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भारत के दो लाख एकड़ में फैले 62 केंट क्षेत्रों में दिखती है अंग्रेजी राज की झलक

Bhaskar News Network

May 18, 2019, 07:36 AM IST

Sikar News - भारतीय उपमहाद्वीप के तीन देशों-भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के शहरों में फौजी उपनगर अलग ही नजारा पेश करते हैं।...

Chala News - rajasthan news a glimpse of the english raj is seen in 62 kent areas spread over two lakh acres of india
भारतीय उपमहाद्वीप के तीन देशों-भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश के शहरों में फौजी उपनगर अलग ही नजारा पेश करते हैं। चौड़ी सड़कें, खुले पार्क, टेनिस कोर्ट, आफीसर्स मैस और सर्वेट क्वार्टर्स के साथ मिलिटरी केंटोनमेंट ब्रिटिश राज की ऐसी विरासत हैं जिनमें ज्यादा बदलाव नहीं हुआ है। भारत में दो लाख एकड़ में 62, पाकिस्तान में 43 और बांग्लादेश में 30 केंट क्षेत्र हैं। स्थानीय निकायों का केंटोनमेंट के संचालन में ज्यादा दखल नहीं है।

भारत के केंट क्षेत्रों में असैनिक अधिकारियों, नेताओं की भूमिका भी रहती है। अफसरों और राजनेताओं को ब्रिटिश राज के शानदार बंगलों सहित कई सुविधाएं मिलती हैं। केंट क्षेत्रों के कामकाज की सार्वजनिक तौर पर छानबीन होती है। फिर भी, भारतीय सेना को अंग्रेजों के राज की सुविधाएं और कुछ अधिकार हासिल हैं। ब्रिटेन द्वारा दूसरे विश्व युद्ध में लागू कुछ विशेष नियम अब भी चल रहे हैं। देश के उपद्रवग्रस्त समझे जाने वाले क्षेत्रों में सेना को दंड से लगभग छूट है।

लंबे समय तक फौजी शासन में रहे पाकिस्तान में सेना का बहुत अधिक प्रभाव अब भी है। वैसे, सेना के एक जनरल पत्रकारों से कहते हैं, मेरे बॉस प्रधानमंत्री इमरान खान सेना और खुफिया एजेंसियों पर पूरा नियंत्रण रखते हैं। हम सब पाकिस्तान को सुरक्षा के मॉडल से विकास के मॉडल में बदलने की कोशिश कर रहे हैं। पाकिस्तानी सेना को बहुत अधिकार हैं। 1980 में रिटायर्ड सैनिकों और उनके परिवारों के लिए बनी डिफेंस हाउसिंग अथॉरिटी (डीएचए) ने जमीन अधिग्रहण के अपने अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए संपत्ति का विराट साम्राज्य खड़ा कर लिया है। पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में उपनगर क्लिफ्टन डीएचए के नियंत्रण में है। इसकी आबादी लगभग पांच लाख है। 15 किलोमीटर का समुद्र तट इसके हिस्से में आता है। दूसरे सबसे बड़े शहर लाहौर के प्रमुख बिजनेस डिस्ट्रिक्ट सहित दक्षिण पूर्वी इलाका डीएचए के हाथ में है।

दूसरी तरफ पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने डीएचए की भूमिका पर असंतोष जताया है। अभी हाल एक फैसले में कोर्ट ने खातों की सार्वजनिक जांच के आदेशों की अनदेखी करने के लिए डीएचए की खिंचाई की है। एक न्यायाधीश ने कहा, यह एजेंसी सरकार के भीतर एक अन्य सरकार के समान काम कर रही है। एक अन्य जज ने कहा, आप लोग विधवाओं और शहीदों की आड़ में अपना कारोबार चला रहे हैं। एक जनरल इससे इनकार करते हैं। वे कहते हैं, डीएचए के कारण रिटायर्ड सैनिकोंं के कल्याण से जुड़े कार्य सरकार को नहीं करना पड़ते हैं। यह देश का सबसे बड़ा कर दाता भी है। कुछ भी हो उपमहाद्वीप के इन देशों में अंग्रेजी राज की गूंज सुनाई पड़ती है।

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विशेष अनुबंध के तहत सिर्फ दैनिक भास्कर में

इकोनॉमिस्ट ने भारत, पाक और बांग्लादेश के केंट इलाकों पर विशेष रिपोर्ट की है...

कीमती संपत्ति पर सेना का साम्राज्य

प्रमुख शहरों में मूल्यवान संपत्ति केंटोनमेंट के इलाकों में है। मुंबई में अरब सागर के सामने स्थित नेवीनगर विश्व की सबसे कीमती संपत्ति में शामिल है। ताजमहल के लिए मशहूर आगरा में सेना का बड़ा केंट है। दिल्ली में लाल किले का तीन चौथाई हिस्सा सेना के कब्जे में है। पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से लगे शहर रावलपिंडी में सेना का मुख्यालय है। कराची, लाहौर में व्यावसायिक इलाका सेना के नियंत्रण में आता है। बांग्लादेश की राजधानी ढाका के बीच में तीनों सेनाओं के मुख्यालय और एक हवाई अड्‌डा भी है।

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