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राजस्व रिकॉर्ड में ओबीसी, नौकरी एससी के सर्टिफिकेट से, जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय के सेक्शन ऑफिसर के खिलाफ जांच शुरू

तहसीलदार ने दस्तावेजों में कांटछांट करने की रिपोर्ट भेजी थी, जांच अधिकारी एसआई प्रेमप्रकाश ने अपने पास रख ली ...

Bhaskar News Network | Last Modified - Feb 08, 2018, 07:50 AM IST

तहसीलदार ने दस्तावेजों में कांटछांट करने की रिपोर्ट भेजी थी, जांच अधिकारी एसआई प्रेमप्रकाश ने अपने पास रख ली

मामले की जांच रामदेव रोड पुलिस चौकी प्रभारी प्रेमप्रकाश कर रहे हैं। जागृति संस्था के अध्यक्ष नंदलाल व्यास की ओर से उन पर भी जांच में तथ्य छिपाने व खीमानाथ के पक्ष में जानबूझकर कार्रवाई में देरी करने का आरोप लगाया है। आरोप है कि तहसीलदार ने 25दिसंबर को ही रिपोर्ट दे दी थी। रिपोर्ट में खीमानाथ के ओबीसी के तहत जोगी जाति का होने व दस्तावेजों में कांटछांट का आरोप था। लेकिन एसआई ने इस मामले में आगे कोई कार्रवाई नहीं की। मंगलवार को प्रेमप्रकाश के खिलाफ इस बाबत कोतवाली थाने में परिवाद पेश किया गया।

एक ही विभाग, दोनों दोस्त, आपस में झगड़े तो खुलासा

जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में छानबीन समिति के समक्ष खीमानाथ व परिवादी ने प्रस्तुत किए अपने पक्ष में सबूत

भास्कर संवाददाता | पाली

कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर में सेक्शन आॅफिसर के पद पर कार्यरत पाली के कोलीवाड़ा गांव निवासी खीमानाथ पर एससी का फर्जी जाति प्रमाण बनाकर नौकरी व प्रमोशन का फायदा लेने के आरोपों की जांच जिला प्रशासन ने शुरू कर दी है। आरोप है कि खीमानाथ मूल रूप से जोगी जाति के हैं जो ओबीसी के तहत आती है। जबकि उन्होंने खुद को कालबेलिया बताते हुए एससी का जाति का प्रमाण पत्र बनवाकर पहले नौकरी भी हासिल की और इसी आधार पर प्रमोशन भी लिए। मामले में बुधवार को जिला कलेक्टर सुधीर कुमार शर्मा की अध्यक्षता में गठित जिला छानबीन समिति ने मामले की जांच शुरू की। समिति ने दोनों पक्षों को बुलाया और उनसे उनके पक्ष में साक्ष्य मांगे। कोतवाली थाना पुलिस में भी इस मामले को लेकर पहले से ही रिपोर्ट दर्ज है। जिसकी जांच पुलिस अलग से कर रही है। मामले का खुलासा तब हुआ जब खीमानाथ और उनके साथी नंदलाल व्यास के बीच किसी मामले में झगड़ा हुआ। खीमानाथ का आरोप है कि व्यास ने उन्हें जातिसूचक शब्दों से संबोधित कर प्रताड़ित किया। इस पर उन्होंने एससी-एसटी एक्ट में व्यास के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। व्यास ने मामले को यह कहकर चुनौती दी कि खीमानाथ जाति से जोगी हैं और ओबीसी हैं। इसलिए उनके खिलाफ यह मामला नहीं बनता। व्यास ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत खीमानाथ के पैतृक गांव कोलीवाड़ा से उनका राजस्व रिकॉर्ड जुटाया। इसमें उनकी जाति जोगी दर्ज है। इन दस्तावेजों के आधार पर व्यास ने खीमानाथ के खिलाफ पाली के कोतवाली थाने में झूठे दस्तावेज बनवाकर नौकरी व प्रमोशन हासिल करने की रिपोर्ट दर्ज करवाई। गौरतलब है कि खीमानाथ करीब 30 साल से इस सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी कर रहे हैं। बुधवार को छानबीन समिति के समक्ष जोधपुर जागृति संस्था के अध्यक्ष नंदलाल व्यास, उनके वकील व आरटीआई कार्यकर्ता ओमप्रकाश भाटी व खीमानाथ का पक्ष सुना गया।

