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ड्यूटी टाइम के बाद बेटे को कराते थे 6 घंटे प्रेक्टिस, घर में बनाई पिच और अब इंडियन क्रिकेट टीम में खेलेगा बेटा

बेटे की कामयाबी में बहा पिता का भी पसीना...12 साल में क्रिकेट सिखाना शुरू किया, सभी काम छुड़वा एक टारगेट सेट किया।

Bhaskar News Network | Last Modified - Jul 02, 2018, 04:14 PM IST

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    दीपक चाहर कोच के साथ।( दस साल पुरानी श्रीगंगानगर में एक तस्वीर। )

    श्रीगंगानगर ( राजस्थान)। इंग्लैंड में होने वाली टी-20 सीरीज के लिए श्रीगंगानगर के दीपक चाहर का भारतीय टीम में सिलेक्शन हुआ है। दीपक का बर्थ प्लेस आगरा का है, लेकिन उन्होंने क्रिकेट की शुरुआत श्रीगंगानगर में करीब 6 साल तक गेंदबाजी की बारीकियां सीखी थी। वे श्रीगंगानगर की ओर से खेलते भी रहे हैं। अब बुमराह के चोटिल होने के बाद बीसीसीआई ने आईपीएल में उनके प्रदर्शन को देखते हुए टीम में स्थान दिया है। दीपक की इस सफलता के पीछे एक कहानी और छुपी हुर्इ है, जो उनके पिता ने लिखी है।

    पिता क्रिकेटर नहीं बन सके तो बेटे को बना दिया क्रिकेटर

    - दीपक के पिता लोकेंद्र चाहर खुद क्रिकेटर बनना चाहते थे। लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण वे अपनी इस ख्वाहिश को पूरा नहीं कर सके। उन्हें एयरफोर्स में नौकरी मिली और वे देश की सेवा में जुट गए।

    - 2001 से 2006 तक वे श्रीगंगानगर के सूरतगढ़ में कार्यरत रहे और यहीं से उन्होंने अपने बेटे में एक अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार करने की नींव डाल दी।

    - शुरुआती दिनों में कुछ दिन दीपक ने सूरतगढ़ की शेरवुड क्रिकेट एकेडमी में कोच रणजीत सिंह थिंद के पास गेंदबाजी की बारीकियां सीखीं। इसके बाद पिता ने कोच बनकर दीपक को ट्रेनिंग देना शुरू कर दिया।

    पिता ड्यूटी टाइम के बाद 6 से 7 घंटे बेटे को कराते थे प्रैक्टिस
    - जब दीपक अपने पिता के साथ श्रीगंगानगर आए तो वह महज 12 साल के थे। तब उसने कुछ दिनों तक कोच रणजीत सिंह के पास ट्रेनिंग ली। लेकिन बाद में पिता लोकेंद्र ने ही उसे ट्रेनिंग देनी शुरू कर दी। लोकेंद्र बताते हैं कि उन्होंने दीपक के लिए एयरफोर्स कैंपस में ही पिच तैयार की थी। वहीं घर के आसपास भी पिच पर तैयारी कराते। ड्यूटी टाइम के बाद वे 6 से 7 घंटे दीपक को प्रैक्टिस कराते थे।

    5 साल तक काल्विन शील्ड में किया है हनुमानगढ़ का प्रतिनिधित्व :

    - दीपक चाहर ने 5 साल तक काल्विन शील्ड में हनुमानगढ़ का प्रतिनिधित्व किया था। जानकारी के मुताबिक चाहर दो साल काल्विन शील्ड में श्रीगंगानगर के लिए भी खेले थे।

    - हनुमानगढ़ में क्रिकेट को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले बीसीसीआई के लेवल टू कोच व फिटनेस ट्रेनर नवेंदू त्यागी के निर्देशन में ही दीपक चाहर ने तेज गेंदबाजी के गुर सीखे।

    - त्यागी बताते हैं, करीब 12 वर्ष की उम्र में ही दीपक चाहर ने जिला क्रिकेट क्लब में प्रेक्टिस शुरू कर दी थी। इसके बाद 2005-2012 के बीच में काल्विन शील्ड में हनुमानगढ़ का प्रतिनिधित्व किया।

    रणजी के पहले ही मैच में लिए थे 8 विकेट, तब आए सुर्खियों में
    - आईपीएल में चेन्नई सुपर किंग्स की ओर से कप्तान महेंद्र सिंह धोनी के अंडर में खेलने वाले दीपक चाहर का सिलेक्शन 2012-13 में पहली बार रणजी में हुआ था।

    - पिता लोकेंद्र ने बताया, उस समय दीपक ने अपने पहले ही मैच में 8 विकेट लिए थे और सबको हैरान कर दिया था। इसके बाद वह लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ता गया।आईपीएल के इस सीजन में भी दीपक ने 12 मैचों में 10 विकेट लिए हैं।

    - लोकेंद्र ने बताया, दीपक गेंदबाजी के साथ-साथ बल्लेबाजी भी अच्छी करता है। रणजी में पिछले सत्र में विरोधी टीम के बल्ले से छक्के छुड़ा दिए।

    सूरतगढ़ से निकले हैं कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी
    - दीपक के कोच रणजीत सिंह के मुताबिक, वह पिछले 18 साल से क्रिकेट एकेडमी चला रहे हैं। उनके पास से कई अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी निकले हैं। इससे पहले मनीष पांडे का आईपीएल में सिलेक्शन हुआ था, जिसने बाद में भारतीय टीम में जगह बनाई।

    - मनीष आईपीएल में शतक बनाने वाला पहला भारतीय बल्लेबाज बना था। इसके साथ गुजरात की टीम में खेेलने वाला सूरतगढ़ निवासी लेग स्पिनर अंकित सोनी और कर्नाटक प्रीमियर लीग में स्थान बनाने वाला पृथ्वीसिंह शेखावत उनकी एकेडमी से ट्रेनिंग ले चुके हैं।



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    दीपक चाहर।
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    दीपक का जन्म जरूर आगरा का है, लेकिन उन्होंने क्रिकेट की शुरुआत में श्रीगंगानगर में करीब 6 साल तक गेंदबाजी की बारीकियां सीखी थी।
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