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यूजर चार्ज नहीं देने के लिए मुट्‌ठीभर लोग भड़का रहे हैं स्मार्ट सिटी योजना के 10 करोड़ रुपए रुक सकते हैं

2 वर्ष पहले
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10 अंक ऑडिट रिपोर्ट काे नगरीय निकाय की वेबसाइट पर अपलोड करना।

40 अंक निकाय के स्वयं के राजस्व में पिछले साल की तुलना बढ़ोतरी।

10 अंक स्थापना वेतन व संधारण, संचालन खर्च 50-70% से अधिक हाेने पर।

70 अंक सर्विस लेवल बेंचमार्क का प्रकाशन किए जाना।

डोर टू डोर कचरा संग्रहण को री-लॉच करेंगे : आयुक्त

दैनिक भास्कर ने नगर परिषद आयुक्त श्रवण कुमार विश्नोई से बातचीत की। यह समझने की कोशिश की कि प्रोजेक्ट फेल होने के पीछे कौन जिम्मेदार है।

 डोर टू डोर कचरा संग्रहण में जीरो एक्सपेंडिचर मॉडल किसने तैयार किया?

 यह मॉडल मैंने ही तैयार किया था। क्योंकि इस मॉडल में सफाई पर नगर परिषद का कोई पैसा खर्च नहीं होना था। निकायों के पास आय के सीमित साधन है। इस व्यवस्था से सभी निकायों में सफाई की सुचारू व्यवस्था लागू की जा सकती है।

 आप खुद ही प्राेजेक्ट को सफल नहीं कर पाए?

 अाम अादमी यूजर चार्ज देना चाहता है लेकिन कुछ लाेग अाम जनता काे भड़का रहे हैं। एक व्यक्ति पैसा देने से इनकार करता है ताे दूसरे लाेग भी उसके साथ हाे जाते हैं। एेसे में व्यवस्था नहीं बन पाई। प्रोजेक्ट अब रिलॉच करने की योजना तैयार कर रहे हैं। इसे चर्चा के लिए बोर्ड बैठक में रखा जाएगा।

 आप खुद यूजर चार्ज वसूल करने के लिए फील्ड में नहीं उतरे। क्या राजनीतिक दबाव था?

 ऐसा नहीं है। मैं खुद यूजर चार्ज की वसूली के लिए कई बार बाजार में गया। व्यापारियों से समझाइश कर पैसा भी वसूला गया, लेकिन कंपनी प्रतिनिधियों को लोग पैसा नहीं देते हैं। रैवेन्यू इकट्‌ठा करने का काम भी फर्म को ही करना है। दबाव जैसी कोई बात नहीं है, लेकिन किसी भी नई व्यवस्था के लिए मजबूत राजनीतिक इच्छा शक्ति की भी जरूरत होती है। सहयोग के नाते पार्षदों का वार्ड स्तर पर सपोर्ट मिलना चाहिए।

 चार दिन से बिगड़ी सफाई व्यवस्था के लिए अब क्या समाधान होगा?

 कंपनी प्रतिनिधियों से बातचीत कर ऑटो टीपर रवाना किए गए हैं। डीएलबी स्तर से मार्गदर्शन मांगा है। अब नगर परिषद की रसीद पर ही पैसा वसूला जाएगा। इसके बाद कंपनी को भुगतान होगा। स्वच्छ अभियान की पालना नहीं करने वालों पर कार्रवाई होगी।

सीकर। आम रास्ते से कचरा उठाते हुए।

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