधन व बाघों की सुरक्षा, मॉनिटरिंग आदि पर विपरीत प्रभाव पड़ेगा। राष्ट्रीय चंबल अभयारण्य में 5 वनरक्षकों को अन्यत्र लगा केवल 1 वनरक्षक लगाया है। इसके बाद 9 पद रिक्त हैं।

पद खाली मतलब वन्यजीव सुरक्षा पर बढ़ता खतरा : बाघ परियोजना वाले रणथंभौर, सरिस्का, मुकंदरा में पहले से ही 58 पद खाली हैं। इसके बावजूद ताजा तबादलों के बाद उन्हें भरने के बजाए खाली पोस्टों की संख्या 67 हो गई है। इनके सहित वाइल्ड लाइफ के 15 डिविजन में 206 हो गए हैं। इन डिविजनों में चंबल, बीकानेर, जैसलमेर, कोटा, जोधपुर, चित्तौडगढ, आबू पर्वत, राजसमंद, करौली, कोटा, जयपुर, भरतपुर शामिल हैं।

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