--Advertisement--

अनूठा मंदिर: राजस्थान के ददरेवा धाम में गोगाजी और गुरुगोरखनाथ मंदिर में प्रसाद में चढ़ता है प्याज

इस मंदिर में वर्षों से चली आ रही है प्रसाद के रूप में प्याज चढ़ाने की परंपरा, 8 दिन से चल रहा है मेला

Danik Bhaskar | Sep 04, 2018, 11:57 AM IST

सादुलपुर (चूरू). चूरू जिले के सादुलपुर इलाके में स्थित ददरेवा धाम देश का ऐसा अनूठा मंदिर है जहां गोगाजी और गुरु गोरखनाथ मंदिर में प्रसाद के रूप में प्याज चढ़ाया जाता है। प्याज चढ़ाने की ये परंपरा वर्षों साल पुरानी है। पिछले आठ दिन से ददरेवा में मेला चल रहा है।

भक्तों द्वारा प्याज चढ़ाए जाने की वजह से यहां के गोगाजी और गुरु गोरखनाथ मंदिर में प्याज का ढेर लगा हुआ है। रक्षाबंधन के दूसरे दिन से मेला शुरु होता है और पूरे एक माह चलता है। इसमें सर्वाधिक भीड़ कृष्ण पक्ष की छठ, सप्तमी और अष्टमी तथा शुक्ल पक्ष की छठ, सप्तमी और अष्टमी को लगती है। मेले में करीब चार से पांच लाख श्रद्धालु पहुंचते हैं। अधिकांश श्रद्धालु यूपी व बिहार के होते हैं। शुक्ल पक्ष में पंजाब से ज्यादा श्रद्धालु यहां आते हैं। यहां आने वाला प्रत्येक श्रद्धालु खील के साथ प्याज चढ़ाता है। इससे यहां करीब 50 से 60 क्विंटल प्याज इकट्ठा हो जाता है।

पहले सस्ता होता था प्याज, इसलिए चढ़ाते थे : करीब एक हजार साल पहले हनुमानगढ़ के गोगामेड़ी के पास गोगाजी और आक्रमणकारी महमूद गजनवी के बीच युद्ध हुआ था। तब गोगाजी ने विभिन्न स्थानों से सेनाएं बुलाई थीं। लड़ाई के लिए यहां आए सैनिक, अपने साथ रसद के तौर प्याज और दाल व खाने की सामग्री लेकर आए थे। इसके अलावा दूसरा कारण ये भी बताया जाता है कि खील, प्याज व दाल सस्ती होती है।

गोगाजी का महल था ददरेवा में : बताया जाता है कि गोगाजी की जन्मस्थली ददरेवा में गोगाजी का महल हुआ करता था। यहीं पर जाहरवीर गोगाजी का मंदिर भी है। मंदिर एवं गुरु गोरक्षनाथ टीले में धोक लगाने के बाद इस महल में धोक लगाकर जातरु अपनी यात्रा पूर्ण मानते हैं। वे गढ़ के अंदर दिल खोलकर चढ़ावा भी चढ़ाते हैं। नकदी के अलावा खील, बताशे एवं प्याज का विशेष तौर पर प्रसाद चढ़ाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि ददरेवा में आने वाला हर भक्त सबसे पहले गोरख गंगा में स्नान करता है। फिर उसी के पानी से खीर बना खाते हैं। यहां से वे गोगाजी मंदिर व गोरख टीला जाकर प्याज का प्रसाद चढ़ाते हैं।