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15700 फीट केे शितिधर शिखर पर पहुंचने वाली रजनी बनीं ब्रांड एंबेसडर

एक वर्ष पहले
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चारू पाराशर ने 8 साल की उम्र में डांस की विधिवत ट्रेनिंग लेना शुरू किया। चारू के डांसिंग स्किल देखकर उसके टीचर सुरेंद्र बंसल ने उसे डांस इंडिया डांस रियलिटी शो में भाग लेेने के लिए प्रेरित किया। चारू के पेरेंट्स ने अाॅनलाइन फॉर्म भरा। चारू ने डांस इंडिया डांस के टॉप-100 में जगह बनाई। चारू के लिए डांस सिर्फ शौक नहीं, जीने का तरीका है। 11 साल की उम्र में ही चारू डांस में इतनी पारंगत हो गई हैं कि वे पावर मूव्स एकेडमी में दूसरे डांसर को ट्रेनिंग सिखाती हैं। उनके कई स्टूडेंट्स 30 साल के हैं। चारू नियमित रूप से 4 से 5 घंटे डांस की प्रैक्टिस करती हैं। चारू इंडियन और वेस्टर्न दोनों डांस विधाओं में पारंगत है।

कोरियाेग्राफी भी खुद की

चारू दूसरों के स्टेप्स की नकल नहीं करती है। अपने डांस मूव्स खुद कोरियाेग्राफ करती है। चारू सबसे ज्यादा प्रैक्टिस क्लासिकल डांस की करती है। चारू ने बताया कि उसे टीचर्स ने सिखाया है कि क्लासिकल डांस से ही बेस मजबूत होता है। क्लासिकल में महारथ हासिल करने के बाद दूसरा डांस सीखना बेहद आसान होता है।

11 साल की चारू 30 साल तक की महिलाओं व पुरुषों को सिखाती हैं डांस

यहां भी मैं : रोडवेज बसों की बेल्डिंग करती हैं राधा

विशेष महिला संवाददाता | सीकर

अहमस्मि याेध:....यानी मैं एक याेद्धा। यह टैटू खंडेला निवासी 26 वर्षीय रजनी चौधरी के हाथ पर बना हुआ है। रजनी को सीकर की बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान की ब्रांड एम्बेसडर बनाया गया है। माता-पिता की शादी के 11 साल बाद रजनी का जन्म हुआ। रजनी बताती हैं कि सब को बेटे के उम्मीद थी। शाम के समय मेरा जन्म तो घर के लोग बिना खाने खाए ही सो गए। 24 साल की उम्र में रजनी ने पिता से उन्होंने फैशन डिजाइनर बनने की इच्छा जाहिर की। इस पर दादी ने टोक दिया। इसके बाद रजनी ने अपने स्तर पर जुम्बा, योगा की ट्रेनिंग ली। अब वे दूसरों को फिटनेस की ट्रेनिंग देती हैं। हाल ही में रजनी ने मनाली स्थित हनुमान टिब्बा के पास व 15700 फीट ऊंचे शितिधर शिखर तक पहुंच कर जिले का नाम रोशन किया है।

छात्राओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देगी

जिले के सरकारी स्कूलों की छात्राओं को सेल्फ डिफेंस की ट्रेनिंग देंगी। पीरियड्स को लेकर फैले अंधविश्वास के बारे में जागरूक करेंगी। कन्या भ्रूण हत्या के लिए शिविर लगाकर लोगों को जागरूक करेंगी।

चारू पाराशर

_photocaption_सीकर. एक वक्त था जब मैकेनिक का काम पुरुष प्रधान माना जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है। इसी का सबूत है यह तस्वीर। रोडवेज डिपो में बस की बेल्डिंग करते हुए राधा कंवर। राधा के पति राेडवेज बस डिपाे में नाैकरी करते थे। पति की माैत के बाद उन्हें अनुकपात्मक नियुक्ति मिली।*photocaption*

बेटियों को बचाने व पढ़ाने के लिए करेगी जागरूक

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