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मुकदमा दर्ज होने का तथ्य छिपाकर चुनाव लड़ने की आरोपी दीपा राजगुरु का निर्वाचन शून्य

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 01, 2018, 06:45 AM IST

मुकदमा दर्ज होने का तथ्य छिपाकर चुनाव लड़ने की आरोपी दीपा राजगुरु का निर्वाचन शून्य
जिला एवं सेशन न्यायाधीश का फैसला

पंचायत समिति सदस्य है दीपा

भास्कर न्यूज | सिरोही

पंचायत समिति सदस्य दीपा राजगुरु के निर्वाचन को जिला एवं सेशन न्यायालय ने शून्य घोषित कर दिया है। उनके खिलाफ भाजपा की प्रत्याशी रक्षा भंडारी ने नामांकन के दौरान तथ्य छिपाकर चुनाव लड़ने की चुनाव याचिका दायर की थी। जिला एवं सेशन न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा ने पंचायतराज अधिनियम के तहत दाखिल याचिका की सुनवाई करते हुए गुरुवार को पंचायत समिति सदस्य दीपा राजगुरु के निर्वाचन शून्य घोषित कर दिया। न्यायालय ने भंडारी के अधिवक्ता राजेन्द्र पुरी की दलीलों से सहमत होते हुए उस वार्ड से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में विजयी घोषित की गई दीपा राजगुरु के निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया। इस आदेश के बाद अब पंचायत समिति सदस्य के रूप में दीपा राजगुरु सिरोही पंचायत समिति की किसी गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकेंगी। राजस्थान में पंचायत राज चुनावों के दौरान वर्ष 2015 में सिरोही पंचायत समिति के 17 वार्डों के पंचायत समिति सदस्यों के लिए मतदान हुए। सामान्य महिला के लिए आरक्षित पंचायत समिति के वार्ड संख्या 7 से भाजपा की प्रत्याशी रक्षा भंडारी, कांग्रेस प्रत्याशी चंद्रकला और निर्दलीय प्रत्याशी दीपा राजगुरु चुनाव मैदान में थे। 5 फरवरी 2015 को हुई मतगणना में दीपा राजगुरु को इस वार्ड से 626 मतों से विजयी घोषित किया गया था। उन्हें 1761 ओर निकटतम प्रतिद्वंद्वी रक्षा भंडारी को 1153 मत मिले थे। चुनाव के बाद रक्षा भंडारी ने इस संदर्भ में वाद दायर किया कि दीपा राजगुरु ने नामांकन के दौरान पेश किए गए अपने शपथ पत्र में पंचायत राज अधिनियम के तहत निर्धारित शर्तों से संबंधित कुछ तथ्य छिपाए।

दीपा राजगुरू के खिलाफ मुकदमा विचाराधीन होने के बावजूद नामांकन में तथ्य को छिपाया : दीपा राजगुरु के खिलाफ नामांकन दाखिल के समय दीपा राजगुरू के खिलाफ अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा विचाराधीन था, लेकिन उन्होंने नामांकन पत्र में उसका जिक्र नहीं किया।

दीपा के अधिवक्ता ने मामले को राजनीति से प्रेरित होने की दी थी दलील : न्यायालय में सुनवाई के दौरान राजगुरु के अधिवक्ता ने उक्त मामले को राजनीति प्रेरित मामला बताते हुए यह दलील दी कि बाद में इस प्रकरण से उन्हें दोषमुक्त कर दिया गया था। लेकिन, न्यायालय ने इस दलील को खारिज करते हुए यह माना कि नामांकन वाले दिन दीपा राजगुरु पर एक से पांच वर्ष तक की सजा के प्रकरण में चार्ज सुना दिए गए थे। न्यायालय ने यह भी कहा कि राजगुरु ऐसी कोई भी दलील पेश नहीं कर पाई जिससे यह माना जाए कि नामांकन के दौरान किसी प्रकरण के विचाराधीन होने और बाद में उससे दोषमुक्त होने पर निर्वाचन शून्य नहीं घोषित किया जा सकता। ऐसे में दोनों पक्षों को सुनने के बाद जिला एवं सेशन न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा ने दीपा राजगुरु के निर्वाचन को शून्य घोषित कर दिया है।

यह अंतिम कोर्ट या फैसला नहीं

ना तो ये कोर्ट अंतिम है और ना ही ये फैसला। परिवादी रक्षा भंडारी स्वयं न्यायालय में मनोनीत सदस्य है और उसने अपने पद का दुरुपयोग किया है। मैं इस फैसले को ऊपरी कोर्ट में चुनौती दूंगी। जनता ने जनादेश दिया है, फिर आगामी चुनाव में जनता के पास जा सकती हूं। -दीपा राजगुरु

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Web Title: मुकदमा दर्ज होने का तथ्य छिपाकर चुनाव लड़ने की आरोपी दीपा राजगुरु का निर्वाचन शून्य
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