जीणमाता धाम की टूटी सड़कों से श्रद्धालु हर साल होते हैं परेशान
जीणमाता का लक्खी मेला 25 मार्च से शुरू हो रहा है। मेले में लाखों की संख्या में श्रद्धालु आएंगे। कलेक्टर व सरकार द्वारा पिछले मेले में दिए गए निर्देश में साफ लिखा गया था कि जीणमाता जाने वाली सड़कें अब गड्ढ़ा मुक्त हो जाएगी, लेकिन दांतारामगढ़ क्षेत्र में आने वाली जीणमाता रोड गड्ढ़ों में तब्दील हो गई है।
रैवासा से जीणमाता, गोरियां से जीणमाता, बाजौर छतरियों के पास से जीणमाता जोड़ने वाली सड़क पूरी तरीके से जर्जर अवस्था में पहुंच चुकी है। इस सड़क पर इतने बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए हैं कि
आने जाने वाले राहगीर व श्रद्धालु आए दिन इनमें गिरकर जख्मी हो रहे हैं।
कई बार श्रद्धालुओं ने सोशल मीडिया पर अपनी पीड़ा जाहिर की। कई बार यहां के ग्रामीणों ने जर्जर सड़क की मरम्मत कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को सूचना भी दी, लेकिन उसके बावजूद सड़क की मरम्मत नहीं कराई गई। इससे आसपास के ग्रामीण व श्रद्धालु पूरी तरीके से परेशान हो गए हैं। श्रद्धालु पंकज अग्रवाल ने बताया कि जीणमाता मेले के दौरान प्रशासन सड़क पर लीपापोती का काम करता है, जैसे ही मेला पूरा होता है तो सड़क टूटने लगती है। एकादशी को आते है तो सड़क पर हिचकोले खाने पड़ते हैं। क्योंकि सड़क की मरम्मत में ठेकेदार घटिया सामग्री उपयोग में लेते हैं। इसके कारण यह सड़क श्रद्धालुओं के लिए दर्द बन गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई बार इसकी शिकायत संबंधित अधिकारियों से की जा चुकी है, लेकिन इसका निवारण आज तक नहीं हुआ। सूरत के श्रद्धालु रामदयाल शर्मा ने कहा कि अब कलेक्टर यज्ञमित्रसिंह देव से उम्मीद है कि इस मामले को गंभीरता से लेते हुए (पीडब्ल्यूडी) को निर्देशित कर इस सड़क की मरम्मत कराएं।
राकेश पुजारी व्यवस्थापक जीणमाता मंदिर ट्रस्ट : हमने कलेक्टर की मीटिंग में टूटी सड़क का मुद्दा उठाया था। जीणमाता आने वाले श्रद्धालु भी सड़क को लेकर काफी नाराज हैं। इसमें विभाग की लापरवाही है। मेले में ही नहीं, बल्कि यह सड़क मार्ग पूरे साल ठीक रहना चाहिए। इससे ग्रामीणों एवं श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानीद नहीं हो और दुर्घटनाओं को भी रोका जा सके।
रैवासा. जीणमाता जाने वाली टूटी सड़क जो हादसों का कारण बनती है।