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एक पिता की दो बेटियां : एक जज बनी तो दूसरी आरएएस....बेटे की कमी नहीं खलने दी, अब परिवार की जिम्मेदारियां निभा रही

3 वर्ष पहले
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सलोदरिया की दो बहनों ममता व धर्मिष्ठा ने संघर्ष करके मुकाम पाया। एक सिविल जज हैं तो दूसरी प्रशासनिक अधिकारी। अभावपूर्ण माहौल के बीच दोनों ने ऊंचा ओहदा हासिल किया। तालीम की बदौलत बेटियों के मुकाम पाने से माता-पिता का सिर भी गर्व से ऊंचा है। अहम बात है कि वे अपने बिन बेटे के माता-पिता का सहारा बन रही हैं और पारिवारिक जिम्मेदारियां भी निभा रही हैं। पिता जोताराम व माता गजीदेवी का मानना हैं कि बेटियां भी समाज में बेटों से किसी भी सूरत में कम नहीं। माता-पिता की देखभाल से लेकर हर जिम्मेदारी को मुस्तैदी से निभाती हैं। पाली जिले के सुमेरपुर तहसील के सलोदरिया गावं निवासी पिता जोताराम शिवगंज में लॉरी पर छोटा सा व्यापार करते थे। वहीं मां गजीदेवी ने देहाती गृहिणी होते हुए भी तालीम की महत्ता को महसूस कर लिया। अपनी दोनों बेटियों को अभावपूर्ण व संघर्षशील जीवन के बावजूद उच्च शिक्षा दिलाई। इसी कारण उनकी बड़ी बेटी ममता न्यायिक सेवा व छोटी बेटी धर्मिष्ठा प्रशासनिक सेवा में ऊंचे ओहदे पर काबिज हैं।

गांव के ही सरकारी स्कूल में 12वीं तक पढ़ी ममता जिला प्रमुख भी रही, 5 साल पहले सिविल जज के लिए चयन हुआ
जज ममता ने बताया कि परिवार की हौसला अफजाई, जिद व जुनून से कठिन से कठिन लक्ष्य की प्राप्ति की जा सकती है। शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रही ममता ने आठवीं तक की अपनी पढ़ाई गांव के ही सरकारी स्कूल से की। उसके बाद नवमी से बारहवीं तक शिवगंज सरकारी स्कूल व जोधपुर के केएन कॉलेज से बीएससी और जेएनयूवी न्यू कैंपस से एमएससी की। इस बीच वे पाली जिला प्रमुख भी बनी। लॉ की पढ़ाई 2010 में पाली से ही की। 2014 में ज्यूडिशियल की परीक्षा के बाद इस होनहार छात्रा का सिविल जज के लिए चयन हो गया।

जज ममता

धर्मिष्ठा

धर्मिष्ठा 4 साल पहले आरएएस मेन्स में चयनित हुई, अभी महिला बाल विकास विभाग में सीडीपीओ
वही बहन धर्मिष्ठा ने भी आरएएस मेन्स 2015 में सफलता हासिल करते हुए महिला एवं बाल विकास में सीडीपीओ अधिकारी हैं। दोनों बहने फिलहाल उदयपुर में अपनी सेवाएं दे रही हैं। सिविल जज ममता का कहना है कि किसी भी क्षेत्र में रहे, वहां रहकर उत्कृष्ट प्रदर्शन करना ही मुख्य लक्ष्य है।

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