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चुनाव ड्यूटी से बचने के लिए खुद को बताया गंभीर बीमार

चुनाव ड्यूटी लगने के बाद उससे बचने वाले कर्मचारियों के प्रति इस बार जिला प्रशासन सख्त हो गया है। जिला प्रशासन ने...

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 09:16 AM IST
Sirohi - told to avoid election duty seriously ill
चुनाव ड्यूटी लगने के बाद उससे बचने वाले कर्मचारियों के प्रति इस बार जिला प्रशासन सख्त हो गया है। जिला प्रशासन ने विधानसभा चुनाव में 741 मतदान केंद्रों के लिए कुल 3556 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है। जिसमें से 20 फीसदी यानी 592 कर्मचारियों को आरक्षित रखा है। चुनाव ड्यूटी में लगे 2964 कर्मचारियों में से 75 कर्मचारियों ने खुद को गंभीर बीमार बताया तथा जिला निर्वाचन अधिकारी अनुपमा जोरवाल को प्रार्थना पत्र देकर चुनाव ड्यूटी से मुक्त रखने का आग्रह किया। प्रार्थना पत्र में कर्मचारियों ने अजब-गजब बीमारी बताकर खुद को चुनाव ड्यूटी के लिए असक्षम बताया। जिला निर्वाचन अधिकारी ने जिला अस्पताल के पीएमओ डॉ. दर्शन ग्रोवर को इन कर्मचारियों की मेडिकल बोर्ड से जांच कराने को कहा। जिला अस्पताल में कार्यरत विशेषज्ञों ने दो दिन में 75 कर्मचारियों का मेडिकल किया, जिसमें 30 कर्मचारी फिट साबित हुए और 35 अनफिट निकले। जबकि, 7 कर्मचारी मेडिकल कराने ही नहीं पहुंचे। कर्मचारियों ने मुंह का कैंसर, लकवा, मोटापा, पुरानी चोट, स्लिपडिस्क, ज्वाइंट रिप्लेस, आंखों से कम दिखना, किडनी व लीवर की बीमारी, मानसिक आदि गंभीर बीमारियां बताई। स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की जांच में ड्यूटी से बचने के लिए कर्मचारियों की बीमारी का झूठ पकड़ में आ गया।

75 कर्मचारियों ने खुद को गंभीर बीमार बताकर चुनाव ड्यूटी से मुक्त करने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी को दिया प्रार्थना पत्र



3556 कर्मचारियों की लगाई ड्यूटी

पदनाम कर्मचारी आरक्षित

पीठासीन अधिकारी 741 148

मतदान अधिकारी प्रथम 741 148

मतदान अधिकारी द्वितीय 741 148

मतदान अधिकारी तृतीय 741 148

कुल 2964 592

(जिले में कुल 741 मतदान केंद्र है। 20 प्रतिशत कर्मचारी आरक्षित रखे गए है।)

पहली बार जिला प्रशासन ने करवाई कर्मचारियों की मेडिकल बोर्ड से जांच

जिला प्रशासन विभिन्न विभागों में कार्यरत सरकारी कर्मचारियों की चुनाव ड्यूटी में लगाता है। कई कर्मचारी ऐसे है जो चुनाव ड्यूटी नहीं करना चाहते, इसलिए जब भी चुनाव में ड्यूटी लगती है कोई न कोई बहाना बनाकर उससे मुक्त हो जाते हैं। अधिकतर कर्मचारी खुद को बीमार बताकर अपनी ड्यूटी कैंसिल करवा देते हैं, लेकिन इस बार जिला प्रशासन ने ऐसे कर्मचारियों की मेडिकल बोर्ड से जांच करवाई। जांच में कर्मचारियों के बीमारी का झूठ पकड़ में आ गया।

अजब-गजब बीमारी का बहाना, मेडिकल बोर्ड से सच आया सामने

कर्मचारियों ने चुनाव ड्यूटी से बचने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी को दिए प्रार्थना पत्र में अजब-गजब की बीमारी का बहाना बनाया। कर्मचारियों ने मुंह का कैंसर, लकवा, मोटापा, पुरानी चोट, स्लिपडिस्क, ज्वाइंट रिप्लेस, आंखों से कम दिखना, किडनी व लीवर की बीमारी, मानसिक आदि गंभीर बीमारियां बताई। विशेषज्ञ डॉक्टरों की जांच में कर्मचारियों की बीमारी का झूठ पकड़ में आ गया। मेडिकल बोर्ड में फिजिशियन डॉ. वीरेंद्र महात्मा, सर्जन डॉ. दिनेश राठौड़, ऑर्थोपेडिक डॉ. मोहनलाल निठारवाल, नेत्ररोग विशेषज्ञ डॉ. सुनीता थरेजा, मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. जयप्रकाश कुमावत को शामिल किया गया था।

मेडिकल बोर्ड से जांच हुई तो 50 प्रतिशत कर्मचारी मिले स्वस्थ

जिला निर्वाचन अधिकारी को सौंपी रिपोर्ट


कार्रवाई के लिए उच्चाधिकारी को भेजेंगे रिपोर्ट


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