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ऐसे लोगों की कहानी, जिन्होंने समझा रक्तदान का महत्व, मिथक तोड़ महिलाएं भी डोनेशन के लिए आ रही हैं आगे

Seekar News - शुक्रवार काे विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग सेमिनार के जरिए रक्तदान काे लेकर लाेगाें काे...

Bhaskar News Network

Jun 14, 2019, 10:50 AM IST
Sikar News - rajasthan news the story of such people who understood the significance of blood donation myth break women are also coming for donation ahead
शुक्रवार काे विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जाएगा। स्वास्थ्य विभाग सेमिनार के जरिए रक्तदान काे लेकर लाेगाें काे जागरूक करेगा। विभिन्न माैकाें पर ब्लड डाेनेट कर जरूरतमंदाें की जान बचा चुके रक्तदाताअाें काे सम्मानित करेगा।

इस माैके पर दैनिक भास्कर ने कुछ एेसे लाेगाें काे ढूंढ़ा जाे इस पवित्र दान का महत्व समझते हैं। इनमें कुछ तो ऐसे हैं जो 20 से ज्यादा बार रक्तदान कर चुके हैं। हमने उनसे बात की और जानने की कोशिश की कि आखिर किस बात ने उन्हें रक्तदान के लिए प्रेरित किया।

हर साल देश में एक कराेड़ यूनिट ब्लड की जरूरत: विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्ल्यूएचअाे के अनुसार भारत में सालाना एक करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत होती है। लेकिन 73 फीसदी ब्लड ही उपलब्ध हो पाता है। क्याेंकि ब्लड डाेनेट करने वालाें का अाबादी का 1 फीसदी भी नहीं है। जिसके कारण हर साल 18 लाख से ज्यादा मरीजाें की माैत हाे जाती है।

12 साल पहले पति को कहा था-रक्तदान मत कीजिए...फिर समझा महत्व, अब तक 11 बार रक्तदान कर चुकी हैं वंदना

वंदना जैन : पति ने किया प्रेरित, हर महावीर जयंती पर करती हैं रक्तदान

तिलक नगर की वंदना जैन 11 बार रक्तदान कर चुकी हैं। करीब 12 साल पहले पति अनिल जैन के दाेस्त का एक्सीडेंट हाे गया था। अनिल दाेस्त की जान बचाने के लिए रक्तदान के लिए जा रहे थे। वंदना ने पति से कहा- रक्तदान से कमजोरी आती है, आप मत कीजिए। पति अनिल ने वंदना काे समझाया। बाेले-तुम भी एक बार रक्तदान देखाें कितना सुकून मिलता है। अनिल ने वंदना काे ब्लड डाेनेशन के लिए तैयार कर लिया। 2007 में पहली बार वंदना से रक्तदान किया। उसे रक्तदान के बाद अात्मसंतुष्टि मिली। वह फिर हर साल महावीर जयंती पर रक्तदान करने लगी।

कमल भड़िया : मरीजों की पीड़ा देख समझा महत्व, अब तक 26 बार रक्तदान : एसके गर्ल्स काॅलेज में लेक्चरर कमल भड़िया अब तक 26 बार रक्तदान कर चुके हैं। 2005 में उन्हाेंने पहली बार रक्तदान किया। कमल भड़िया की मां बीमार रहती थी। उन्हें कई बार ब्लड लगाने की जरूरत पड़ती थी। मां के इलाज के दाैरान मरीजाें काे कई बार ब्लड के लिए भटकते देखा। ब्लड के इंतजाम काे लेकर अाने वाली समस्या काे समझा। इसलिए कमल ब्लड डाेनेशन काे लेकर प्रेरित हुए। इसके बाद वे मां की पुण्य तिथि पर हर साल रक्तदान करने लगे।

महेश काछवाल : पहली बार दोस्त की बहन को खून दिया, अब तक 37 बार कर चुके हैं रक्तदान

