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6 माह बाद आईसीयू और बर्न यूनिट को शुरू करने की तैयारी, इस बार आरसीसी से भर रहे एआरटी सेंटर की नींव

सिरोही. एआरटी सेंटर में काम शुरू होने से वार्डों तक जाने के लिए ऑपरेशन थिएटर के पास वैकल्पिक मार्ग खोला गया। 2011...

Bhaskar News Network | Last Modified - Jun 11, 2018, 06:15 AM IST

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    सिरोही. एआरटी सेंटर में काम शुरू होने से वार्डों तक जाने के लिए ऑपरेशन थिएटर के पास वैकल्पिक मार्ग खोला गया।

    2011 में बना था एआरटी भवन, 2013 में आईसीयू व बर्न यूनिट

    एआरटी सेंटर का भवन 2011 में बना था। जबकि, एआरटी सेंटर के उपर आईसीयू व बर्न यूनिट 2013 में बने थे और जनवरी 2015 में तत्कालीन चिकित्सा मंत्री राजेंद्र सिंह राठौड़ ने दोनों यूनिट का लोकार्पण किया था। पिछले साल भारी बारिश की वजह से एआरटी भवन के नीचे की मिट्टी फुलने से फर्श धंस गई थी और उपर बने आईसीयू व बर्न यूनिट की दीवारों में भी दरारें आई थी। अस्पताल प्रशासन ने मरीजों की सुरक्षा के लिए तीनों महत्त्वपूर्ण वार्ड बंद किए थे। लेकिन, इससे मरीजों के लिए परेशानी बढ़ गई है। क्योंकि, इससे जुड़ी मशीनरी वार्डों में कैंद है।

    इंजीनियर्स ने बताया था असुरक्षित

    दिसंबर 2017 के आखिरी सप्ताह में यह मामला सामने आया। पीएमओ डॉ. दर्शन ग्रोवर ने तत्काल कलेक्टर संदेश नायक को इससे अवगत कराया। कलेक्टर ने पीडब्ल्यूडी व एनआरएचएम इंजीनियर को मौके पर भेजा। इंजीनियर्स ने मौका देखकर एआरटी सेंटर, आईसीयू व बर्न यूनिट को असुरक्षित बताते हुए बंद करने को कहा। अस्पताल प्रशासन ने जनवरी के पहले सप्ताह में तीनों वार्डों को बंद कर दिया, तब से बंद ही है।

    जानिए, मरीजों के लिए कितनी जरूरी है तीनों यूनिट

    एआरटी सेंटर

    इसमें एड्स के मरीजों का इलाज और काउंसलिंग होती है। एआरटी सेंटर में अलग-अलग कक्ष बनाए गए है, जिसमें बैठे काउंसलर मरीजों के हिसाब से उनकी काउंसलिंग करते हैं। ऐसे मरीजों की गोपनियता भंग न हो, इसके लिए सरकार ने यह व्यवस्था लागू की है।

    परेशानी अब इस सेंटर को केवल एक कक्ष में शिफ्ट किया है, जहां मरीज की काउंसलिंग गोपनीयता भंग होने का संभावना बनी हुई है।

    आरसीसी से तैयार की जा रही है एआरटी सेंटर की नींव

    एआरटी सेंटर की नींव की कमजोर मिट्टी को हटाकर आरसीसी से तैयार किया जा रहा है। एनआरएचएम की ओर से किया जा रहा है। काम शुरू हो चुका है और एआरटी सेंटर के पास से जा रहे मार्ग को बंद करके ऑपरेशन थिएटर के पास वैकल्पिक मार्ग खोला गया है। शीघ्र ही आईसीयू व बर्न यूनिट को शुरू किया जाएगा। -डॉ. दर्शन ग्रोवर, पीएमओ, जिला अस्पताल, सिरोही

    दैनिक भास्कर ने ही मरीजों से जुड़े इस खास मुद्दे को प्रमुखता से उठाया था। भास्कर ने 3 जनवरी को च्एआरटी सेंटर में धंस रहा फर्श, जिला अस्पताल में आईसीयू व बर्न यूनिट दूसरे वार्डों में शिफ्टज् शीर्षक से समाचार प्रकाशित इस मामले को सामने आया था। इसके बाद 12 अप्रैल को च्एआरटी सेंटर की फर्श धंसने का नतीजा, तीन माह से आईसीयू और बर्न यूनिट बंदज् शीर्षक से समाचार प्रकाशित कर मरीजों की परेशानी का सामने लाया था। इसके बाद प्रशासन हरकत में आया और बारिश से पहले काम शुरू किया।

    आईसीयू

    एक करोड़ की अधिक लागत से बने इस वार्ड में गंभीर रोगियों को भर्ती किया जाता है। वार्ड में अलग-अलग कक्ष बने हुए है। प्रत्येक कक्ष में कॉर्डियेक मॉनिटर, डी फ्रीब्रीलेटर, एयरकंडीनशर, वेंटिलेटर और ईसीजी स्थापित है। बेड साइड ऑक्सीजन सप्लाई प्लांट लगा है, ताकि मरीज को ऑक्सीजन देने के लिए बार-बार सिलेंडर लाने की जरूरत न पड़े।

    परेशानी अब सामान्य वार्डों में आईसीयू के मरीज भर्ती करने से उनके लिए विशेष इंतजाम नहीं हो सकेंगे। मशीनरी भी काम नहीं आ रही।

    भास्कर ने उठाया था मुद्दा

    बर्न यूनिट

    आग से जलने वाले मरीजों के इलाज के लिए जिला अस्पताल में यह यूनिट स्थापित की गई थी। आईसीयू में काम आने वाले अधिकतर संसाधन बर्न यूनिट में भी काम आते हैं। इसलिए सरकार ने दोनों वार्डों को आसपास बनाए थे।

    परेशानी अब सर्जिकल वार्ड में स्थापित होने से बर्न यूनिट ऐसी सुविधा नहीं मिल सकेगी। 50 फीसदी से अधिक जले मरीज से वार्ड में भर्ती अन्य मरीजों में संक्रमण का खतरा बना हुआ है।

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