अजारी में मार्कंडेय ऋषि की तपो स्थली है मार्कुंडेश्वर महादेव मंदिर, यहां बने कुंड में लोग करते हैं पिंडदान

Sumerpur News - सिरोही जिला अर्बुदांचल में बसा है और यहां हर कौने में मंदिर स्थापित है और हर मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथाएं भी है।...

Feb 21, 2020, 11:36 AM IST
Sumerpur News - rajasthan news markandeya rishi39s tapo place in ajari is markundeshwar mahadev temple people do pinddaan in the tank here

सिरोही जिला अर्बुदांचल में बसा है और यहां हर कौने में मंदिर स्थापित है और हर मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथाएं भी है। महाशिवरात्रि के अवसर पर दैनिक भास्कर अपने पाठकों के लिए पिंडवाड़ा के पास अजारी गांव में स्थित मार्कुंडेश्वर महादेव मंदिर से जुड़ी जानकारी लाया है। पूजारी अमृत रावल ने बतया कि यह मंदिर मार्कंडेय ऋषि की तपोस्थली है और यहीं पर उन्होंने अपनी मृत्यु पर विजय प्राप्त कर भगवान शिव से अमर-अजय होने का आशीर्वाद भी प्राप्त किया था। इसी कारण यहां बसे गांव को भी अजारी के नाम से जाना जाने लगा। इस मंदिर की एक और विशेषता है कि यहां बना कुंड हरिद्वार के बाद दूसरा ऐेसा स्थान है, जहां परिजन अपने पूर्वजों की अस्थियों का विसर्जन करते है।

ऋषि मार्कंडेय की तपोभूमि है मार्कुंडेश्वर धाम

अजारी स्थित मार्कुंडेश्वर धाम को ऋषि मार्कंडेय की तपोभूमि कहा जाता है। भरत रावल व हितेश रावल ने बतया कि पौराणिक कथाओं में उल्लेख है कि मृकंडु नाम के ऋषि थे जिनके पुत्र प्राप्ति नहीं हो रही थी। इस पर उनकी प|ी ने शिवजी का कठोर तप किया तथा भगवान शिव ने मुनि से वरदान मांगने को कहा, जिस पर मृकंडु ने संतान के रूप में एक पुत्र मांगा, जिस पर भगवान शिव ने उन्हें पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद दिया, लेकिन पुत्र की आयु के 12 वर्ष ही दी। इसके बाद उनके पुत्र के रुप में मार्कंडेय हुए और माृकंडू ने उसे सभी शिक्षा दी, लेकिन जैसे ही मार्कंडेय की उम्र ११ वर्ष हुई तो वे चिंता में रहने लगे। इस पर मार्कंडेय ऋषि ने उनके पिता से कारण पुछा तो मृकंडू ऋषि ने पूरी बात बताई। इस पर मार्कंडेय जंगल में चले गए और वहां पर शिवलिंग की स्थापना कर पूजा अर्चना करने लगे। निश्चित समय आने पर काल उनको लेने पहुंचा, तो मार्कंडेय शिवजी की स्तुति की और शिवलिंग से लिपट गए। इस पर भगवान शिव वहां प्रकट हुए और मार्कंडेय ऋषि को अजर व अमर होने का आशीर्वाद दिया। जिस स्थान पर ऋषि मार्कंडेय ने तप किया वह मार्कुंडेश्वर धाम कहलाया। यह शिवलिंग हजारो वर्ष पुराना है और करीब ६०० वर्ष पूर्व राजा ब्रह्मलात ने इस मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया था।

नींबेश्वर महादेव मंदिर की अनूठी परम्परा गांव से एकत्रित सामग्री से बनता है प्रसाद

शिवगंज | शहर से करीब चार किमी दूर सुमेरपुर तहसील के कानपुरा गांव स्थित नींबेश्वर महादेव मंदिर में महाशिवरात्रि महोत्सव मनाने की अनूठी परम्परा है। मंदिर परिसर में रात को भगवान शिव की महाआरती और भजन कीर्तन होते है और दूसरे दिन सवेरे माली समाज के लोग अपने-अपने घरों से इच्छानुसार गेहूं का आटा, गुड़ व देशी घी एकत्रित कर नींबेश्वर महादेव मंदिर पहुंचते है और वहां रोटे बनाने के बाद अपने आराध्य देव को चुरमे का भोग लगाते है। इसके बाद सभी श्रद्धालुओं को चूरमे व रोटों की प्रसादी वितरण की जाती है। यहां किसी एक घर से आई सामग्री से प्रसाद नहीं बनाया जाता है। यह परम्परा मंदिर स्थापना के समय से चली आ रही है। शिवरात्रि को मंदिर में दर्शन करने एवं भजन-कीर्तन कार्यक्रम में सभी जाति धर्मों के श्रद्धालु आते है, जबकि महाशिवरात्रि का आयोजन व भगवान शिव की आरती, पूजा-अर्चना सिर्फ माली समाज के लोग ही करते है।

