आवश्यकता से अधिक संग्रह करना भगवान महावीर की नीतियों के खिलाफ था

Seekar News - जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभ देव से प्रारंभ होकर 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर तक प्रतिमाएं समय-समय पर खुदाई...

Bhaskar News Network

Apr 17, 2019, 10:10 AM IST
Sikar News - rajasthan news the collection of more than required was against the policies of lord mahavira
जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभ देव से प्रारंभ होकर 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर तक प्रतिमाएं समय-समय पर खुदाई व अन्य स्रोतों से प्राप्त हुई हैं। भगवान महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर थे, उनका जीवन ही उनका संदेश है। भगवान महावीर महज एक धर्म विशेष के ही तीर्थंकर नहीं वरन एक जीवन दर्शन के, जीवन पद्धति के सृजन करता व युग प्रवर्तक थे। भगवान महावीर ने हजारों साल पहले समाज की इस समस्या पर विचार कर अपरिग्रह (आवश्यकता से अधिक संग्रहण न करना) के माध्यम से समाज में संसाधनों के न्यायोचित वितरण की व्यवस्था करने के लिए समाज को अपरिग्रह का सिद्धांत दिया। अभी हाल ही में खंडेला में गोरियां के दूधवालों का बास में खेत में जुताई के दौरान 18 जून 2018 काे आठवीं शताब्दी की मूर्ति मिली जो 1.5 फीट लंबी एवं 9 इंच चौड़ी है। इसके अलावा श्री हरदयाल राजकीय संग्रहालय में 11 शताब्दी की जैन तीर्थंकर की प्रतिमा रघुनाथगढ़ सीकर से प्राप्त हुई। इसके अलावा संवत 1063 के 1006 ऐडी भगवान ऋषभनाथ की गोराऊ-नागौर से प्राप्त हुई है। तीर्थंकर पद्मासन अवस्था में विराजित हैं। संग्रहालयाध्यक्ष धर्मजीत कौर ने बताया कि सीकर के रघुनाथगढ़ से दो जैन तीर्थंकरों की प्रतिमा मिली है। इसके अलावा नागौर जिले प्राप्त तीर्थंकरों की प्रतिमाएं संग्रहालय में सुरक्षित रखी हुई हैं।

भगवान महावीर ने कहा था-अपने ही क्रोध से भस्म होता है मनुष्य

महावीर की दृष्टि में मनुष्य का नियंत्रण कक्ष उसके भीतर ही निहित है। मूल बात वृत्ति की है, दृष्टि की है, हम भीतर से अपने को देखें और उसके सापेक्ष में इस जगत को समझें। महावीर को ज्ञान था कि मनुष्य हारता है तो अपनी ही तृष्णा से हारता है। भस्म होता है तो अपने ही क्रोध से भस्म होता है। उसे उसका ही द्वेष परास्त करता है। अपनी ही बैर भावना में वह उलझता है। उसका अहंकार ही उसके मार्ग का सबसे बड़ा अवरोध है, बाहर तो कुछ है ही नहीं। उसकी सारी उलझनों की उत्पत्ति अंदर से ही है। इसलिए महावीर मनुष्य के अन्दर की वृत्ति को सुधारने की बात करते थे।

ऋषभनाथ की नागौर से प्राप्त 1006 एडी प्रतिमा

ये हैं पंचशील सिद्धांत

भगवान महावीर द्वारा दिए गए पंचशील सिद्धान्त ही जैन धर्म का आधार बने हैं। इस सिद्धान्त को अपना कर ही एक अनुयायी सच्चा जैन अनुयायी बन सकता है।

खंडेला में मिली भगवान पार्श्वनाथ की प्रतिमा

1. सत्य सत्य इस दुनिया में सबसे शक्तिशाली है और एक अच्छे इंसान को किसी भी हालत में सच का साथ नहीं छोड़ना चाहिए।

2. अहिंसा दूसरों के प्रति हिंसा की भावना नहीं रखनी चाहिए। जितना प्रेम हम खुद से करते हैं उतना दूसरों से भी करें। अहिंसा का पालन करें।

गाैरऊ नागाैर से 1037 एडी की प्राप्त मूर्ति

रघुनाथगढ़ से प्राप्त 11वीं शताब्दी की प्रतिमा।

3. अस्तेय दूसरों की वस्तुओं को चुराना और दूसरों की चीजों की इच्छा करना महापाप है। जो मिला है उसमें ही संतुष्ट रहें।

