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शुभ मुहूर्त में होलिका दहन, अबीर-गुलाल लगाकर खेली होली, चंग की थाप पर गेरियों ने किया नृत्य

सोजत | धुलंडी पर चारभुजा मन्दिर में फागोत्सव के बाद गैर रवाना हुई जो फाल्गुनी गीत गाते हुए मोदियों के बास में...

Bhaskar News Network | Last Modified - Mar 04, 2018, 04:25 AM IST

शुभ मुहूर्त में होलिका दहन, अबीर-गुलाल लगाकर खेली होली, चंग की थाप पर गेरियों ने किया नृत्य
सोजत | धुलंडी पर चारभुजा मन्दिर में फागोत्सव के बाद गैर रवाना हुई जो फाल्गुनी गीत गाते हुए मोदियों के बास में पहुंची, जहां पर सीताराम महाराज को होली खिलाई गई। तत्पश्चात दोपहर में आऊवों के बास से गांव गैर रवाना हुई जो पावटा पर जाकर विसर्जित हुई। इससे पूर्व गुरूवार को शुभ मुहूर्त में होली दहन किया गया। शाम को पारम्परिक रूप से घांची समाज, माली समाज, सीरवी समाज, चौकीदार समाज की गेरे अपने अपने नियत स्थानों से रवाना होकर सोजत के ऐेतिहासिक दुर्ग पर पहुंची, जहां सजे-धजे गेरियों ने चंग व ढोल की थाप पर गैर नृत्य की प्रस्तुति दी। इस मौके कोट का मोहल्ला में पालिका की आेर से पालिकाध्यक्ष मांगीलाल चौहान की अगुवाई में गुलाल उड़ा कर गेरियों का स्वागत किया गया। इस मौके पालिका उपाध्यक्ष जुगलकिशोर निकुंम, पार्षद टोनू चौहान, घनश्याम, विकास टांक, रामअवतार भाटी, माणकराज चौहान, ताराचंद भाटी, सुरेश सुराणा सहित कई नागरिक उपस्थित थे।

दूसरे दिन शुक्रवार को धुलंडी पर खूब उड़ी अबीर-गुलाल

भास्कर न्यूज.सोजत | जैतारण बाली फालना सांडेराव रायपुर देसूरी

प्रेम, भक्ति और सामाजिक समरसता का प्रतीक होली का पर्व जिले में उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। लोगों ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल से तिलक लगाकर होली की शुभकामनाएं दी। गुरुवार रात शुभ मुहूर्त पर शहर में विभिन्न स्थानों पर वेद मंत्रोच्चार के साथ पूजा-अर्चना के बाद होलिका दहन किया गया। होलिका दहन होने से पूर्व महिलाओं और पुरुषों ने होलिका की पूजा करते हुए तिल, जौ, माला और नारियल चढ़ाया। दहन के समय प्रहलाद को होलिका से बाहर निकालने की भी होड़ खूब रही। शुक्रवार को धुलंडी के दौरान चंग की थाप पर निकले गेरियों ने धइड़ो धइड़ो की आवाज में जमकर धूम मचाई। इधर, रायपुर मारवाड़, सांडेराव, देसूरी, घाणेराव, तखतगढ, आनंदपुर कालू, जाडन सहित बलवना, बूसी, निंबाडा, सोमेसर, टेवाली, फालका, डिगरना, किरवा, गुडा एंदला, बालराई, चांदवा, नया गुडा, देवली कलां, मुंडारा, शिवतलाव, मालारी, चांचौड़ी, खराेकड़ा, नादाना, बेड़ा, काकराड़ी सहित जिले भर में होली को लेकर उत्साह चरम पर रहा।

बैंडबाजों के साथ घोड़ी पर बैठकर निकले नौनिहाल

धुलंडी के दिन जिलेभर में ढूंढ़ोत्सव की धूम रही। नौनिहालों को बैंड बाजों के साथ धूमधाम से ढूंढ़ाया गया। इस दौरान नौनिहालों को दूल्हे की तरह तैयार घोड़े पर सवार कर गाजे बाजे के साथ होलिका दहन स्थल पर लाकर फेरी लगवाई गई।

