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महोत्सव का समापन, देश की संस्कृति और इतिहास पर चर्चा

सिरोही. कार्यक्रम में मौजूद लोग। सिरोही | राजस्थान संस्कृत अकादमी जयपुर के सहयोग से एसपी कॉलेज सिरोही में माघ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 02, 2018, 07:25 AM IST

सिरोही. कार्यक्रम में मौजूद लोग।

सिरोही | राजस्थान संस्कृत अकादमी जयपुर के सहयोग से एसपी कॉलेज सिरोही में माघ महोत्सव का समापन एवं अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। अमेरिका के साउथ विश्वविद्यालय न्यू ओरलियन्स के प्रोफेसर डॉ. विभाकर दवे ने कहा कि आज भी अमेरिका में गीता और महाभारत को आदर की दृष्टि से पढ़ा जाता है। विश्व का सारा आध्यात्मिक ज्ञान इनमें निहित है। उदयपुर विश्वविद्यालय के प्रो.विजय श्रीमाली ने कहा कि माघ और राजाभोज में घनिष्ट मित्रता थी, दोनों ही दान के लिए विख्यात रहे है। उन्होंने माघ की अमर कृति शिशुपाल वध के महाकाव्य पर चर्चा करते हुए कहा कि विश्व में फैलते आतंकवाद के परीपेक्ष्य में शिशुपालवधम समसामयिक ग्रंथ है। मुख्य वक्ता बड़ोदरा की डॉ.गार्गी चंद्रशेखर पंडित ने माघ के ग्रंथ शिशुपालवधम का उदाहरणों सहित विवेचन किया। संगोष्ठी में जोधपुर, पाली, सिरोही, मुंबई, भीनमाल, जालौर और गुजरात के सोमनाथ, सूरत, राजकोट, डीसा और बड़ोदरा के विद्वानों ने अपने शोध पत्र प्रस्तुत किए। डॉ. वीके त्रिवेदी ने सभी विद्वानों का स्वागत किया। आशुतोष पटनी ने आभार व्यक्त किया। संगोष्ठी में श्रीमाली ब्राह्मण समाज सेवा संस्थान के पदाधिकारी और गणमान्य नागरिक मौजूद थे। संगोष्ठी के समापन में श्रीमाली ब्राह्मण समाज सेवा संस्थान के अध्यक्ष जगदीश ओझा ने राजस्थान संस्कृत अकादमी के प्रति आभार व्यक्त किया। इस मौके आदर्श को ऑपरेटिव बैंक के नरेंद्रसिंह डाबी, शिवलाल नागर, नंदकिशोर सोनी, पूर्व प्राचार्य प्रो. केएम जैन, गुलाबराम समेत कॉलेज के प्राध्यापक मौजूद थे।

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