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एलाेपैथी के डाॅक्टर जनता के नकली भगवान बनना चाहते हैं, क्याेंकि बिल से उनकी ठगी बंद हाे जाएगी

2 वर्ष पहले
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सीकर. केंद्र सरकार एनएमसी बिल लेकर अाई है। लोकसभा व राज्यसभा में यह पास हो चुका। राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होते ही यह लागू हो जाएगा। देशभर के डॉक्टर इसका विरोध कर रहे हैं। लेकिन, क्या आपने सोचा ऐसा क्यों हो रहा है? केंद्र सरकार नए बिल में नर्सेज, अायुर्वेद, यूनानी अाैर होम्योपैथी के डाॅक्टराें काे एलाेपैथी दवा लिखने के अधिकार दे रही है। इन्हें इसी बात को लेकर टेंशन है। इन कुछ सालों में आयुर्वेद व होम्योपैथी की तरफ रुख बढ़ा है। तीन साल में ही 40 फीसदी मरीज इन दो पद्धतियों की तरफ बढ़े हैं। मैंने कई केस एेसे हैंडल किए हैं, जो एलोपैथी के डॉक्टर के काबू नहीं आए। अायुर्वेद, हाेम्याेपैथी, यूनानी डाॅक्टराें अाैर नर्सेज काे एलाेपैथी दवा लिखने का अधिकार मिलेगा ताे मरीजाें काे स्वास्थ्य सेवाएं नसीब हाेंगी। एलाेपैथी डाॅक्टर गांव-देहात की तरफ मुंह नहीं करना चाहते। एलाेपैथी के डाॅक्टर अायुर्वेद, यूनानी, हाेम्यापैथी अाैर नर्सेज के हुनर से डरे हुए हैं। इसलिए वे बिल का विराेध करने उतरे हैं। क्याेंकि हम सेवारत डाॅक्टराें की हड़ताल में मरीजाें काे बेहतर ढंग से हैंडल कर चुके हैं। एलाेपैथी के डाॅक्टराें काे लग रहा है उनकी दुकान उठ जाएगी। इसलिए अभी से वे केंद्र सरकार पर दबाव बनाने लगे हैं। बिल के विराेध में एलाेपैथी के डाॅक्टर हड़ताल पर जाएंगे ताे हम भी एकजुट हाेकर मरीजाें की बेहतर देखभाल कर दिखाएंगे।

अंजनी कुमार शर्मा, आयुष चिकित्सक

अब समझिए एनएमसी बिल काे लेकर क्याें विराेध कर रहे डॉक्टर, आंदोलन स्थगित किया

एनएमसी बिल के विराेध में एलाेपैथी डाॅक्टरों का प्रस्तावित आंदोलन कश्मीर मुद्द्रे, पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के निधन अाैर देश में कई जगह बाढ़ के हालात हाेने के कारण स्थगित किया गया है। एलाेपैथी डाॅक्टराें का मानना है कि बिल में एेसा प्रावधान हुअा ताे सबसे ज्यादा नुकसान उन्हें हाेगा। एलाेपैथी के डाॅक्टराें की प्रैक्टिस पर असर पड़ेगा। मरीज दूसरी तरफ डायवर्ट हाे जाएंगे। वे नर्सेज, अायुर्वेद, यूनानी अाैर होम्योपैथी डाॅक्टराें से इलाज लेने लगेंगे।

मेडिकल एडवाइजरी काउंसिल का गठन : केंद्र सरकार इस बिल में एक काउंसिल का गठन करेगी। जहां राज्य मेडिकल शिक्षा और ट्रेनिंग के बारे में अपनी समस्याएं और सुझाव दर्ज करा सकेंगे। इसके बाद यह काउंसिल राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग को मेडिकल शिक्षा से संबंधित सुझाव देगी। इसके आधार पर ही आगे िनयम तय होंगे।