9 हजार नारियल व 151 किलो अगरबत्ती जला मनाई होली

सांडेराव | प्राचीन तीर्थ श्रीनिम्बेश्वर महादेव मंदिर परिसर में गुरुवार शाम ट्रस्ट अध्यक्ष जगतसिंह राणावत के सानिध्य में चढावे में आए 8996 नारियलों के साथ 151 किलो अगरबत्ती जलाकर होलिका पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया। इधर, आऊवा गांव में होली महोत्सव देखने बड़ी संख्या में विदेशी मेहमान भी पहुंचे। राजपुरोहित समाज द्वारा गैर नृत्य की प्रस्तुति दी गई।

होलिका दहन से पूर्व महिलाओं और पुरुषों ने होलिका की पूजा

रायपुर मारवाड़ में निकाली गेर

रायपुर मारवाड़ | श्रीमाली गेर मंडल की ओर से महालक्ष्मी मंदिर से गैर निकाली गई। गेर में मनीष श्रीमाली, संदीप व्यास, घनश्याम वैष्णव ने एक से बढ़कर एक फाग गीतों की प्रस्तुतियां दी। इस मौके मंडल संयोजक पुष्पदंत त्रिवेदी, ओम पुरोहित, विक्रम श्रीमाली, हेमंत त्रिवेदी, शुभम व्यास, सुनील व्यास, लोकेश, विमल लोढ़ा, पप्पू दमामी समेत विभिन्न समाजों के लोग मौजूद थे।

भंदर गांव में ईलोजी का मेला भरा

भाटूंद. समीपवर्ती गांव भंदर मे ईलोजी का मेला शनिवार को भरा गया। गैर नृत्य का भी आयोजन हुआ। सैकड़ों लोगों ने ईलोजी से खुशहाली की कामना की। पूरे गांव में ईलोजी की बंदौली भी निकाली गई। मेले में लोगों ने खरीददारी भी की। मेला संचालन में ग्राम पंचायत तथा ग्रामीणों का सहयोग रहा।

सोजत में धुलंडी पर गेरियों ने मचाई धमचक, किले पर उमड़ा नागरिकों का सैलाब

कीरवा | गांव में होली के अवसर पर बच्चे को ढूंढते गेरिए। फोटो|भास्कर

बूसी में मौजीराम का विवाह महोत्सव संपन्न

बूसी | कस्बे के विख्यात मौजीराम व मौजनी देवी का विवाह महोत्सव शुक्रवार शाम को संपन्न हुआ। भगवान शिव के रूप में मौजीराम व पार्वती के स्वरूप मौजनी देवी के अनूठे विवाह महोत्सव में कस्बे सहित आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। शुक्रवार शाम 8 बजे ओडवारियों के वास में स्थित मौजीराम की पूजा-अर्चना कर गालियां गाते हुए बारात रवाना हुई। सोनारों के वास में मौजीराम को आभूषण पहनाए और बारात स्थानीय रावल पहुंची, जहां मौजीराम का स्वागत किया गया। रावले के बाहर मौजीराम को बिठाकर कवियों द्वारा बनाए गए छत्तीस कौम कथा का वाचन एवं महिमा का बखान किया गया। इसके बाद गाजेबाजे से मौजनीदेवी के घर ब्रह्मपुरी में बारात पहुंची जहां हिंदू रीति-रिवाज के साथ विवाह की रस्में हुई। यहां से वापस बारात मुख्य मार्ग से होकर यथा स्थान पहुंची, जहां मौजीराम को आरती के साथ ही मंदिर में बिठाया गया, जो हर शादी के बाद वर-वधु साल भर के लिए बिछड़ जाते हैं।

बूसी. गांव में धुलंडी के दिन मौजीराम की बंदोली निकालते ग्रामीण।

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