पाली के खीमानाथ ने साथी के खिलाफ दर्ज करवाया एससी-एसटी एक्ट में मामला, साथी ने आरटीआई से जानकारी जुटा उसके जाति प्रमाण को झूठा साबित किया, सच का फैसला बाकी

एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी के सेक्शन ऑफिसर ने खुद को बताया एससी के तहत कालबेलिया जाति का,

अपने पक्ष में पेश किए अन्य रिश्तेदारों के बने हुए एससी के जाति प्रमाण पत्र

समिति में दोनों पक्षों ने लगाए एक-दूसरे पर आरोप, खीमानाथ का दावा : मैं सही, दस्तावेज पेश किए

कलेक्टर सुधीर कुमार शर्मा की अध्यक्षता में समिति की बैठक में एडीएम भागीरथ विश्नोई, पाली व सुमेरपुर एसडीएम तथा जिला परिषद एसीईओ भी उपस्थित थे। परिवादी की ओर से बताया गया कि खीमानाथ फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर 30 साल से नौकरी कर रहा है। वहीं खीमानाथ ने अपने साथ ही रिश्तेदारों के भी जाति प्रमाण पत्र कलेक्टर के सामने पेश कर दावा किया की वह ओबीसी का नहीं एससी का है। इस दौरान परिवादी,एडवोकेट ओमप्रकाश भाटी, एडवोकेट मनीष बोहरा, कैलाश विश्नोई, किशोर विश्नोई, मदन खारोल कांणदरा, नरेश पंडित और ढलाराम आदि मौजूद थे।

जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में छानबीन समिति के समक्ष खीमानाथ व परिवादी ने प्रस्तुत किए अपने पक्ष में सबूत

भास्कर संवाददाता | पाली

कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर में सेक्शन आॅफिसर के पद पर कार्यरत पाली के कोलीवाड़ा गांव निवासी खीमानाथ पर एससी का फर्जी जाति प्रमाण बनाकर नौकरी व प्रमोशन का फायदा लेने के आरोपों की जांच जिला प्रशासन ने शुरू कर दी है। आरोप है कि खीमानाथ मूल रूप से जोगी जाति के हैं जो ओबीसी के तहत आती है। जबकि उन्होंने खुद को कालबेलिया बताते हुए एससी का जाति का प्रमाण पत्र बनवाकर पहले नौकरी भी हासिल की और इसी आधार पर प्रमोशन भी लिए। मामले में बुधवार को जिला कलेक्टर सुधीर कुमार शर्मा की अध्यक्षता में गठित जिला छानबीन समिति ने मामले की जांच शुरू की। समिति ने दोनों पक्षों को बुलाया और उनसे उनके पक्ष में साक्ष्य मांगे। कोतवाली थाना पुलिस में भी इस मामले को लेकर पहले से ही रिपोर्ट दर्ज है। जिसकी जांच पुलिस अलग से कर रही है। मामले का खुलासा तब हुआ जब खीमानाथ और उनके साथी नंदलाल व्यास के बीच किसी मामले में झगड़ा हुआ। खीमानाथ का आरोप है कि व्यास ने उन्हें जातिसूचक शब्दों से संबोधित कर प्रताड़ित किया। इस पर उन्होंने एससी-एसटी एक्ट में व्यास के खिलाफ मामला दर्ज करवाया। व्यास ने मामले को यह कहकर चुनौती दी कि खीमानाथ जाति से जोगी हैं और ओबीसी हैं। इसलिए उनके खिलाफ यह मामला नहीं बनता। व्यास ने सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत खीमानाथ के पैतृक गांव कोलीवाड़ा से उनका राजस्व रिकॉर्ड जुटाया। इसमें उनकी जाति जोगी दर्ज है। इन दस्तावेजों के आधार पर व्यास ने खीमानाथ के खिलाफ पाली के कोतवाली थाने में झूठे दस्तावेज बनवाकर नौकरी व प्रमोशन हासिल करने की रिपोर्ट दर्ज करवाई। गौरतलब है कि खीमानाथ करीब 30 साल से इस सर्टिफिकेट के आधार पर नौकरी कर रहे हैं। बुधवार को छानबीन समिति के समक्ष जोधपुर जागृति संस्था के अध्यक्ष नंदलाल व्यास, उनके वकील व आरटीआई कार्यकर्ता ओमप्रकाश भाटी व खीमानाथ का पक्ष सुना गया।

