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न्यूजीलैंड के किसान ड्रोन से भेड़ों को चरा रहे, इसी से चारा-पानी भी तलाश रहे ताकि समय बचा सकें

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 03:21 AM IST

Sikar News - आमतौर पर चरवाहे अपने मवेशियों को दिनभर चराने के लिए खुद निकलते हैं। लेकिन न्यूजीलैंड के किसान भेड़ों को चराने और...

Chala News - rajasthan news new zealand farmers are feeding sheep with a drone so also looking for fodder and water to save time
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आमतौर पर चरवाहे अपने मवेशियों को दिनभर चराने के लिए खुद निकलते हैं। लेकिन न्यूजीलैंड के किसान भेड़ों को चराने और हांकने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे ड्रोन से ही चारा-पानी भी खोज रहे हैं। किसानों का कहना है कि जो काम पहले 3 घंटे में होता था, उसे करने में सिर्फ 45 मिनट लग रहे हैं। न्यूजीलैंड की मेविक इंटरप्राइज नाम की फर्म ने खासतौर पर किसानों के लिए ड्रोन तैयार किए हैं। इनमें हाई क्वालिटी के फोटो-वीडियो फीचर के साथ तेज आवाज करने वाले स्पीकर लगे हैं। इनमें कुत्तों की आवाज इनबिल्ट की गई है। किसान चाहें तो अपनी आवाज रिकॉर्ड करके ड्रोन में सेट कर सकते हैं। भेड़ों का झुंड जब चरने निकलता है, तब ड्रोन उनकी निगरानी करता है। इस दौरान किसान ड्रोन को अपने घर या आसपास के इलाके से ऑपरेट करते हैं। भेड़ें जब अपने झुंड से अलग हो जाती हैं या इधर-उधर भागती हैं, तब ड्रोन से कुत्तों के भौंकने की आवाज आती है। इससे सारी भेड़ें एक झुंड में आ जाती हैं। भेड़ पालन का काम आसान होने पर किसानों के बीच इस ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ गया है। इसके अलावा कुछ कंस्ट्रक्शन कंपनियां अपनी साइटों की देखरेख और मजदूरों की निगरानी के लिए इसका इस्तेमाल करने लगी हैं। ड्रोन स्पेशलिस्ट एडम केर ने बताया कि इसकी कीमत 5600 डॉलर (करीब 3.80 लाख रुपए) है। एडम के मुताबिक, गर्मियों में भेड़ों के लिए चारा-पानी की समस्या आती है। अभी तक किसान पैदल जाकर पहाड़ी इलाकों में चारा-पानी तलाशते थे। फिर, भेड़ें ले जाकर वहां चराते थे। इन सब में दो-तीन घंटे बर्बाद होते थे। लेकिन अब यही काम सिर्फ 45 मिनट में हो रहा है। इसके जरिए किसान पहले ही इलाके में चारा-पानी तलाशते हैं। फिर ड्रोन के जरिए भेड़ें चराने पहुंच जाते हैं।

कंस्ट्रक्शन कंपनियां साइटों की देखरेख व मजदूरों की निगरानी भी करने लगीं

एजेंसी | वेलिंगटन

आमतौर पर चरवाहे अपने मवेशियों को दिनभर चराने के लिए खुद निकलते हैं। लेकिन न्यूजीलैंड के किसान भेड़ों को चराने और हांकने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं। वे ड्रोन से ही चारा-पानी भी खोज रहे हैं। किसानों का कहना है कि जो काम पहले 3 घंटे में होता था, उसे करने में सिर्फ 45 मिनट लग रहे हैं। न्यूजीलैंड की मेविक इंटरप्राइज नाम की फर्म ने खासतौर पर किसानों के लिए ड्रोन तैयार किए हैं। इनमें हाई क्वालिटी के फोटो-वीडियो फीचर के साथ तेज आवाज करने वाले स्पीकर लगे हैं। इनमें कुत्तों की आवाज इनबिल्ट की गई है। किसान चाहें तो अपनी आवाज रिकॉर्ड करके ड्रोन में सेट कर सकते हैं। भेड़ों का झुंड जब चरने निकलता है, तब ड्रोन उनकी निगरानी करता है। इस दौरान किसान ड्रोन को अपने घर या आसपास के इलाके से ऑपरेट करते हैं। भेड़ें जब अपने झुंड से अलग हो जाती हैं या इधर-उधर भागती हैं, तब ड्रोन से कुत्तों के भौंकने की आवाज आती है। इससे सारी भेड़ें एक झुंड में आ जाती हैं। भेड़ पालन का काम आसान होने पर किसानों के बीच इस ड्रोन का इस्तेमाल बढ़ गया है। इसके अलावा कुछ कंस्ट्रक्शन कंपनियां अपनी साइटों की देखरेख और मजदूरों की निगरानी के लिए इसका इस्तेमाल करने लगी हैं। ड्रोन स्पेशलिस्ट एडम केर ने बताया कि इसकी कीमत 5600 डॉलर (करीब 3.80 लाख रुपए) है। एडम के मुताबिक, गर्मियों में भेड़ों के लिए चारा-पानी की समस्या आती है। अभी तक किसान पैदल जाकर पहाड़ी इलाकों में चारा-पानी तलाशते थे। फिर, भेड़ें ले जाकर वहां चराते थे। इन सब में दो-तीन घंटे बर्बाद होते थे। लेकिन अब यही काम सिर्फ 45 मिनट में हो रहा है। इसके जरिए किसान पहले ही इलाके में चारा-पानी तलाशते हैं। फिर ड्रोन के जरिए भेड़ें चराने पहुंच जाते हैं।

कंस्ट्रक्शन कंपनियां साइटों की देखरेख व मजदूरों की निगरानी भी करने लगीं

400 फीट की ऊंचाई से कर रहे मॉनिटरिंग

रोदरहैम गांव के किसान कोरे लेम्बेथ ने बताया कि इसे चलाना बेहद आसान है। इसकी सबसे अच्छी खासियत जूम फीचर है। इसकी मदद से ड्रोन के 400 फीट की ऊंचाई पर होने के बाद भी भेड़ों को करीब से मॉनिटर किया जा सकता है। इस कारण मुझे चलकर नहीं जाना पड़ता।

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