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स्कॉलरशिप से प्रियंका ने बीटेक किया, अब असिस्टेंट बैंक मैनेजर

एक वर्ष पहले
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पीएनबी में असिस्टेंट मैनेजर प्रियंका पालीवाल की कहानी को खास बनाता है उनका संघर्ष। सीकर शहर में घंटाघर के पास से गुजरते हुए आपने वहां खड़ा एक आलू का ठेला देखा होगा। ये ठेला प्रियंका के पिता बाबूलाल पालीवाल लगाते हैं। बाबूलाल के तीन भाई सरकारी सेवा में रहे। बाबूलाल निरक्षर थे। प्रियंका ने बचपन से अपने मेहनतकश िपता को विषम परिस्थितियों से जूझते देखा। तभी प्रियंका ने तय कर लिया कि वे इन हालातों को बदलेंगी। इसके लिए सबसे जरूरी थी शिक्षा। प्रियंका ने अाठवीं बाेर्ड में जिला लेवल पर 13 वीं रेंक, दसवीं बाेर्ड में 83 प्रतिशत अाैर बारहवीं बाेर्ड की परीक्षा में 84 प्रतिशत अंक हासिल किए। आठवीं के बाद की पढ़ाई प्रियंका ने स्कॉलरशिप में मिले रुपयों से ही की। पिता पर आर्थिक भार नहीं पड़ने दिया। 2013 में प्रियंका ने बीटेक की डिग्री हासिल की। उसी साल पीएनबी में पीअाे पद के लिए आवेदन किया और सफलता हासिल की। फिलहाल वह ठीकरिया बावड़ी शाखा में असिस्टेंट मैनेजर हैं।

सीकर. शनिवार को दैनिक भास्कर कार्यालय में संपादकीय टीम के साथ महिला दिवस के विशेष अंक को लेकर प्लानिंग करती महिलाएं। महिलाओं ने ही अखबार के हर पेज की मुख्य खबर व फोटो तय की।

जूड़ो कराटे में जिला व स्टेट लेवल पर जीते मेडल

प्रियंका का कहना है कि अगर आपका सपना बड़ा है तो उसके लिए प्रेरणा भी बड़ी होनी चाहिए। मेरे लिए सबसे बड़ी प्रेरणा यह थी कि मुझे अपने घर के हालात बदलने हैं, ताकि उसके लिए मुझे कितना ही परिश्रम क्यों न करना पड़े। पढ़ाई में अव्वल प्रियंका जूड़ो कराटे में भी प्रशिक्षित हैं। जिला व स्टेट लेवल तक कई मेडल भी हासिल कर चुकी हैं।

प्रियंका पालीवाल

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