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भामाशाह पशु बीमा योजना में जरूरतमंदों को 70 प्रतिशत छूट

उपखंड में पशुपालक अब घर बैठे पशुओं का बीमा करा सकेंगे। इसके लिए पशुपालन विभाग द्वारा भामाशाह पशुधन बीमा योजना के...

Danik Bhaskar | Mar 05, 2018, 06:50 AM IST
उपखंड में पशुपालक अब घर बैठे पशुओं का बीमा करा सकेंगे। इसके लिए पशुपालन विभाग द्वारा भामाशाह पशुधन बीमा योजना के तहत पशुओं का बीमा किया जा रहा है। योजना के तहत बीमा करवाने के लिए पशुपालकों के लिए भामाशाह कार्ड होना जरूरी है। पशुपालन विभाग द्वारा बीमा की प्रीमियम राशि पर पशुपालकों को अनुदान दिया जाएगा। एससी, एसटी व बीपीएल वर्ग के पशुपालकों को भैंस का बीमा 413 रुपए प्रीमियम जिसमें 50 हजार का बीमा होगा। वहीं गाय का 330 की प्रीमियम राशि पर 40 हजार का बीमा होगा, जिसमें 70 प्रतिशत छूट शामिल है। वहीं भैंस के लिए तीन साल के लिए एक साथ बीमित राशि 1052 रुपए व गाय के लिए 1402 रुपए बीमा राशि देनी होगी। वहीं सामान्य वर्ग के पशुपालकों को बीमा की प्रीमियम राशि में 50 प्रतिशत छूट मिलेगी। इन पशुपालकों को गाय के बीमा के लिए 550, भैंस के बीमा के लिए 688 रुपए जमा कराने होंगे। योजना के तहत देशी, संकर नस्ल के दूध देने वाले पशु गाय, भैंस, भार ढोने वाले ऊंट, घोड़ा तथा अन्य पशु बकरी, भेड़ का बीमा अनुदानित प्रीमियम दर पर किया जाएगा। भेड़ का बीमा करवाने पर विभाग द्वारा एससी, एसटी एवं बीपीएल पशुपालकों को 70 प्रतिशत अनुदान एवं सामान्य वर्ग के पशुपालकों को 50 प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। रोग या दुर्घटना से बीमित पशु की मृत्यु होने पर 100 प्रतिशत बीमा लाभ दिया जाएगा। अनुदानित बीमा के लिए दुधारू गाय की कीमत 40 हजार, भैंस की 50 हजार व भार ढोने वाले पशु की अधिकतम 50 हजार रुपए रहेगी। बीमा योजना में टैग से पशुओं की पहचान सुनिश्चित होने से इसमें पारदर्शिता रहेगी।

बीमित पशु पर टैग लगेगा, टैग गिरने पर पशुपालकों को देनी होगी विभाग को सूचना : पशुपालकों को अपने पशुओं का बीमा करवाने के लिए संबंधित पशु चिकित्सालय में सूचित करना होगा। सूचना के बाद पशु चिकित्सक एवं संबंधित बीमा कंपनी अभिकर्ता पशुपालक के घर पहुंचेंगे। वहां पर पशु चिकित्सक द्वारा पशु का स्वास्थ्य परीक्षण कर प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा। बीमा के लिए पशुपालक के पास भामाशाह कार्ड एवं बैंक में खाता होना जरूरी है। पशु का बीमा करने के दौरान बीमा कंपनी द्वारा पशु के कान में टैग लगाया जाएगा। पशुपालक की पशु के साथ संयुक्त फोटो ली जाएगी। बाद में पशु का बीमा कर पॉलिसी जारी कर दी जाएगी। पशु का बीमा होने के बाद कान में लगाया जाने वाला टैग अगर गिर जाता है तो पशुपालक द्वारा बीमा कंपनी को सूचना देनी पड़ेगी। जिससे बीमा कंपनी पशु के नया टैग लगा सके। पशुधन बीमा योजना में पारदर्शिता लाने के लिए टैग लगाने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

पशुपालकों को भटकने की आवश्यकता नहीं