मेडिकल संस्थानों की फीस : राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग देशभर के सभी निजी मेडिकल संस्थानों में 40 फीसदी सीटों की फीस तय करेगा। बवी हुई 60 फीसदी सीटों की फीस निजी संस्थान खुद तय करेंगे।

ब्रिज कोर्स : इस बिल के धारा 49 में एक ब्रिज कोर्स करते ही आयुर्वेद, होम्योपेथी के डॉक्टर भी एलोपेथी इलाज करने के योग्य हो जाएंगे।

एमसीआई के कर्मचारियों की सेवाएं होंगी समाप्त : राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग की धारा 58 के अनुसार इस कानून के प्रभावी होते ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया के साथ इसके अधिकारियों और कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त हो जाएंगी। इसके एवज में उन्हें तीन महीने का वेतन और भत्ते मिलेंगे।

मेडिकल की होगी एक परीक्षा : नए बिल के लागू होते ही देश के सभी मेडिकल कॉलेजों में एडमिशन के लिए केवल एक परीक्षा ही ली जाएगी। इस परीक्षा का नाम नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट होगा।

मेडिकल रिसर्च को बढ़ावा : इस बिल में मेडिकल रिसर्च को बढ़ाने का प्रावधान है। स्नातक और परास्नातक स्तर पर डॉक्टरों को दक्ष बनाने के लिए मेडिकल रिसर्च को बढ़ावा दिया जाएगा।

कौन-कौन सी होंगी रेगुलेटरी बॉडी: एनएमसी के तहत चार अलग-अलग रेगुलेटरी बॉडी होंगी। अंडर-ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (यूजीएमईबी) और पोस्ट-ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन बोर्ड (पीजीएमईबी)।

इनकी जिम्मेदारियों में पाठ्यक्रम और चिकित्सा शिक्षा के लिए दिशा देना और चिकित्सा योग्यता को मान्यता प्रदान करना शामिल है।

चिकित्सा मूल्यांकन और रेटिंग बोर्ड : बोर्ड के पास यूजीएमईबी और पीजीएमईबी द्वारा निर्धारित न्यूनतम मानकों को बनाए रखने में विफल रहने वाले संस्थानों पर मौद्रिक दंड लगाने की शक्ति होगी। यह नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, पाठ्यक्रम शुरू करने और मेडिकल कॉलेज में सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए भी अनुमति देगा।

नैतिकता और चिकित्सा पंजीकरण बोर्ड : यह बोर्ड देश में सभी लाइसेंस प्राप्त चिकित्सा चिकित्सकों का एक राष्ट्रीय रजिस्टर बनाए रखेगा और पेशेवर और चिकित्सा आचरण को भी विनियमित करेगा। केवल रजिस्टर में शामिल लोगों को डॉक्टरों के रूप में अभ्यास करने की अनुमति दी जाएगी।

गिरेबान में झांकंे एलाेपैथी के डाॅक्टर, गांव-देहात की ओर देखते तक नहीं : पाटाेदा

एसके हाॅस्पिटल के अायुर्वेद चिकित्सक डाॅ. कैलाश पाटाेदा का कहना है कि एलाेपैथी के डाॅक्टर अपने गिरेबान में झांकंे। वे अपने स्वार्थ के लिए कराेड़ाें लाेगाें के स्वास्थ्य सेवाअाें के लाए बिल के विराेध में उतर अाए। सरकार के प्रयासाें में अड़ंगा डाल रहे हैं। वे जनता के नकली भगवान बनना चाहते हैं। ब्रिज काेर्स के बाद अगर अायुर्वेद, यूनानी, हाेम्याेपैथी डाॅक्टराें अाैर नर्सेज काे दवा लिखने का अधिकार दिया जाता है कि लाेगाें के हित में हाेगा। गांव में बैठे मरीजाें काे इलाज मिल सकेगा। सेवारत डाॅक्टर जब-जब कार्य बहिष्कार पर उतरे ताे हमने मरीजाें काे बेहतर इलाज दिया। भविष्य में जरूरत पड़ी ताे फिर जनता की सेवा करके दिखाएंगे।

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