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खुश हो जाइए, जवाई पुनर्भरण प्रोजेक्ट के लिए 100 करोड़ मंजूर, 15 करोड़ की पहली किश्त अगले माह तक

एक वर्ष पहले
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राज्य बजट में जिले को निराशा मिलने के बाद अब मुख्यमंत्री ने जिलेवासियों के लिए कई सौगातें दी हैं। जवाई पुनर्भरण को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार को 100 करोड़ रुपए देने की घोषणा की है। पहली किश्त के रूप में 15 करोड़ रुपए अगले माह तक आए। इसमें सेई बांध के दूसरे छोर पर जवाई बांध में पानी लेने के लिए बनी सुरंग को चौड़ा किया जाएगा, जिससे जवाई बांध में ज्यादा पानी आएगा। वहीं सेई के ओवरफ्लो होने के बाद गुजरात जा रहा पानी पूरी तरह बंद हो जाएगा। यह जिले के लिए सबसे बड़ी सौगात है। जवाई पुनर्भरण को लेकर भी राज्य सरकार द्वारा 100 करोड़ रुपए का बजट घोषित करने पर इस योजना के तहत काम भी हो पाएगा। हालांकि वर्तमान में साबरमती बेसिन के पानी के बंटवारे को लेकर केंद्र में सेंट्रल वॉटर कमीशन बोर्ड में गुजरात व राजस्थान सरकार के बीच मंथन चल रहा है। समझौता होने के बाद प्रोजेक्ट को मंजूरी भी मिल जाएगी। इसको लेकर पूर्व भाजपा सरकार के समय दाे चरणों में डीपीआर बन चुकी है। साथ ही इसका हाइड्रोलॉजिकल सर्वे भी हो चुका है। इस प्रोजेक्ट को वर्ष 2013 में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जवाई पुनर्भरण योजना की घोषणा की थी। एक दिन पहले पूर्व सभापति केवलचंद गुलेच्छा व कांग्रेस नेता रंजू रामावत व अन्य कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री गहलोत से मिलकर जवाई पुनर्भरण योजना को लेकर चर्चा की थी। विधानसभा में सुमेरपुर विधायक जोराराम कुमावत व मारवाड़ जंक्शन विधायक खुशवीरसिंह जोजावर ने मुख्यमंत्री से पेयजल की डिमांड के लिए अनुदान दिलवाने की मांग भी की है।

4 गुना ज्यादा पानी सेई से बहकर जाता है गुजरात

जवाई बांध के सहयोगी बांध सेई बांध में पानी आने के बाद सुरंग छोटी होने के चलते प्रतिदिन 30 से 35 एमसीएफटी पानी ही जवाई बांध में आ पाता है, जबकि सेई बांध के ओवरफ्लो का चार गुना पानी गुजरात की सीमा में व्यर्थ बह जाता है। सुरंग चौड़ी होने से जवाई बांध ज्यादा पानी की आवक होगी। साथ ही बांध भी समय पर ओवरफ्लो होकर जवाई नदी के जुड़े पाली जिले के गांवों के अलावा इस नदी का पानी सांचौर के रणखार जाता है।

सुरंग चौड़ी होने पर 12 दिन में ही जवाई में पहुंच जाएगा पानी, अभी लगते हैं दो माह


वर्तमान में सेई बांध से जवाई बांध में आने वाली सुरंग की चौड़ाई मोटाई करीब 8.50 गुणा 12 फीट ही है। अब सुरंग की क्षमता बढ़ाने के लिए राज्य सरकार की ओर से बजट स्वीकृति मिलने पर सुरंग की चौड़ाई मोटाई बढ़ाकर 18 गुणा 18 फीट की हो जाएगी। इससे सेई बांध की सुरंग से प्रतिदिन 30 एमसीएफटी यानी, 328 क्यूसेक की बजाय 118 एमसीएफटी यानी, 1376 क्यूसेक पानी की आवक हो सकेगी। इतना ही नहीं, इस प्रोजेक्ट से एक और फायदा होगा। सेई बांध के लाइव स्टोरेज का संपूर्ण पानी 12 दिन में ही जवाई बांध में पहुंच जाएगा। इससे सेई बांध के जल्दी खाली होने पर सेई के ओवरफ्लो पानी की बर्बादी भी रुक जाएगी।


जैतारण काॅलेज में विज्ञान वर्ग, मामावास प्याऊ से खिंवाड़ा तक 27 किमी मेगा हाइवे, साेजत राेड में रेलवे अंडरपास

पाली| राजस्थान विधानसभा में गुरुवार मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूरक घोषणाएं करते हुए जिले काे नई सौगातें दी। जोजावर में 100 बेड व जैतारण में 50 बेड के अस्पताल करने की घाेषणा की। वही जैतारण की पिछले लंबे समय से युवाओं की मांग काे भी पूरा करते हुए काॅलेज में विज्ञान वर्ग खाेलने की मंजूरी दी। इसी प्रकार सीईटीपी के निर्माण तथा सीईटीपी के अपग्रेडेशन के लिए 200 कराेड़ रुपए का काॅरपाेरेशन बनाने की भी घाेषणा की है। इसके साथ ही साेजत राेड में रेलवे अंडरपास बनाने काे लेकर भी विधानसभा में सीएम गहलोत ने घाेषणा की। खास बात यह कि मामावास प्याऊ से खिंवाड़ा तक 27 किमी तक मेघा हाइवे बनाने काे लेकर भी बड़ी सौगात क्षेत्रवासियों काे दी। इस मेगा हाइवे बनाने काे लेकर पिछले लंबे समय से जनप्रतनिधियों के साथ-साथ क्षेत्रवासी मांग कर रहे थे। सीएम गहलोत ने रायपुर के कपूरी में इनडोर स्टेडियम बनाने के लिए भी 25 लाख देने की घाेषणा की।

सुरंग चौड़ी होने के 3 फायदे

1. सेई बांध में स्टोरेज पानी से मात्र 12 दिन में जवाई में पहुंच जाएगा पूरा पानी

2. सेई बांध का ओवरफ्लो रुकेगा

3. जवाई में सेई से ज्यादा पानी आने से जल्दी भरेगा और ओवरफ्लो होकर पाली व जालोर के लिए फायदा मिलेगा

जवाई बांध से जिले सहित शिवगंज में पेयजल आपूर्ति होती है।

पूर्व में सुरंग चौड़ी करने को लेकर हो चुका है सर्वे

जल संसाधन विभाग द्वारा पूर्व में सेंट्रल इंस्टीट्यूट माइनिंग एंड रिसर्च सेंटर नागपुर की टीम ने सेई बांध की सुरंग के आउटलेट सुरंग के भीतर के स्थिति की जानकारी जुटा चुके हैं। साथ ही टीम के वैज्ञानिकों ने करीब 6 किलोमीटर लंबी सुरंग में जाकर अत्याधुनिक मशीनें लगाकर पत्थरों आसपास की भौगोलिक स्थिति का गहनता से निरीक्षण भी कर चुके है। बताया जाता है कि इसकी डीपीआर भी बनी हुई है।
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