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खेतों में पहले चोरी-छिपे होती थी भांग की फसल, महिलाओं ने विरोध किया, अब भिंडी की देशभर में कर रही सप्लाई

बाली के आदिवासी अंचल के खेतों में बरसों से मक्के की ही पैदावार होती रही है। चोरी-छिपे कई आदिवासी डोडा-पोस्त तथा...

Dainik Bhaskar

Mar 11, 2018, 07:50 AM IST
खेतों में पहले चोरी-छिपे होती थी भांग की फसल, महिलाओं ने विरोध किया, अब भिंडी की देशभर में कर रही सप्लाई
बाली के आदिवासी अंचल के खेतों में बरसों से मक्के की ही पैदावार होती रही है। चोरी-छिपे कई आदिवासी डोडा-पोस्त तथा भांग के पौधे भी पनपाते रहते थे। अब आदिवासी महिलाएं इस पहाड़ी इलाके में प्रदेश की सबसे उन्नत भिंडी की फसल उगाकर डेढ़ करोड़ रुपए का कारोबार कर रही है। पहाड़ों पर उगने वाली भिंडी की विशेषता यह है कि 6 इंच तक लंबी होने के साथ इसमें फाइबर की अधिकता तथा मिठास के साथ ही कोमल होने के कारण देश के प्रमुख शहराें में इसकी मांग जबरदस्त बढ़ रही है। महिलाओं की जागरूकता से हुए इस नवाचार के बाद इनके परिवारों के चेहरे खुशी से चमक रहे हैं। भिंडी के साथ सीजनल सब्जियों काे उगाने की तकनीक भी इनके हाथों में आ गई है। अब यहां टमाटर के साथ ही मिर्च तथा मटर की पैदावार भी हो रही है। जानकारी के अनुसार आदिवासी इलाके में पहाड़ों की ओट में आबाद खेतों में वर्ष 2011 से लेकर 2016 तक पुलिस ने डोडा-पोस्त व भांग के पौधे पनपाने के 7 मामले पकड़े थे। साथ ही खेतों से 213 मादक पदार्थों के पौधे जब्त किए थे। अब पहाड़ों में महिलाओं की जागरूकता के बाद आदिवासियों ने तौबा कर ली है। अब इन खेतों मेंं सब्जियों की फसलें लहलहाती दिख रही है। महिलाओं के समूह ने सूजन संस्था के सहयोग से सब्जियों की पैदावार करने से पहले खेतों की मिट्टी की जांच कराई थी। उच्च गुणवत्ता की मिट्टी होने तथा भरपूर फाइबरयुक्त होने की रिपोर्ट आने के बाद सीजनल सब्जियां उगानी शुरू की थी। पहली बार भीमाणा में इसका प्रयोग किया गया। फसल उन्नत होने के बाद धीरे-धीरे काेयलवाव, आमलिया, नाणा तथा भंदर के 300 परिवारों को इससे जोड़ दिया।

बाली की अरावली पर्वतमाला से गुजर रही 13 ग्राम पंचायतों में से 5 ग्राम पंचायतों की मेहनतकश

महिलाएं पहाड़ों पर उगा रही सब्जियां, भिंडी के साथ टमाटर, मिर्च व मटर की हो रही बंपर पैदावार

5 ग्राम पंचायतों के 300 परिवार, 1000 बीघा में हो रही सब्जियों की खेती

इस क्षेत्र में सक्रिय सृजन संस्था की पहल पर महिलाओं ने कोयलवाव, भीमाणा, नाणा, आमलिया तथा भंदर गांव में एक बीघा खेत के चौथाई हिस्से में सब्जी की पैदावार शुरू की थी, पहली बार में भिंडी की फसल उगाई गई। रखरखाव के साथ ही महिलाओं ने भिंडी को पनपाने के लिए खाद समेत अन्य जैविक केमिकल्स का ध्यान रखा। एक बार में ही एक चौथाई बीघा में ही 18 हजार रुपए तक की भिंडी हो गई।

पहले सुमेरपुर जाकर बेचते थे भिंडी, अब अहमदाबाद, मुंबई, ऊंझा तथा चेन्नई तक से लोग एडवांस में ऑर्डर देकर आते हैं खरीदने

पहले इस क्षेत्र में उगने वाली भिंडी को बेचने के लिए महिलाओं को खुद सुमेरपुर सब्जी मंडी में जाना पड़ता था। अब एक साल से यहां की भिंडी में अधिक फाइबर, मिठास व कोमलता होने के कारण इसकी मांग अहमदाबाद, ऊंझा, मुंबई तथा चेन्नई में भी होने लगी है। यहां के मटर की मांग भी काफी है।




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