4. ब्रहृमचर्य जीवन में ब्रह्मचर्य का पालन करना सबसे कठिन है, जो भी मनुष्य इसको अपने जीवन में स्थान देता है, वो मोक्ष प्राप्त करता है।

5. अपरिग्रह ये दुनिया नश्वर है। चीजों के प्रति मोह ही आपके दु:खों का कारण है। सच्चे इंसान किसी भी सांसारिक चीज का मोह नहीं करते हैं।

पार्श्वपाथ की नागाैर जिले से प्राप्त प्रतिमा।

पहली बार महावीर जयंती पर बजेगा महिलाओं का दिव्य घोष बैंड, बजेगी अहिंसा की धुन

भास्कर संवाददाता | सीकर

महावीर जयंती के अवसर पर पहली बार जैन समाज की महिलाओं की ओर से दिव्य घोष बैंड का वादन हाेगा। जैन महिला मंडल द्वारा बैंड का वादन हाेगा। बैंड में 15 महिलाएं शामिल हैं जाे विभिन्न प्रकार के वाद्य यंत्रों से अहिंसा के संदेश का प्रसारित करेंगी। अध्यक्ष किरण पिराक ने बताया कि जैन महिलाओं के एक समूह ने एक संगीत बैंड बनाया है। खास बात ये है कि इस बैंड की सभी सदस्य महिलाएं हैं। इसमें महिलाओं के सिर पर रानी कलर का लहरिया का साफा रहेगा, पीले व रानी कलर साडिय़ां की वेशभूषा रहेगी। मंत्री ललिता काला ने बताया कि बैंड की सभी सदस्य महिलाओं की उम्र लगभग 30 से 50 साल है।

इस बार महावीर जयंती दशलक्षण पर्व में

महावीर जयंती इस बार दशलक्षण पर्व में मनाई जाएगी। इस दिन उत्तम आकिंचन्य धर्म है। दिगंबर जैन समाज महावीर जयंती को लेकर तैयारियां में जुटा है। शहर में स्थित सभी जिन मंदिरों में एवं दिगंबर जैन समाज की ओर से निकाली जाने वाले शोभायात्रा की तैयारियां काे अंतिम रूप दिया जा रहा है। श्री दिगंबर जैन विद्यालय सोसायटी सुबह सात बजे बजाज राेड स्थित वर्धमान स्कूल से शोभायात्रा निकाली जाएगी। अध्यक्ष डाॅ. प्रदीप जैन ने बताया कि यात्रा में जैन समाज की विभिन्न संस्थाओं द्वारा लगभग 10 से 12 तक झांकियां शामिल हाेंगी। आचार्य विशद सागर युवा मंडल के अध्यक्ष प्रबोध पहाड़िया ने बताया कि मंडल ने मतदाता जागरूकता के लिए झांकी बनाई है। इसके अलावा भगवान के जन्मकल्याणक की विभिन्न झांकियां शामिल रहेेंगी। यात्रा में जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों के नाम पर 24 तोरण द्वार बनवाए गए हैं। यात्रा विभिन्न मार्गों से हाेते हुए वापस स्कूल परिसर में पहुंचेगी। सचिव विनोद जयपुरिया ने बताया कि भगवान महावीर जन्म कल्याणक महामहोत्सव एवं आचार्य शांतिसागर मुनि दीक्षा शताब्दी वर्ष विद्यालय परिसर में मनाया जाएगा।

Sikar News - rajasthan news the collection of more than required was against the policies of lord mahavira
Sikar News - rajasthan news the collection of more than required was against the policies of lord mahavira
Sikar News - rajasthan news the collection of more than required was against the policies of lord mahavira
Sikar News - rajasthan news the collection of more than required was against the policies of lord mahavira
X
Sikar News - rajasthan news the collection of more than required was against the policies of lord mahavira
Sikar News - rajasthan news the collection of more than required was against the policies of lord mahavira
Sikar News - rajasthan news the collection of more than required was against the policies of lord mahavira
Sikar News - rajasthan news the collection of more than required was against the policies of lord mahavira
Sikar News - rajasthan news the collection of more than required was against the policies of lord mahavira
COMMENT

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना