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हाईटेक | रिजर्व क्षेत्र में विभिन्न जीव-जंतुओं की संख्या, प्रकृति, प्रवृत्ति और भोजन संबंधी गतिविधियों का विश्लेषण हाेगा

3 वर्ष पहले
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भास्कर संवाददाता | पाली/सुमेरपुर

जवाई कंजर्वेशन में अब पैंथर फैमिली की सुरक्षा व निगरानी पुख्ता करने के लिए राज्य सरकार देश का सबसे हाईटेक सिस्टम से लैस करने जा रही है। आधुनिकतम तकनीक से लेस निगरानी तंत्र (सर्विलांस सिस्टम) लगाने का कार्य भी शुरू हो गया है। संवेदनशील क्षेत्रों में द्रोण वॉच टॉवर खड़े करने के अलावा वन्य जीवों पर प्रभावी मॉनिटरिंग, वन्य जीवों के शिकार व चोरी पर अंकुश और वन्य जीवों की लाइफ स्टाल के तौर-तरीकों को जानने के लिए इन प्वाइंट पर द्रोण, सीसीटीवी और थर्मल कैमरा लगाए जाएंगे। दावा किया जा रहा है कि मार्च 2018 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा कर दिया जाएगा। एक कंट्रोल रूम में इन सभी फोटोज और विजुअल के माध्यम से पूरे रिजर्व क्षेत्र में तकनीकी तौर पर माकूल निगरानी के लिए टेंडर भी निकाल जा चुके हैं।

लगातार बढ़ रही पैंथर फैमिली, 60 तक पहुंची संख्या : वन अधिकारियों की तरफ से अब तक 36 पैंथर होने की पुष्टि दो साल पहले तत्कालीन वन उप संरक्षक बालाजी करी खुद कर चुके हैं। इसमें पैरवा की पहाड़ी पर रहने वाली पैंथर फैमिली तो मानवीय जीवन के साथ ऐसी घुल-मिल चुकी है कि वे स्वछंद रूप से पहाड़ी के साथ ही वहां आबाद मंदिर पर दिन में कई बार विचरण करने पहुंच जाती है। पुजारी मंदिर में निवास करता है, मगर उसे कभी भी हानि नहीं पहुंचाई गई। अब यह संख्या 60 तक पहुंच गई है। इन पैंथरों को सुबह व शाम के वक्त पहाड़ियों पर चहल-कदमी करते हुए देखा जा सकता है।

द्रोण वॉच टॉवर से थर्मल कैमरा, ड्रोन और सीसीटीवी

कैमरे में कैद होगी वन्य क्षेत्र की पल-पल की तस्वीर
दावा किया जा रहा है कि मार्च 2018 तक इस प्रोजेक्ट को पूरा कर दिया जाएगा
वायरलेस सिस्टम, हर गतिविधि का होगा विश्लेषण
इस प्रोजेक्ट में वॉच टॉवर और द्रोण कैमरों का संचालन दो मुख्य होंगे। वन क्षेत्र में रात की हलचल पर कड़ी चौकसी के लिए नाइट विजन थर्मल कैमरे लगाए जाएंगे। पूरा ही तंत्र वायर लेस होगा। स्थानीय कंट्रोल रूपम में इन सभी के विजुअल्स से डाटा (आंकड़ों) इकट्ठा किए जा सकेंगे। साथ ही, पूरे रिजर्व क्षेत्र में निवास कर रहे विभिन्न जीव-जंतुओं की संख्या, प्रकृति, प्रवृत्ति और भोजन संबंधी गतिविधियों का विश्लेषण किया जाएगा।

जवाई के लेपर्ड कंजर्वेशन क्षेत्र के 20 क्षेत्र जुड़ेंगे सर्विलांस सिस्टम से
राज्य के आईटी विभाग ने पूरे प्रदेश के कुछ चुनिंदा रिजर्व को इस योजना में शामिल किया है। कुल 1173 क्षेत्र इनमें शामिल है। मुकंदरा हिल टाइगर रिजर्व-417, सरिस्का टाइगर रिजर्व 420, रणथंभौर में 283, झालाना नेचर पार्क-33 और जवाई के लेपर्ड कंजर्वेशन क्षेत्र के 20 क्षेत्र इसमें शामिल हैं।

