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माथे की बिंदी नक्शे पर चिपकेगी, रंग से पता चलेगा किस घर में गर्भवती

पूरे गांव का एक नक्शा। नक्शे में हर घर की सूचना। परिवार में कितने लोग। पुरुष, महिलाएं, बच्चे कितने। उनकी उम्र क्या।...

Dainik Bhaskar

Jan 16, 2018, 07:45 AM IST
माथे की बिंदी नक्शे पर चिपकेगी, रंग से पता चलेगा किस घर में गर्भवती
पूरे गांव का एक नक्शा। नक्शे में हर घर की सूचना। परिवार में कितने लोग। पुरुष, महिलाएं, बच्चे कितने। उनकी उम्र क्या। कौन गर्भवती। बच्चे का वजन कितना। वजन कम है तो उसे क्या उपचार दिया जा रहा है। इस नक्शे में प्रत्येक परिवार या घर के कॉलम के आगे चिपकी होगी एक बिंदी। यह सब होगा ‘राज संगम-ट्रिपल ए’ योजना के तहत। प्रदेश में शिशु एवं मातृ मृत्यु दर को कम करने के लिए खासतौर पर यह योजना बनाई है। खास बात यह रहेगी कि ट्रिपल ए यानि आशा, आंगनबाड़ी एवं एएनएम अब तीनों मिलकर एक साथ इस योजना पर काम करेंगी। पूरे गांव का नक्शा तैयार कर बिंदियों के माध्यम से हर घर की पहचान कराएंगी।

जिस घर में गर्भवती की हालात नाजुक या बच्चा कुपोषित है, यह नक्शे में बिंदियों के माध्यम दर्शाया जाएगा। जिले के सभी आंगनबाड़ी केंद्रों पर इस प्रकार का नक्शा अब देखने को मिलेगा। फिलहाल इस योजना के तहत कैसे काम करना है, इसके प्रशिक्षण के बैच जिले में शुरू भी हो गए हैं। जो नक्शा तैयार किया जाएगा उस पर बिंदी जो आमतौर पर महिलाएं माथे पर लगाती है, वह लगाई जाएगी। हर बिंदी का रंग अलग-अलग होगा। पहले चरण में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी वीसी के जरिये मोटे तौर पर जानकारी दे रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि इस कार्यक्रम के लिहाज से चार दिन पहले 10 जनवरी को वीसी हुई थी। इस वीसी में अतिरिक्त मुख्य सचिव वीनू गुप्ता, मिशन निदेशक नवीन जैन आदि ने योजना की बारीकियों के बारे में विस्तृत से समझाया था।

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वास्तविक डाटा होगा तैयार

ट्रिपल-ए यानि आशा, आंगनबाड़ी एवं एएनएम मिलकर अपने-अपने कार्यक्षेत्र में घूमकर एक-एक घर का डाटा तैयार करेगी। यह डाटा सच्ची कार्यकर्ता-सच्ची एएनएम रिकॉर्ड मेंटेन पद्धति से बनेगा। इसके लिए एक फिल्म या वृत्तचित्र बनाया गया है जिसके जरिये डाटा संकलन, संरक्षण और उसके अनुरूप कार्य करने की पद्धति सिखाई जाएगी।

स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करते हुए मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना

नेशनल फेमिली हैल्थ सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक राजस्थान में पांच वर्ष तक के 36.7 फीसदी बच्चे कम वजन के हैं। कुल 60.3 फीसदी बच्चों को एनिमिक की श्रेणी में रखा गया है। इसी तरह 15 से 49 वर्ष उम्र की 46.8 फीसदी महिलाएं एनिमिया की श्रेणी में हैं। राज संगम ट्रिपल-ए योजना में गांवों के प्रत्येक घर का वास्तविक ब्यौरा तैयार किया जाएगा। मकसद एक ही है, मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करना।

इसलिए इस प्रकार की बनाई योजना

लगभग हर गांव में आशा सहयोगिनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और एएनएम मौजूद है। ये ही मातृ एवं शिशु सुरक्षा से जुड़े कार्यक्रम को अंजाम देते हैं। लगभग एक-सा काम होने के बावजूद तीनों की रिपोर्टिंग अलग-अलग होती है। जिले के सभी केंद्रों में यह व्यवस्था रहेगी।

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