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सुमेरपुर में चलती बालवाहिनी में आग लगी, 12 छात्र व एक शिक्षिका थी सवार, सभी सुरक्षित

शहर के बलदेवसिंह कॉलोनी में शुक्रवार सुबह बच्चों को स्कूल लेकर जा रही बालवाहिनी में अचानक आग लग गई। बाल वाहिनी में...

Danik Bhaskar | Feb 10, 2018, 07:35 AM IST
शहर के बलदेवसिंह कॉलोनी में शुक्रवार सुबह बच्चों को स्कूल लेकर जा रही बालवाहिनी में अचानक आग लग गई। बाल वाहिनी में करीब 10-12 बच्चे व एक शिक्षिका सवार थी। चालक व शिक्षिका ने लोगों की मदद से समय रहते सभी बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। गनीमत रही की बड़ा हादसा होते-होते टल गया। आग बूझने के बाद फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची, तब तक बाल वाहिनी पूरी तरह जल चुकी थी।

जानकारी के अनुसार सुमेरपुर के बलदेवसिंह कॉलोनी में एक निजी स्कूल की बालवाहिनी बच्चों को लेकर स्कूल जा रही था। इस दौरान अचानक उसमें आग लग गई। चालक ने चलती बालवाहिनी के इंजन से आग की लपटें उठती देखीं तो वह घबरा गया और बालवाहिनी को रोक दिया। चालक ने बाल वाहिनी को रोककर बच्चों को जल्दी-जल्दी उतारने लगा, जिससे बच्चे घबरा गए एवं चीखने लगे। बच्चों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग घटना स्थल पर पंहुचे। तब तक आग काफी ज्यादा फैल चुकी थी। समय रहते लोगों की मदद से सभी बच्चों को बाहर निकाल लिया। लोगों ने पानी की बाल्टियां भरकर आग बुझाने लगे। इस दौरान लोगों ने पुलिस व दमकल को भी फोन कर दिया। करीब आधे घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। हालांकि तब तक बालवाहिनी जल चुकी थी। आग लगने के 20 मिनट बाद फायर ब्रिगेड पहुंची। जबकि फायर ब्रिगेड स्टेशन से घटनास्थल की दूरी मात्र 1 किलोमीटर ही थी।

आग लगने के 20 मिनट बाद पहुंची फायरब्रिगेड, घटनास्थल से मात्र 1 किमी दूर फायर ब्रिगेड स्टेशन

सुमेरपुर. बलदेवसिंह कॉलोनी में स्कूली बच्चों को लेकर जा रही टेम्पो में अचानक आग लग गई।

बाल वाहिनियों को लेकर शिक्षा निदेशालय ने जारी

की थी गाइडलाइन, नहीं होती नियमों की पालना

सुमेरपुर | बालवाहिनी के दुर्घटनाग्रस्त होने की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए बीकानेर शिक्षा निदेशालय ने दिसंबर-2017 में गाइड लाइन जारी की थी। जिसमें स्कूल संचालकों से लेकर चालक, सहयोगी और अभिभावकों के लिए निर्देश दिए हैं। बाल वाहिनी पर स्कूल के नाम के साथ टेलीफोन नंबर, चालक और सहयोगी का नाम लिखना अनिवार्य होगा। यहीं नहीं पहचान के लिए प्रत्येक बालवाहिनी पर अंग्रेजी में ऑन स्कूल ड्यूटी लिखवाना अनिवार्य किया है। इसमें ये भी उल्लेख है कि चालक बच्चों को सड़क पर नहीं उतारें और संस्था प्रधान चालक से हर दिन बच्चों से घर पहुंचने की रिपोर्ट लें। यह भी निर्देश दिए हैं कि ऑटो, वैन या मैजिक में दरबाजों पर लॉक होना चाहिए। जो भी वाहन बाल वाहिनी के रूप में उपयोग में लाया जाए वो पीले रंग का हो ताकि दूर से देखकर पहचाना जा सके। निदेशालय की ओर से जारी गाइड लाइन में बच्चों की सेफ्टी को लेकर लिखा है कि ऑटो ड्राइवर वाली साइड के पीछे ऐसी ग्रिल होनी चाहिए, जिससे कोई बालक गिर ना सके।

बालवाहिनियों में अग्निशमन यंत्र लगा होना चाहिए : बालवाहिनियों में बच्चों की सुरक्षा के लिए अग्निशमन यंत्र लगा होना जरूरी है। वाहन द्वारा घर से बच्चों को ले जाने और वापस पहुंचाने का समय निर्धारित हो। इसकी जानकारी अभिभावकों को देनी चाहिए। देरी की स्थिति में अभिभावक को सूचना दे। चालक के पास वाहन से आने जाने वाले स्टूडेंट्स की सूची तथा उनके पेरेंट्स के मोबाइल नंबर हो। साथ ही बाल वाहिनी की स्पीड 40 किमी से अधिक ना हो।

छोटे बच्चों को खिड़की से दूर बिठाना होगा

गाइड लाइन के अनुसार समझदार बड़े बच्चों को खिड़कियों के पास बैठाना होगा। छोटे बच्चों को बीच में बैठाना होगा। दरवाजे के सामने या नजदीक छोटे बालकों को नहीं बैठाने का भी नियम है। बाल वाहिनी की सीढिय़ों की जमीन से ऊंचाई कम हो, जिससे छोटे बच्चों को चढ़ने में परेशानी न हो। फ़र्स्ट एड बॉक्स हो। बच्चों के लिए पीने के साफ पानी की व्यवस्था होनी चाहिए। बच्चों के लिए इसमें रोशनी और हवा का प्रबंध हो। खिड़कियों पर किसी भी प्रकार की फिल्म चढ़ी नहीं होना चाहिए। इमरजेंसी गेट भी होना चाहिए। बच्चों के बैठने के लिए सीट की समुचित व्यवस्था हो। 12 साल के बच्चों के लिए एक सीट की गणना की जाए। बाल वाहिनी में आवश्यक रूप से जीपीएस लगाना होगा।

1 किमी दूरी पर खड़ी थी फायर ब्रिगेड, आग बुझाने के बाद पंहुची मौके पर

बालवाहिनी में आग लगने के बाद लोगों ने पुलिस प्रशासन व फायर ब्रिगेड को फोन किया। लोगों द्वारा बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद पानी की बाल्टियां भर-भर कर आग बुझाने के प्रयास किए गए। करीब 20 मिनट के बाद आग पर काबू पाया गया। तब तक गाड़ी जल चुकी थी, लेकिन फायर ब्रिगेड आग बूझ जाने के बाद पंहुची।

चालक व लोगों ने बाहर निकाला