प्रदेश के ज्यादातर जिलों में कल, लेकिन सीकर में आज मनाएंगे शीतलाष्टमी
शहर में रविवार काे शीतलाष्टमी मनाई जाएगी। अष्टमी तिथि सोमवार को है और प्रदेश में कई स्थानों पर सोमवार को ही शीतलाष्टमी मनाई जाएगी। सीकर में परंपरा है कि जिस वार को होलिका दहन किया जाता है, उस वार को शीतलाष्टमी नहीं मनाई जाती। गोपीनाथ मंदिर के महंत सुरेंद्र गोस्वामी व कल्याण मंदिर के महंत विष्णु प्रसाद शर्मा ने बताया कि हाेली का दहन में अग्नि को महत्व दिया जाता है, जिसके चलते उसी वार को ठंडे पर्व को नहीं मनाया जाता है। शीतला भक्त मण्डल एवं शीतला बाल संघ के सदस्यों ने बताया कि शास्त्रानुसार शीतला अष्टमी सोमवार को आ रही है, लेकिन परंपरा के अनुसार रविवार को ही शीतला माता को ठंडे पकवानों का भोग लगाया जाएगा। रविवार को सुबह 4.25 बजे से सोमवार सुबह 3.18 तक सप्तमी तिथि है। इसके बाद अष्टमी शुरू होगी।
रात 12 बजे से भोग लगाना प्रारंभ, 1.5 क्विंटल फूलों से सजाया मंदिर को
शहर में 150 साल पहले सीकर के पूर्व राजाओं ने माता शीतला के मंदिर की स्थापना कराई। इसे शीतला का बास के नाम से जाना जाता है। पहले मंदिर छोटे रूप में था, बाद में इसको बड़ा किया गया। शीतला चौक के सीताराम दीक्षित ने बताते हैं कि उदयपुरवाटी के पास बागोरा से लाकर प्रतिमा की यहां स्थापना कराई गई थी। विद्या प्रकाश शर्मा ने बताया कि संभवत: यह शहर का इकलौता मंदिर है, जो सड़क से छह से आठ फीट नीचे है।मनोज चौमाल ने बताया कि रविवार काे कल्याण मंदिर की ओर से महंत विष्णु प्रसाद के सानिध्य में शीतल भोग (दिव्य कुण्डारा) मां शीतला को अर्पित किया जाएगा। रात 12 बजे से माता शीतल भाेग लगाना प्रारंभ हाे जाता है। मंदिर परिसर काे गुलाब, गुलजारा, माेगरा, केवड़ा सहित अन्य फूलों की हजारों मालाओं से सजाया गया है। इसमें लगभग 1.5 क्विंटल फूलों का उपयोग किया है।
“वन्देऽहंशीतलांदेवीं रासभस्थांदिगम्बराम्।।
मार्जनीकलशोपेतां सूर्पालंकृतमस्तकाम्।।
अर्थात : गर्दभ पर विराजमान, दिगम्बरा, हाथ में झाड़ू तथा कलश धारण करने वाली, सूप से अलंकृत मस्तकवालीभगवती शीतला की मैं वंदना करता हूं। शीतला माता के इस वंदना मंत्र से पूर्णत:स्पष्ट हो जाता है कि ये स्वच्छता की अधिष्ठात्री देवी हैं। हाथ में मार्जनी यानी झाड़ू होने का अर्थ है कि हम लोगों को भी सफाई के प्रति जागरूक होना चाहिए। कलश से हमारा तात्पर्य है कि स्वच्छता रहने पर ही स्वास्थ्य रूपी समृद्धि आती है।
आधुनिक युग में भी शीतला माता की उपासना स्वच्छता की प्रेरणा देने के कारण सर्वथा प्रासंगिक है। भगवती शीतला की उपासना से स्वच्छता और पर्यावरण को सुरक्षित रखने की प्रेरणा मिलती है।
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शीतला चौक स्थित मंदिर में विराजित प्रतिमा।