भैसासिंह गांव में चार दशक पहले खुदाई के दौरान निकला था अमरनाथ महादेव मंदिर और बावड़ी

अनिल चतुर्वेदी | आबूरोड

पालनपुर-उदयपुर फोरलेन के पास चार दशक पहले खुदाई में निकला भैसासिंह गांव स्थित प्राचीन अमरनाथ महादेव मंदिर शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों की आस्था का केन्द्र बना हुआ है। शिवरात्रि पर्व पर मेले के साथ ही यहां पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम भी होते है। जानकारी के अनुसार करीब तीन किलोमीटर दूर स्थित भैसासिंह गांव 1980 के दशक में खुदाई के दौरान यहां पर बावड़ी व मंदिर निकले थे। इसके बाद मंदिर के इतिहास की जानकारी को लेकर एक के बाद एक कई प्रमाण मिले थे। पुरातत्व विभाग उदयपुर के उत्खनन निदेशक विनित गोधल के अनुसार यह मंदिर यहां पर निकला मंदिर व मूर्तियां 14 वीं व 15 वीं तथा बावड़ी इससे पूर्व 12-13 वीं शताब्दी की है। इतना लंबा समय बीत जाने के बाद भी मंदिर के पिल्लरों पर किया गया अलंकार आज भी उसी स्थिति में है।

िशवरात्रि पर वाेवेश्वर महादेव के नाम भजन संध्या अाज

सुमेरपुर| महाशिवरात्रि के अवसर पर शुक्रवार काे शहर के श्री वाेवेश्वर महादेव मंदिर पर रात्रि में भजन संध्या अायाेजित हाेगी। वाेवेश्वर महादेव िमत्र मंडल के तत्वावधान में एक शाम वाेवेश्वर महादेव के नाम भजन संध्या का अायाेजन हाेगा। मंडल अध्यक्ष छाेगाराम माली ने बताया कि भजन कलाकार महेन्द्रपुरी गाेस्वामी व बसंतपुरी गाेस्वामी द्वारा भगवान िशव के एक से बढ़कर एक भजनाें की प्रस्तुतियां दी जाएगी। कार्यक्रम के दूसरे िदन 22 फरवरी काे सवेरे बाल भाेग का अायाेजन किया जाएगा। िजसमें अासपास की स्कूलाें के बच्चे भाग लेंगे।

मार्कुंडेश्वर महादेव मंदिर के बाहर बना कुंड हरिद्वार के बाद दूसरा ऐसा स्थान जहां होता है पिंडदान

परमार व देवड़ा शासनकाल का है इतिहास

यह चंद्रावती के परमार व देवड़ा शासनकाल की बेहतरीन कार्यप्रणाली का नमूना है। साल 2013-14, 2014-15 व 2015-16 में पुरातत्व विभाग द्वारा चंद्रावती नगरी में संग्रहालय के पीछे की ओर स्थित टीलों व फोरलेन के दूसरी ओर रेलवे लाइन के पास एवं नदी में कई स्थानों पर उत्खनन करवाया गया था। उस दौरान वहां भी एक बावड़ी निकली थी।

खुदाई में मिले थे प्रमाण, बावड़ी मंदिर से भी पुरानी


नींबेश्वर महादेव मंदिर।

मार्कुंडेश्वर मंदिर के बाहर एक कुंड है, जहां पर पिंडदान किया जाता है। यहां निर्जला एकादशी के दिन बड़ा मेला भरता है। किवंदती के अनुसार अजारी स्थित नदी में कई वर्षों पहले स्वत: ही गंगा उत्पन्न हुई थी, जिस कारण हरिद्वार के बाद अजारी ऐसा दूसरा स्थान है जहां पर गंगा की उत्पत्ति के कारण पिंडदान किया जाता है। यहां पर एक कुंड भी है, जिसमें लोग पिंडदान करते है।

अमरनाथ महादेव मंदिर।

पिंडवाड़ा. मार्कुंडेश्वर महादेव मंदिर।

Sumerpur News - rajasthan news markandeya rishi39s tapo place in ajari is markundeshwar mahadev temple people do pinddaan in the tank here
Sumerpur News - rajasthan news markandeya rishi39s tapo place in ajari is markundeshwar mahadev temple people do pinddaan in the tank here
X
Sumerpur News - rajasthan news markandeya rishi39s tapo place in ajari is markundeshwar mahadev temple people do pinddaan in the tank here
Sumerpur News - rajasthan news markandeya rishi39s tapo place in ajari is markundeshwar mahadev temple people do pinddaan in the tank here
Sumerpur News - rajasthan news markandeya rishi39s tapo place in ajari is markundeshwar mahadev temple people do pinddaan in the tank here

आज का राशिफल

पाएं अपना तीनों तरह का राशिफल, रोजाना