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अव्यवस्थाओं के यमराज से माताओं के प्राण बचाकर लाती है ये सावित्री

एक वर्ष पहले
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डाॅ. सावित्री भामू का जीवन और चरित्र अपने ही नाम की तरह है। कई माताओं को मौत के मुंह से बचाने का श्रेय डाॅ. सावित्री को जाता है। उनकी इसी उपलब्धि के कारण उन्हें प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य के लिए विभाग की सलाहकार चुन लिया। विभाग ने डाॅ. भामू काे स्पेशल ट्रेनर के रूप में नामित किया है। जुलाई 2018 में डाॅ. सावित्री भामू दक्षता मेंटर के रूप में स्वास्थ्य विभाग से जुड़ी। वे बताती हैं तो स्वास्थ्य केंद्रों की हालत उस समय बेहद खराब था। सोचा कि ऐसे माहौल में कैसे एक मां नए जीवन को दुनिया में ला सकती है। तभी तय किया कि सबसे पहले स्वास्थ्य केंद्रों के हालात बदलना जरूरी है। डॉ. भामू ने छह स्वास्थ्य केंद्राें जनाना हाॅस्पिटल समेत पलसाना, नीमकाथाना, श्रीमाधाेपुर, फतेहपुर, नेछवा के लेबर रूम में नवाचार अपनाए। लेबर रूम के प्राेटाेकाॅल फाेलाे कराए, ताकि डिलीवरी के दाैरान महिलाअाें की माैत राेकी जा सके। उन्हें संक्रमण से बचाया जाए। लेबर रूम में जरूरी उपकरण मुहैया कराए। सुनिश्चित किया कि लेबर रूम में पर्याप्त स्टाफ हर समय उपलब्ध हो। अधिकारियों से मिलकर स्टाफ काे ट्रेनिंग दिलाई। स्टाफ को बताया कि-प्रसूताओं के साथ किस तरह आत्मीयता से पेश आना चाहिए।

जनाना हॉस्पिटल को प्रदेश में नंबर वन बनाया

डॉ. भामू के प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आए। मातृ मृत्यु दर और महिलाओं में संक्रमण की दर में कमी आई। इसका नतीजा यह रहा है कि लक्ष्य स्कीम में जनाना हाॅस्पिटल को प्रदेश में नंबर-1 का दर्जा मिला। जिले की 8 सीएचसी का भी स्कीम में चयन कराने में भी सफल रही। डाॅ. भामू के प्रयासाें का नतीजा यह रहा है कि उन्हें मातृ स्वास्थ्य में बेहतर काम के लिए स्वास्थ्य विभाग ने अपना सलाहकार चुना है। राजस्थान काे प्रशिक्षित करने के लिए ट्रेनर के रूप में नामित किया है।


डॉ. सावित्री भामू }मातृ स्वास्थ्य सलाहकार

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