पासबुक में ऊपर से पर्ची लगाकर एससी लिखा, तहसीलदार ने कहा- कांटछांट किया

मामला दर्ज होने के बाद खीमानाथ से उनके जमीन संबंधी दस्तावेज मांगे गए थे। उनकी ओर से पेश पासबुक में एससी दर्ज था। इसके बाद यह दस्तावेज बाली तहसीलदार को भेजे गए। वहां दस्तावेजों की जांच में पता चला कि रेवेन्यू रिकाॅर्ड में उनकी जाति जोगी है जो ओबीसी में आते हैं। जांच में सामने आया कि दस्तावेजों पर ऊपर से पर्ची लगा अनुसूचित जाति दर्ज किया है। इसकी रिपोर्ट जांच अधिकारी को 10 दिन पूर्व ही मिलने पर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।

इनका कहना है

मामले की जांच कर रहे अधिकारियों की ओर से दस्तावेज भेजे गए थे। उसकी पासबुक में अनुसूचित जाति दर्ज थी। रेवेन्यू रिकाॅर्ड की जानकारी तहसील कार्यालय से जुटाई तो उसमें जोगी दर्ज था जो ओबीसी में आते हैं। जांच अधिकारी व कोतवाली थाना अधिकारी दोनों को पत्र लिख बता दिया था कि पासबुक पर पर्ची चिपकाकर दस्तावेजों से छेड़खानी की है। विवेक व्यास, तहसीलदार, बाली

मेरे पिताजी व भाई ने मेरे मामा से जमीन खरीदी थी। पटवारी ने गलती से जोगी बता दिया जबकि मैं कालबेलिया हूं। एससी में आता हूं। जमीन को गोशाला के लिए दान किया था। नंदलाल व्यास मेरे साथ कार्यरत था। उस दौरान उसने मुझे जातिसूचक शब्दों से भी अपमानित किया। इसको लेकर मैंने मंडोर थाने में मामला दर्ज कराया था। इसी के बाद से वह मेरे पीछे पड़ गया। समिति के सामने मैंने मेरे साथ अपने रिश्तेदारों के भी प्रमाण पत्र पेश किए हैं, जिसमें साफ लिखा है कि हम एससी में आते हैं। खीमानाथ, सेक्शन अधिकारी, कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर

खीमानाथ पिछले 30 सालों से अधिक समय से फर्जी प्रमाण पत्र के आधार पर नौकरी कर प्रमोशन ले रहे हैं। आरटीआई में मांगे रेवेन्यू रिकार्ड में भी साफ है कि वह जोगी जाति के हैं और ओबीसी में आते हैं। जबकि वह अपने आप को कालबेलिया बता एससी का दावा कर रहे हैं। इसके लिए कोतवाली थाने में रिपोर्ट देकर जिला छानबीन समिति में भी परिवाद पेश किया था। समिति के सामने दस्तावेज पेश किए हैं। ओमप्रकाश भाटी, अधिवक्ता व आरटीआई कार्यकर्ता, जन जागृति संस्था, जोधपुर

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