1992 में महेश 19 साल के थे। वे बिहार में ट्रांसपाेर्ट कंपनी में काम करते थे। कंपनी में अरूण सराफ भी काम करते थे। दाेनाें की दाेस्ती हाे गई। अरूण की बहन किरण काे डिलीवरी हाेनी थी। डिलीवरी के दाैरान किरण की ब्लीडिंग हाेने लगी। किरण की जिंदगी खतरे में पड़ गई। क्याेंकि ग्रामीण इलाका हाेने के कारण स्वास्थ्य केंद्र पर ब्लड मिलना मुश्किल था। अरूण ने अपने दाेस्त महेश काछवाल काे स्थिति से रूबरू कराया। महेश तुरंत हाॅस्पिटल पहुंचे अाैर ब्लड ग्रुप की जांच कराई। जांच में महेश का ब्लड ग्रुप अाे-पाॅजिटिव मिला। अरूण ने दाेस्त की बहन के लिए ब्लड डाेनेट कर जिंदगी बचाई। इसके बाद महेश काछवाल हर साल ब्लड डाेनेट करने लगे। वे 37 बार रक्तदान कर चुके है।

डिंपल चौधरी : 67 बार रक्तदान कर चुके पिता से मिली प्रेरणा : काेलीड़ा की डिंपल चाैधरी मेडिकल एग्जाम की तैयारी कर रही हैं। वह अब तक 3 बार रक्तदान कर चुकी हैं। 18 साल की हाेते ही उसने पहली बार ब्लड डाेनेट किया। वह 17 माह में 3 बार रक्तदान कर चुकी हैं। डिंपल कहती हैं कि मैं महिलाअाें से जुड़ा मिथक तोड़ना चाहती हूं कि उनमें खून की कमी हाेती है। डिंपल के लिए रक्तदान करने की सबसे बड़ी प्रेरणा बने उनके पिता। डिंपल के पिता बीएल मील अब तक 67 बार रक्तदान कर चुके हैं।

रक्तदान जरूर कीिजए, क्योंकि... 1 यूनिट डाेनेट करने पर 21 दिन में फिर बन जाता है : डॉक्टर्स का कहना है कि रक्तदान को लेकर लोगों में कई भ्रातियां हैं, जबकि हकीकत इससे अलग है। रक्तदाता से एक बार में 300 से 400 मिली. रक्त लिया जाता है। जो शरीर में उपलब्ध रक्त का लगभग 15 वां भाग होता है। शरीर में रक्तदान के तत्काल बाद दान किए गए रक्त की प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया प्रारंभ हो जाती है। शरीर में प्रवाहित होने वाले आयरन रक्तदान से अप्रभावित रहता है। क्योंकि रक्तदान में दिये गए रक्त के स्थान पर शरीर में संग्रहित रक्त तत्काल आ जाता है। रक्‍तदान के तुरंत बाद आप अपनी सामान्‍य दिनचर्या को दोबारा पा सकते हैं। बशर्ते आप इसके 12 घंटे तक हैवी एक्‍सरसाइज न करें। खून देने के तुरंत बाद ही चहलकदमी न करें। 1 यूनिट ब्लड 21 दिन में बन जाता है।

रक्तदान : संस्थाअाें ने 1 साल में 4335 यूनिट डाेनेट किया, 379 ने स्वैच्छिक रक्तदान किया : एसके हाॅस्पिटल की ब्लड में पिछले एक साल में 73 स्वयंसेवी संगठनाें ने 4335 यूनिट ब्लड डाेनेट किया। स्वयंसेवी संगठनाें ने अलग-अलग जगह कैंप लगाकर रक्तदान किया। 379 जनाें ने सीधे एसके हाॅस्पिटल ब्लड बैंक पहुंचकर स्वैच्छिक रक्तदान किया। इनमें में ज्यादातर वे डाेनर थे, जिन्हें मां-बाप की पुण्य तिथि अाैर बेटे-बेटी के जन्मदिन पर किया। डाेनेशन में मिले ब्लड की सबसे ज्यादा खपत एमसीएच विंग में हुई। 2100 से ज्यादा यूनिट गर्भवती महिलाअाें में डिलीवरी के दाैरान इस्तेमाल हुआ।

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