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कम नंबर वाले छात्रों को जिला प्रमुख का पत्र, कहा- घबराएं नहीं, फिर मेहनत करें / कम नंबर वाले छात्रों को जिला प्रमुख का पत्र, कहा- घबराएं नहीं, फिर मेहनत करें

Bhaskar News Network

May 28, 2018, 06:10 AM IST

Sirohi News - परीक्षा परिणाम जारी होने के बीच जिला प्रमुख पायल परसरामपुरिया ने की पहल, कम नंबर लाने वाले छात्र छात्राओं के लिए...

कम नंबर वाले छात्रों को जिला प्रमुख का पत्र, कहा- घबराएं नहीं, फिर मेहनत करें
परीक्षा परिणाम जारी होने के बीच जिला प्रमुख पायल परसरामपुरिया ने की पहल, कम नंबर लाने वाले छात्र छात्राओं के लिए लिखा पत्र

भास्कर न्यूज | सिरोही

इन दिनों जारी हो रहे परीक्षा परिणामों के बीच जिला प्रमुख पायल परसरामपुरिया ने एक अलग पहल करते हुए इस बात पर जोर दिया है कि परीक्षा में कम अंक लाने वाले स्टूडेंट्स को मोटिवेट किया जाए। उन्हें यह बताया जाए कि किसी एक परीक्षा में कम नंबर आने का मतलब यह कतई नहीं होता कि आप पीछे रह गए या आप कमजोर हैं। बल्कि यह समय ऐसा समय होता है जब आपको दुगुनी मेहनत कर आगे बढ़ना चाहिए। जिला प्रमुख ने इसके लिए कलेक्टर व जिला शिक्षा अधिकारी को एक पत्र भेजकर कहा कि हमें इस समय उन सभी बच्चों को मोटिवेट करना चाहिए जिनके नंबर कम आए हैं। उन्हें कैरियर की जानकारी देनी चाहिए। उन्हें बताना चाहिए कि उनके पास कई विकल्प मौजूद हैं और कुछ नंबर कम आ जाने से जीवन की सफलता या असफलता तय नहीं होती बल्कि यह आपके सुदृढ़ इरादों और मेहनत पर तय करता है कि कैसे विपरित परिस्थितियों में भी आप आगे बढ़ सकते हैं। जिलाप्रमुख ने बताया कि नतीजे घोषित होने के बाद मेघावी विद्यार्थियों को हर तरह से तवज्जो दी जाती है जो जरूरी भी है। लेकिन, हम उन विद्यार्थियों को भूल जाते है जो परीक्षाओं में अच्छे अंक नहीं ला सकें। ऐसे विद्यार्थियों के लिए यह समय बेहद कठिन होता है, जिसके लिए हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम समग्र रूप से उनका मार्गदर्शन कर उन्हें भविष्य के लिए तैयार करें। ऐसा करने से उनके मन में उठने वाले नकारात्मक विचारों को दूर किया जा सकता है।

इसलिए लिखा पत्र

जिला प्रमुख ने इस पत्र के लिए बताया कि हर साल परीक्षा परिणाम जारी होते हैं। बच्चे इससे पहले ही काफी अपेक्षा लगाए रहते हैं। अभिभावकों का उन पर दबाव होता है। वे एक एक दो दो नंबर का कंपीटिशन करते हैं। भारी दबाव में परीक्षा देते हैं और कई बार उनकी अपेक्षा के अनुरुप परिणाम नहीं आ पाता। इस स्थिति में अभिभावक भी उनकी मन स्थिति को नहीं समझते और उन पर गुस्सा होते हैं। जिसके गलत परिणाम भी सामने आते हैं। इसलिए जरुरी है कि हम समय रहते बच्चों की मन स्थिति को समझे और भले ही वह कैसे भी अंक लेकर आया हो। उसे आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करें।

विशेषज्ञों से की बात

जिलाप्रमुख ने बताया कि उन्होंने कई विशेषज्ञों से बात भी की है जो लोग इस क्षेत्र काफी समय से काम कर रहे हैं। उनके सुझाए क्षेत्र में गए तरीकों से हम ऐसे विद्यार्थियों का मॉटिवेशन कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जरुरत पड़ने पर वे खुद भी ऐसे बच्चों की मदद के लिए तैयार हैं। साथ ही उन्होंने सभी अध्यापकों व प्रधानाध्यापकों से भी अपील की कि वे बच्चों को मोटिवेट करें।

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