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- Abu Road News Rajasthan News The Story Of The Youth Congress Activist In 1990 The Vice President Of The Yc Became The President In 2003 Lost The Assembly Elections 3 Times Now Became The Rajya Sabha Candidate
कहानी युवक कांग्रेस के कार्यकर्ता की... 1990 में युकां के उपाध्यक्ष, 2003 में अध्यक्ष बने, 3 बार विधानसभा चुनाव हारे, अब राज्यसभा प्रत्याशी बने डांगी
राजस्थान युवक कांग्रेस के पूर्व प्रदेशाध्यक्ष व प्रदेश कांग्रेस के महासचिव नीरज डांगी राज्यसभा में कांग्रेस के उम्मीदवार होंगे। उनके नाम पर गुरुवार को केंद्रीय नेतृत्व ने मोहर लगा दी। इस दौड़ में प्रदेश के कई नेता भी कतार में थे, लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अटूट विश्वास और कुशल वक्ता होने पर डांगी पर भरोसा जताया। लंबी जद्दोजहद के बाद कद्दावर नेता केसी वेणुगोपाल के साथ ही उनके नाम को हरी झंडी दे दी गई।
जानकारी के अनुसार 26 मार्च को होने वाले राज्यसभा चुनाव को लेकर कई नेताओं की निगाह इस सीट पर टिकी हुई थी। केंद्र में राजनीति करने वाले नेता भी दोनों सीटों के लिए अपना नाम आगे बढ़ा रहे थे। गुरुवार दोपहर अचानक ही नीरज डांगी का नाम सामने अाया अाैर शाम होते-होते उनके नाम की घोषणा कर दी गई। इससे पहले केसी वेणुगोपाल के नाम पर ही चर्चा हाेती रही, मगर देर शाम डांगी के नाम पर भी सहमति बन गई। बताया जाता है कि राज्यसभा में एक सीट दलित वर्ग को देने के लिए आला नेताओंं में एकराय हुई थी। इसमें भी कई नामों पर विचार हुआ, मगर डांगी के नाम को महत्व दिया गया। डांगी ने बताया कि यूथ कांग्रेस में काफी काम किया है, महासचिव के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली है।
पिता 1962 से 90 तक देसूरी से विधायक रहे, मंत्री भी थे
नीरज डांगी के भाई दिवाकर डांगी के अनुसार साल 1962 से 1990 तक उनके पिता दिनेशराय डांगी देसूरी से विधायक रहे हैं। इस दौरान वे एक बार निर्विरोध निर्वाचित होने के साथ ही तीन बार मंत्री भी रहे। उनके निधन के बाद साल 2004 में नीरज डांगी ने पहली बार यहां से विधानसभा चुनाव लड़ा था। डांगी की प|ी प्रीति ने बताया कि नीरज खुद सिविल इंजीनियर के साथ व्यवसायी है। वे साल 1990 से 2000 तक यूथ कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष रहे व साल 2004 में प्रदेशाध्यक्ष रहते हुए पहली बार चुनाव लड़ा। उनकी प|ी होम्योपैथिक डॉक्टर है।
राज्यसभा का टिकट मिलने पर कार्यकर्ताओंं ने की आतिशबाजी
कांग्रेस के जनरल सचिव मुकुल वासनिक द्वारा गुरुवार देर शाम राज्यसभा के लिए राजस्थान से केसी वेणुगोपाल व नीरज डांगी सहित नौ प्रत्याशियों के नामों की घोषणा करते ही शहर में उनके समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। नीरज डांगी के पक्ष में नारेबाजी करते हुए रैली निकाली गई। नगर कांग्रेस कमेटी कार्यालय एवं रेलवे स्टेशन तिराहा पर पटाखे फोड़कर एवं मुंह मीठा करवाकर कार्यकर्ताओंं द्वारा एक-दूसरे को बधाइयां दी। नगर कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष अमित जोशी, यूथ कांग्रेस जिला महासचिव भवनीश बारोट, नवीन सांखला व माधव मारु आदि के साथ मौजूद रहे।
55 साल बाद सिरोही को दूसरी बार मौका, पहली बार डॉ. शांतिलाल कोठारी चुने गए थे राज्यसभा सांसद, अब डांगी के लिए बनाया रास्ता
सिराेही काे 55 साल बाद दूसरी बार राज्यसभा की दावेदारी मिली है। इससे पूर्व 1964 में डॉ. शांतिलाल कोठारी को राज्यसभा का टिकट मिला था और 1970 तक उन्होंने जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वे विधायक भी रहे। पार्टी पदाधिकारियों के अनुसार डॉ. कोठारी इंदिरा गांधी के काफी नजदीकी थे। अब 55 साल बाद दूसरी बार सिरोही को मौका मिलेगा।
राहुल, मीरा कुमार, सीएम गहलोत और कुमारी
शैलजा के खास, 3 चुनाव हारे, फिर भी दिया मौका
ऐसा माना जाता है कि नीरज डांगी राहुल गांधी और कुमारी शैलजा के साथ ही सीएम अशोक गहलोत के भी काफी करीबी हैं। उन्हाेंने 2004 में देसूरी से पहली बार विधायक का चुनाव लड़ा था। उस समय वे युवक कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष थे, लेकिन अपनी चचेरी बहन लक्ष्मी बारूपाल से चुनाव हार गए। इसके 2008 में दूसरी बार सीएम गहलोत ने उन्हें रेवदर से उतारा। राहुल गांधी से नजदीकियों का इससे साफ पता चलता है कि साल 2008 के विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने आबूरोड में मूंगथला के समीप उनके समर्थन में एक जनसभा को संबोधित किया था, लेकिन यहां भी वे चुनाव हार गए। 2018 के विधानसभा चुनावों में राहुल गांधी ने यह तय कर दिया था कि दो बार से अधिक चुनाव लड़ने वालों को मौका नहीं मिलेगा। फिर भी सीएम गहलोत और राहुल गांधी के करीबी हाेने पर उन्हें फिर से रेवदर से टिकट दिया, लेकिन यहां भी उनको तीसरी बार हार मिली।
राहुल गांधी के साथ कांग्रेस नेता डांगी। -फाइल फोटो