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गंदे पानी के मामले में प्रदर्शन करने वाले भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष ने दिया इस्तीफा

भाजपा के सिरोही मंडल अध्यक्ष सुरेश सगरवंशी ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि सगरवंशी ने इसका कोई...

Danik Bhaskar | Apr 17, 2018, 06:10 AM IST
भाजपा के सिरोही मंडल अध्यक्ष सुरेश सगरवंशी ने सोमवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। हालांकि सगरवंशी ने इसका कोई कारण नहीं बताया, लेकिन उन्होंने कहा कि समय नहीं दे पाने के कारण वे इस्तीफा दे रहे हैं। हालांकि हकीकत यह है कि सगरवंशी भाजपा के हर कार्यक्रम में सबसे आगे रहते हैं। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ महीनों से एक के बाद एक अवसरों पर पार्टी में अपनी अनदेखी और सुनवाई नहीं होने से आहत होकर सगरवंशी ने इस्तीफा दिया है। इनमें सबसे बड़ा मामला पिछले साल सितंबर-अक्टूबर में शहर में गंदे पानी की सप्लाई का मामला है। यह मामला सामने आने के बाद सगरवंशी ने ही सबसे पहले जलदाय विभाग के खिलाफ प्रदर्शन किया था। जब वे शहर के कुछ नागरिकों व महिलाओं के साथ जलदाय विभाग पहुंचे थे तो उनके खिलाफ ही राजकार्य में बाधा का मामला दर्ज करवाया गया था। विभाग के अधिकारियों ने रिपोर्ट में प्रदर्शन करने वालों को असामाजिक तत्व तक कहा था। इसके बाद सगरवंशी की ओर से भी विभाग के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई थी। मामला बढ़ा तो कलेक्टर की मौजूदगी में दोनों पक्षों के बीच समझौता करवाया गया था। तब से ही पार्टी में यह भी मांग उठी थी कि जनहित के मुद्दे उठाने के बावजूद राजकार्य में बाधा का झूठा मामला दर्ज करवाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन फिर हुआ कुछ नहीं। अब सगरवंशी के इस्तीफा देने से वापस यह चर्चाएं शुरू हो गई हैं कि पार्टी में जमीनी कार्यकर्ताओं की लगातार अनदेखी से नाराजगी बढ़ रही है। सोशल मीडिया पर चल रही खबरों के मुताबिक भाजपा जिलाध्यक्ष लूंबाराम चौधरी ने कहा कि वे कुछ समय से कह रहे थे कि समय नहीं दे पा रहा हूं। इसलिए नया अध्यक्ष चुन लें। मैंने उन्हें लिखकर देने को कहा था। लिखित में इस्तीफा दिया है। प्रदेश संगठन को भेज दिया गया है।

संभवत : इसलिए दिया इस्तीफा

शहर में गंदे पानी की सप्लाई का मुद्दे पर प्रदर्शन के दौरान सगरवंशी के खिलाफ राजकार्य में बाधा का मामला दर्ज हुआ था। अप्रत्यक्ष रूप से उन्हें असामाजिक तत्व कहा गया। मामले में सगरवंशी ने अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की थी। तब उन्हें भरोसा दिया था कि पंचायतों के उपचुनाव के कारण अभी तबादला नहीं कर सकते। बाद में देखेंगे। अब छह माह बीतने के बावजूद मामले में कोई कार्रवाई नहीं हुई। ऐसे में सगरवंशी नाराज बताए जा रहे हैं। इसी मामले में सगरवंशी कुछ दिन पूर्व एक प्रदेश स्तरीय पदाधिकारी से भी मिले, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला।

हर कार्यक्रम में आगे इसलिए समय नहीं मिलने की बात हकीकत नहीं

इस्तीफा देने के बार सगरवंशी ने कहा कि उन्हें समय नहीं मिल पाता है। इसलिए इस्तीफा दे रहे हैं, जबकि हकीकत यह है कि सगरवंशी पार्टी की बैठक हो या किसी मंत्री का दौरा या प्रदेश स्तर से कोई कार्यक्रम के निर्देश, इन सभी में सक्रिय रहते हैं। इसलिए समय नहीं मिल पाने की बात किसी के भी गले नहीं उतर रही है।