मार्च तक पूरा होगा प्रोजेक्ट
प्रदेश के सरिस्का टाइगर रिजर्व, मुकंदरा टाइगर रिजर्व, रणथंभोर टाइगर रिजर्व, झालाना प्रकृति पार्क के साथ जवाई पैंथर कंजर्वेशन को भी देश के सबसे हाईटेक सिस्टम लगाने के प्रोजेक्ट में शामिल किया, जवाई क्षेत्र के 20 संवेदनशील स्थानों पर द्रोण वॉच टॉवर लगाना शुरू

इस क्षेत्र में 20 स्थानों पर थर्मल कैमरा, ड्रोन तथा सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इन सबकी मॉनिटरिंग के लिए एक जगह कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा। सर्विलांस सिस्टम की खासियत यह रहेगी कि एक-एक पल की तस्वीर इसमें कैद होती रहेगी। साथ ही 3 महीने तक डाटा भी सुरक्षित रह सकेगा।

27 जनवरी 2013 को राज्य सरकार ने घोषित किया था जवाई बांध व आसपास के गांवों में 98 वर्ग किमी क्षेत्र को पैंथर कंजर्वेशन

10 ग्राम पंचायतों के 21 गांव शामिल हैं पैंथर फैमिली के लिए संरक्षित क्षेत्र में

हाईटेक सिस्टम से होगा यह सबसे बड़ा फायदा-अपराध बहुल क्षेत्र का पता लगेगा
जिले में पैंथर को ही जिला पशु यानी शुभंकर घोषित किया गया है। पैंथर कंजरवेशन क्षेत्र में पर्यटन के नाम पर अवैध रूप से होने वाली गतिविधियों को रोकने तथा वन्य जीवों की सुरक्षा के लिए सरकार ने इस प्रोजेक्ट में जवाई लेपर्ड कंजरवेशन प्रोजेक्ट को भी शामिल किया है। इससे तेंदुआ का सरंक्षण भी किया जा सकेगा। साथ ही तस्करी के लिए शिकार जैसी अवांछित गतिविधियों पर भी रोक लगेगी।

निगरानी के लिए तीन तकनीक के अपडेट कैमरे, ऐसे करेंगे 27 गुणा 7 काम
जानवर की गर्मी सूंघकर तस्वीर कैद करेगा थर्मल कैमरा

अभी तक ऐसे कैमरों का उपयोग देश में सेना या डिस्कवरी चैनल के रिपोर्टर ही काम में लेते आए हैं, मगर पहली बार ऐसे कैमरों को पैंथर कंजर्वेशन क्षेत्र में लगाया जाएगा। इन कैमरों की खासियत यह है कि जानवर या मनुष्य की गर्मी से भी इसके सेंसर एक्टिव हो जाते हैं और यह कैप्चर मोड पर आ जाता है।

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4 किमी क्षेत्र तक नजर रखेगा एक ड्रोन कैमरा

यहां पर लगने वाले ड्रोन अत्याधुनिक तकनीक के होने के साथ ही अधिक रेंज वाले भी होंगे। ड्रोन को 4 किमी क्षेत्र तक घुमाया जाकर वहां पर होने वाली प्रत्येक गतिविधि के बारे में जानकारी ली जा सकेगी। यह ड्रोन अंधेरे में भी दिन के उजाले जितनी साफ तस्वीरें कैप्चर कर सकेगा।

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20 स्थानों पर रहेगी निगरानी, चप्पे-चप्पे की तस्वीर क्लिक होगी
प्रदेश के आईटी एवं संचार विभाग के प्रमुख शासन सचिव अखिल अरोड़ा के मुताबिक इस क्षेत्र में हाईटेक सिस्टम लगाने से पर्यटन के नाम पर होने वाली अवैध गतिविधियों पर रोक लगने के साथ ही संरक्षित क्षेत्र पर पल-पल की नजर रहेगी। सर्विलांस सिस्टम में हर तस्वीर क्लिक होने से किसी भी अवैध गतिविधि के बारे में पता भी लगाया जा सकेगा।

नाइट विजन के सीसीटीवी कैमरे, अधिकारियों के मोबाइल पर भी अलर्ट

20 स्थानों पर विशेष पोल खड़े कर वहां पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। यह सभी कैमरे नाइट विजन के होंगे। अगर कहीं पर भी गड़बड़ी की सूचना मिली तो तत्काल संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंच जाएगा।

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इन गांवों में सबसे ज्यादा देखा जा सकता है पैंथर फैमिली को

पैरवा, लूंदाड़ा, सेणा, कोठार, मालनू, मालदर, चामुंडेरी राणावतान, नाणा, विरमपुरा, लालपुरा, बेड़ा, जूना बेड़ा, दूदणी, छोटी दूदणी, वेलार

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