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अाईपीएस प्रीति ने 3 साल पहले गांव में शुरू कराया महिलाअाें का गींदड़

एक वर्ष पहले
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जिले का कूदन एेसा गांव है जहां मुहूर्त किसी भी समय का हाे, लेकिन हाेलिका दहन गाेधूलि बेला किया जाता है। कूदन के लाेग एेसा 80 साल से करते अा रहे है। ग्रामीण इसे संत दादू पंथी जयरामदास महाराज का अाशीर्वाद बताते है। राजा-रजवाड़ाे के समय संत ने अाशीर्वाद दिया था कि गाेधूलि बेला में हाेलिका दहन करेगे ताे गांव की कभी समृद्धि नहीं जाएगी। गांव में दूसरी परंपरा भी है। यहां महिलाएं गींदड़ खेलती है। इसकी की शुरुअात गांव की अाईपीएस बेटी प्रीति चंद्रा ने 2017 में शुरू कराई थी। अाईपीएस बेटी खुद गुवाड़ में गींदड़ खेलने उतरी। इसके बाद गांव की महिलाअाें से परंपरा बना लिया। गांव में लगातार महिलाएं हाेली पर गींदड़ खेल रही है। गांव के चाैक में हाेने वाली गींदड़ में गांव पुरूष भी शामिल रहते हैं। अासपास के गांवाें की महिलाएं गीदड़ देखने पहुंचती है। गींदड़ कार्यक्रमाें में अनुशासन बना रहे, इसके लिए ग्रामीण खुद कमाल संभालते हैं। हजाराें की संख्या में लाेगाें की माैजूदगी के बावजूद पुलिस की जरूरत नहीं पड़ती है। फाल्गुन माह शुरू हाेते ही इस बार भी गांव में गींदड़ का कार्यक्रम शुरू किया गया था। लेकिन गांव में नाैजवान की माैत हाेने के चलते दाे दिन पहले महिलाअाें की गींदड़ का कार्यक्रम टाल लिया।

कूदन गांव की बेटी आईपीएस प्रीति चंद्रा, जिन्होंने 2017 में गांव में महिलाओं के गींदड़ खेलने की शुरुआत कराई।
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